मसूरी में भारी जाम से जनजीवन अस्त-व्यस्त, व्यापार भी प्रभावित



उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल मसूरी में इन दिनों जाम की समस्या चरम पर है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी इलाकों से भारी संख्या में पर्यटक गर्मी से राहत पाने के लिए मसूरी का रुख कर रहे हैं। लेकिन पर्यटकों की इस भीड़ ने मसूरी की संकरी सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा कर दी है। मसूरी-देहरादून मार्ग पर कई-कई घंटे लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है।मसूरी में माल रोड, लाइब्रेरी चौक, कुलरी और कैमल्स बैक रोड जैसे इलाके जाम से सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्थानीय निवासियों को बाजार जाने, स्कूल पहुंचने और अस्पताल पहुंचने में भी भारी कठिनाई हो रही है। स्थानीय निवासी सौरभ सिंह का कहना है हम तो बाहर निकलने से डरते हैं। जाम इतना भयंकर होता है कि एक किलोमीटर चलने में एक घंटा लग जाता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद, स्थानीय व्यापारियों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है। जाम के कारण लोग दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। दिन के समय की गर्मी और ट्रैफिक के कारण पर्यटक ज्यादा समय होटल के कमरे में बिता रहे हैं। छोटे व्यापारी, टैक्सी चालक, और होटलों में कार्यरत कर्मचारी विशेष रूप से प्रभावित हैं। बता दे कि सड़कों के किनारे खड़ी गाड़ियाँ ट्रैफिक की रफ्तार रोक रही हैं। मसूरी की जयादातर सड़कें पुराने ढांचे की हैं जो इतनी बड़ी भीड़ का बोझ नहीं उठा पा रही हैं। मसूरी में स्थानीय प्रशासन की र्प्यटन सीजन को लेकर लचर तैयारी का खामियाजा लोगो को भुगतना पड रहा है। ट्रैफिक कंट्रोल के लिए पर्याप्त पुलिस बल और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट की भारी कमी देखी जा रही है। लोगो ने सरकार और प्रशासन को सुझाव दिये है कि मसूरी शहर के आसपास मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाए वाहनों की एंट्री पर समय निर्धारित किया जाए। रोपवे जैसी वैकल्पिक परिवहन सुविधा पर कार्य हो।पीक सीजन में यात्रा करने से पहले होटल बुकिंग और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी ली जाये। मसूरी जैसे छोटे पर्वतीय नगरों में पर्यटन की अधिकता एक ओर जहां आय का स्रोत है, वहीं यह असंभव ट्रैफिक और प्रशासनिक बोझ भी बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो इससे न केवल पर्यटक अनुभव बिगड़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर होगा।