श्रीनगर गढ़वाल। सावन माह का तृतीय सोमवार एक बार फिर देवभूमि उत्तराखण्ड की लोक-परंपराओं,भक्ति और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊंचाई दे गया। श्रीनगर की प्रतिष्ठित श्रीयंत्र कीर्तन-भजन मंडली द्वारा ऐतिहासिक शक्तिपीठ मां दक्षिण कालिका के कालीमठ दरबार में रविवार रात्रि एक भव्य रात्रि जागरण का आयोजन किया गया,जो श्रद्धा,संस्कृति और लोक ध्वनि का विलक्षण संगम बन गया। पूरी रात्रि गूंजते रहे जय मां काली,हर हर महादेव और बम बम भोले के गगनभेदी जयघोष। ढोल-दमाऊं,नगाड़े, मंजीरे,ढोलक और हारमोनियम की मधुर संगत में गाए गए शिव-शक्ति भजनों ने ऐसा भक्तिमय वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु झूमने और साथ गाने को विवश हो उठे। पारंपरिक गढ़वाली लोक भक्ति की प्रस्तुतियों ने मां कालिका के दरबार को सजीव अनुभूति प्रदान की। जागरण की विशेष आरती में श्रद्धालुओं ने सामूहिक भागीदारी निभाई और मां के चरणों में आराधना कर जीवन कल्याण की कामना की। आयोजन का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ,जिसके पश्चात सोमवार भोर में श्रीयंत्र मंडली के समस्त सदस्यों ने भगवान शिव का वैदिक विधि से पूजन-अर्चन,जलाभिषेक,दुग्धाभिषेक,बेलपत्र अर्पण,धूप-दीप,एवं शिव महिम्न स्तोत्र के पाठ के साथ सावन सोमवार की पूजा को पूर्णता दी। इस आध्यात्मिक आयोजन की विशिष्टता यही नहीं थमी श्रीयंत्र भजन मंडली के सदस्यों ने कालीमठ से लौटते समय गंगतला महादेव में भी पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक कर भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं था,बल्कि उत्तराखण्ड की उस अमिट सांस्कृतिक परंपरा की पुनर्स्थापना भी था,जिसमें रात्रि जागरण के पश्चात शिव की अर्चना अनिवार्य मानी जाती है। वर्षों से साधना में रत है श्रीयंत्र मंडली उल्लेखनीय है कि श्रीयंत्र कीर्तन-भजन मंडली विगत 35 वर्षों से सावन मास में भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से गढ़वाल व कुमाऊं के सिद्धपीठों,मठ-मंदिरों और शिवालयों में अपनी भजन संध्या प्रस्तुत कर रही है। इस मंडली ने लोक-धुनों में पगी भक्ति को मंच पर लाकर न केवल ईश्वर से जुड़ाव बढ़ाया,बल्कि गढ़वाली संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है। इस बार के जागरण में मंडली के प्रमुख भजन साधकों में शामिल रहे- दिनेश मिश्रा (हरीश),पी.सी.नौटियाल,प्रवेश नौटियाल,जगत्मबा प्रसाद सेमवाल,मुकेश सेमवाल,चन्द्र प्रकाश नैथाणी,कुशलानंद भट्ट,ज्ञानी मुनिंद्र सिंह,विजय गैरोला,राघव जोशी,धन सिंह राणा,कुलदीप चौहान,देवेंद्र मिश्रा,दीपक रावत,जगन्नाथ बछेती,ओम प्रकाश पोखरियाल,जगमोहन रौथाण,राजेंद्र सिंह रावत,विनोद गुसाईं व हरेंद्र सिंह भण्डारी आदि लोग मौजूद रहें। भजन में समाहित होती है आत्मा-मंडली के वरिष्ठ सदस्य हरीश मिश्रा ने कहा हमारा उद्देश्य केवल भक्ति का प्रचार नहीं,बल्कि गढ़वाली लोक-संस्कृति को जीवित रखना है। जागरण हमारे लिए केवल कार्यक्रम नहीं,भावनाओं की साधना है। वहीं कुशलानंद भट्ट ने कहा मां कालिका की दिव्य उपस्थिति और श्रद्धालुओं का समर्पण देख ऐसा प्रतीत हुआ मानो हर स्वर और ताल में स्वयं ईश्वर समाहित हो गए हों। लोकधारा की जीवन्तता है ये आयोजन उत्तराखण्ड में धार्मिक आयोजन केवल पूजन नहीं,संस्कृति की जीवंतता हैं। श्रीयंत्र मंडली जैसे समूह पीढ़ियों से चली आ रही भजन-जागरण परंपरा को गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं। जब भजनों में गढ़वाली लोक-धुन और शिव-शक्ति की स्तुति मिलती है,तो वह केवल भक्ति नहीं,एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण बन जाती है। एक श्रद्धालु की वाणी में इस आयोजन की सच्चाई झलकती है। ऐसा लगा जैसे मां कालिका स्वयं इस दरबार में विराजमान थीं। भजनों की शक्ति ने हमें भीतर तक झकझोर दिया।
देवभूमि में भक्ति की बरसात-श्रीयंत्र मंडली ने किया मां कालिका दरबार में रात्रि जागरण,शिव-शक्ति के भजनों से गूंज उठीं कालीमठ की वादियां
