पर्यटन नगरी मसूरी में ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए शुरू की गई शटल सेवा योजना अब विफल होती नजर आ रही है। प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर शुरू की गई यह सेवा न तो स्थानीय जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाई, और न ही पर्यटकों को राहत दिला सकी।प्रशासन ने मसूरी में ट्रैफिक को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किंगक्रेग पार्किंग से लाइब्रेरी चौक और पिक्चर पैलेस तक शटल सेवा शुरू की थी। मकसद था कि पर्यटक बाहरी पार्किंग में वाहन खड़ा कर शटल से मुख्य बाजारों तक पहुंचें, जिससे भीड़भाड़ कम हो और पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़े। शुरुआत में उम्मीदें बहुत थीं, लेकिन योजना धरातल पर टिक नहीं पाई। लोगों को न शटल की नियमित सेवा मिली, न ही समय पर बसें। प्रचार की कमी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव ने रही-सही कसर पूरी कर दी।स्थानीय व्यापारियों और होटल मालिकों ने भी इस योजना का विरोध किया, उनका कहना था कि इससे ग्राहक सीधे बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे, जिससे व्यवसाय पर असर पड़ रहा है। वहीं प्रशासन की ओर से न तो कोई फीडबैक सिस्टम विकसित किया गया और न ही समस्याओं का समाधान निकाला गया। लोगों का कहना है कि अगर करोड़ों रुपये खर्च कर भी व्यवस्था नहीं सुधारी जा सकती, तो ऐसे प्रोजेक्ट का क्या औचित्य है? अब जनता का सवाल है कि जवाबदेही किसकी है? मसूरी की शटल सेवा योजना फिलहाल विफल साबित हुई है। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और बिना प्लानिंग के की गई योजना का उदाहरण बन गया है। जब तक जनता को भरोसेमंद, नियमित और पारदर्शी सेवाएं नहीं मिलेंगी, तब तक ऐसी योजनाएं सिर्फ कागजों में ही सफल रहेंगी।
मसूरी में शटल सेवा हुई फेल, जनता के करोड़ों रुपये पानी में गए, प्रशासन पर उठे सवाल
