अंधेरी आँखों का उजाला बना मसूरी का लाल!” सेमुएल चंद्र का अंतर्राष्ट्रीय ब्लाइंड फुटबॉल चैंपियनशिप में ऐतिहासिक चयन



जब किसी शहर का बेटा सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी सपने देखे जो देख नहीं सकते, तो वह सिर्फ खिलाड़ी नहीं एक मिसाल बन जाता है। मसूरी के सेमुएल चंद्र ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। सेंट लारेंस हाई स्कूल के खेल अध्यापक सेमुएल अब अंतर्राष्ट्रीय ब्लाइंड फुटबॉल चौंपियनशिप 2025, एशियन चौम्पियनशिप, और नेशनल कप में बतौर रैफरी अपनी भूमिका निभाएंगे। तीनों प्रतियोगिताएं 23 सितंबर से 12 अक्टूबर तक केरल के कोच्ची में आयोजित होंगी। इन तीनों प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स के लिए एक साथ चयन होना, सेमुएल की मेहनत, समर्पण और उनके जुनून का जीवंत प्रमाण है। सेमुएल कहते हैं कि इन टूर्नामेंट्स में मैं रौशनी नहीं, हौसले का गवाह बनूंगा। उन्होने कहा कि जब मैंने पहली बार ब्लाइंड फुटबॉल देखा, तो समझ में आया कि यह सिर्फ खेल नहीं हौसले की उड़ान है। रैफरी के रूप में मेरा चयन मेरे लिए सम्मान की बात है। यह मेरी नहीं, पूरे मसूरी और उन खिलाड़ियों की जीत है जो बिना देखे मैदान पर कमाल करते हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक इंडिया कोच नरेश नयाल को दिया, जिन्होंने उन्हें न केवल रैफरी की बारीकियाँ सिखाईं, बल्कि इस खेल की आत्मा से जोड़ा। सेमुएल का अगला लक्ष्य है कि पैरा ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना। वह लगातार एनआईईपीवीडी, देहरादून जाकर दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के साथ अभ्यास कर रहे हैं। उनके शब्दों में, मैं चाहता हूँ कि एक दिन दुनिया कहे ‘देखो, यही है वो रैफरी जिसने अंधेरे में भी न्याय की रौशनी फैलाई। सेंट लारेंस हाई स्कूल के छात्र, अध्यापक, और पूरा मसूरी आज गर्व से फूला नहीं समा रहा। हर कोना से सेमुएल को बधाइयाँ मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर प्राइड आफ मसूरी ट्रेंड कर रहा है, और लोग कह रहे हैं सेमुएल, तुमने बता दिया कि सपनों को देखने के लिए आंखें नहीं, सिर्फ जज़्बा चाहिए होता है। जहां लोग रोशनी के बिना डरते हैं, वहीं सेमुएल चंद्र अंधेरे को दिशा दिखाते हैं। यह सिर्फ चयन नहीं क्रांति की शुरुआत है।