श्रीनगर गढ़वाल बहुत समय पहले एक राज्य में एक राजा रहता था,उसके महल में एक बहुत सुंदर बड़ा बगीचा था,बगीचे की देख रख के लिए माली रखे गए थे,माली पूरे दिन बगीचे में रहते और पेड़ पौधों की देखभाल किया करते थे,राजा का एक हेड माली था,जिसके काम काज से बहुत खुश थे,बगीचे में एक अंगूर की बेल थी,जिसमें बहुत अंगूर फल थे,एक दिन बगीचे में एक चिड़िया आई उसने बगीचे में आकर उसने अंगूर चखे जो बहुत स्वादिष्ट और मीठे थे,उस स्वादको चखने के बाद वह चिड़िया हर रोज अंगूरों का स्वाद चखने आने लगी,चिड़िया हर दिन अंगूर के पेड़ पर बैठकर चुन-चुन कर सारे मीठे अंगूर खा जाती थी,खट्टे अध-पक्के अंगूर वह नीचे गिरा देती थी,चिड़िया की इस हरकत से माली को बहुत क्रोध आता था,वह उसे भागने का प्रयास करता लेकिन सफलता नहीं मिल पाती थी। बहुत प्रयासों के बाद भी जब माली को सफलता नहीं मिलती थी,तो उसने राजासे शिकायत की और बोला महाराज एक चिड़िया ने मुझे बहुत परेशान कर रखा है,उसको काबू में करना मेरे बस में नहीं है,अब आप ही कुछ बताएं,रहने खुद ही चिड़िया से निपटने का निर्णय किया अगले दिन वे बगीचे में गए और अंगूर की घनी बेल के पीछे छिप गए,अपनी आदतन चिड़िया अपने समय पर वहां अंगूर की बेल पर बैठी ओर आदतन अंगूर खाने लगी अवसर देख वहां छुपे राजा ने चिड़िया को पकड़ लिया,चिड़िया ने राजा की पकड़ से छुटने का बहुत प्रयास किया,किंतु व्यर्थ रहा अंत में राजा से याचना करने लगी कि वे उस छोटी सी जानको छोड़ दें,राजा उसके लिए तैयार नहीं हुए,तब चिड़िया बोली हे राजन अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो मैं तुम्हें 4 बाते बताऊंगी। राजा पहले ही राजा से क्रोधित था,फिर भी उन्होंने चिड़िया की बात मान ली और बोले कि ठीक है,पहले तुम मुझे चार बाते बताओ उसे सुनने के बाद मैं निर्णय करूंगा कि तुम को छोड़ना है या नहीं। चिड़िया बोली ठीक है,राजन तो सुनिए पहली कि कभी किसी शत्रु को हाथ आए जाने न देना। दूसरा कि कभी किसी असंभव बात प्रत्यक्षीकृत मत करो। चिड़िया बोली तीसरी बात,बीती बात पर पछतावा न करे। और चौथी बात हे राजन बहुत बड़ी और गहरी बात है,मैं तुम्हे वह बताना तो चाहती हूं,मगर तुमने मुझे इतनी जोर से पकड़ रखा है कि मेरा दम घुट रहा है,तुम अपनी पकड़ ढीली करो मैं तुम्हे चौथी बात बताऊंगा चिड़िया बोली,राजा ने चिड़िया की पकड़ ढीली करदी,ढीली पकड़ का फायदा उठाते चिड़िया राजा के हाथ से फुर्र उड़ गई और पेड़ पर जा कर बैठ गई,राजा उस चिड़िया को ठगा-सा देखते रह गया,पेड़ के ऊंची दलपत बैठ चिड़िया राजा से बोली,राजन जान की चौथी बात को सुनने भर से ही कुछ नहीं होता!उसपर अमल में लाना भी उतना ही जरूरी था,जितना ज्ञान न सुनना अभी मैने तुम्हे तीन 3 बातें बताई उन्हें सुन कर भी तुमने अनजान समझा,पहली बात ये थी कि हाथ आए शत्रु को कभी मत छोड़िए,लेकिन अपने अपने हाथ में आए शत्रु याने मुझे छोड़ दिया, दूसरी बात थी कि असंभव बात पर यकीन न करे,लेकिन जब मैने कहा चौथी बात बहुत गहरी है,तीसरी बात से मैने आपको आगा किया था कि बीती बात पर पछतावा न करें तो देखिए मैं आपके चंगुल से छूट गया और आप पछता रहे हैं,इतना कहकर चिड़िया वहां से फुर्र हो गई। नोट शिक्षा :- मात्र जान अर्जित करने से कोई ज्ञानी नहीं हो जाता ज्ञानी वो होता है,जो अर्जित ज्ञान पर अमल करता है।
छोटी सी चिड़िया से सीख–एम.एस.रावत
