श्रीनगर गढ़वाल। वर्षा ऋतु केवल धरती को हरियाली से नहीं सजाती,बल्कि यह फलदार पौधों की बागवानी के लिए भी स्वर्णिम समय प्रदान करती है। आम,अमरूद,लीची,आंवला,नीबूअंगूर,कटहल और अनार जैसे बहुपरिचित फल पौधों का रोपण यदि वैज्ञानिक पद्धतियों से किया जाए तो यह कृषक की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है। वरिष्ठ उद्यान विशेषज्ञ डॉ.राजेन्द्र कुकसाल के अनुसार,वर्षाकालीन फल पौधारोपण एक रणनीतिक कार्य है जिसमें जलवायु,स्थल चयन,मृदा गुणवत्ता,पौध की किस्म और बागवानी की वैज्ञानिक विधियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्थल चयन-सफलता की पहली सीढ़ी,1.फल पौधों का चयन क्षेत्र विशेष की जलवायु और ऊंचाई के अनुसार हो। 1600 मीटर तक के क्षेत्रों में बर्षाकालीन फल पौधों की बागवानी उपयुक्त रहती है। 2.हिमालय के समीपवर्ती क्षेत्रों में आम-लीची की बजाय नींबूवर्गीय पौध जैसे संतरा-माल्टा अधिक उपयुक्त हैं। 3.बाजार की मांग और ढुलाई की सुगमता को प्राथमिकता दें। 4.सिंचाई,मजदूर और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करें। भूमि चयन और मृदा परीक्षण-पौध की जड़ें यहीं से पोषित होती हैं। फलदार पौधे बलुई दोमट,जीवांशयुक्त मिट्टी में सबसे अच्छे पनपते हैं। मृदा परीक्षण से पी.एच.मान,कार्बन की मात्रा और पोषक तत्वों की उपलब्धता की सटीक जानकारी मिलती है। आदर्श जैविक कार्बन स्तर-0.8% अधिकांश स्थानों पर यह 0.25-0.35% ही पाया जाता है। उपाय-जंगल की सतह की मिट्टी,सड़ी गोबर/कम्पोस्ट,मल्चिंग,बायोचार एवं ह्यूमिक एसिड का उपयोग। अम्लीय मिट्टी में चूना,क्षारीय में जिप्सम मिलाना चाहिए। उचित पीएच मान-6.5 से 7.2 फल पौधों के लिए उत्तम होता है। उन्नत किस्मों का चयन-गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि,फल प्रमुख किस्में-आम दशहरी,लंगड़ा,चौसा,आम्रपाली,मल्लिका,पूसा अरुणिमा अमरूद लखनऊ-49,इलाहाबादी सफेदा लीची कलकतिया,रोजसेन्टड
अनार गणेश,वेदाना आंवला एन-6,एन-7,हाथी झूल
अंगूर पूसा सीडलेस,हिमराड
नींबूवर्गीय,किन्नो,वाशिंगटन नेवल,श्रीनगर संतरा,नोट-आम के कलमी पौधों के साथ गुठली भी बोये,ताकि भविष्य में इनसीटू ग्राफ्टिंग संभव हो सके। रेखांकन व गड्ढा खुदाई-वैज्ञानिक तरीके से बागवानी,आम/कटहल/आंवला-10×10 मीटर,लीची/बेर-8×8 मीटर,अमरूद/नींबू-6×6 मीटर,अंगूर-3×3 मीटर,गड्ढा खुदाई-1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे मई-जून में खोदें।
गड्ढा भराई-सड़ी गोबर की खाद,ट्रायकोडर्मा,पुराने बगीचे की मिट्टी और ह्यूमिक एसिड से भरें। पौधारोपण के समय ध्यान योग्य बातें-पौधे की उम्र 1-2 वर्ष के मध्य हो। कलम का जोड़ मिट्टी से ऊपर रहे। पौध स्वस्थ,किस्म अनुसार व प्रमाणित नर्सरी से खरीदे जाएं। लीची के लिए पुराने बाग की मिट्टी अवश्य मिलाएं,जिससे माइकोराइजा कवक पौध को पोषित कर सके। पौधारोपण के बाद देखभाल-1.नियमित सिंचाई और मल्चिंग द्वारा नमी बनाए रखें। 2.पौधों से निकलने वाले अवांछनीय जल-प्रारोह (Water Shoots) को हटाएं। 3.पाले से बचाव के उपाय करें। 4.समय-समय पर पोषण और कटाई-छंटाई करें। विभागीय सहायता-पौधारोपण प्रमाण राजकीय नर्सरी से लें। यदि बागवानी सरकारी योजना के अंतर्गत हो रही है तो सभी रसीद व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। गुणवत्ता में कमी या अफलत पर उत्तराखण्ड नर्सरी एक्ट व उपभोक्ता फोरम में दावा किया जा सकता है। निष्कर्ष-वर्षा ऋतु का हर बूंद किसान के लिए अमूल्य है,यदि इसे समझदारी से उपयोग किया जाए। वैज्ञानिक तकनीक,उन्नत किस्में और नियमित देखभाल मिलकर एक समृद्ध,टिकाऊ और लाभकारी फल उद्यान का निर्माण कर सकती हैं। फलोत्पादन केवल उत्पादन नहीं,भविष्य में आय और आत्मनिर्भरता का साधन भी बन सकता है।
वर्षा काल में फल पौधों का रोपण,समृद्ध बागवानी का सुनहरा अवसर–डॉ.राजेन्द्र कुकसाल उद्यान विशेषज्ञ
