आपदा की दृष्टि से संवेदनशील विद्यालय भवनों की हो उच्च स्तरीय जांच–कुशलानाथ

श्रीनगर गढ़वाल। राज्य में लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए सामाजिक एवं आरटीई कार्यकर्ता,वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता कुशलानाथ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत को एक गंभीर सुझाव पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने उत्तराखंड के आपदा संभावित क्षेत्रों विशेष रूप से गाड़-गधेरों में बने सरकारी,अर्द्धसरकारी व निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक आपदा संभावित राज्य है,जहां वर्षा ऋतु में भूस्खलन,बादल फटने और नदी-नालों में उफान जैसी घटनाएं आम हो चली हैं। ऐसे में जिन विद्यालय भवनों की स्थिति जर्जर है या जो गाड़-गधेरों जैसे संवेदनशील स्थानों पर बने हैं, वे बच्चों की जान जोखिम में डाल सकते हैं। मुख्य मांगें निम्न हैं-1.उच्च स्तरीय तकनीकी समिति की जांच-राज्य स्तर पर एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति गठित कर गाड़-गधेरों में बने समस्त विद्यालयों की जांच की जाए। जो विद्यालय आपदा की दृष्टि से असुरक्षित पाए जाएं,उनकी मान्यता समाप्त की जाए या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। 2.विकासखंड स्तर पर स्थलीय निरीक्षण समिति-प्रत्येक विकासखंड में उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाए,जो विद्यालय भवनों का भौगोलिक व भौतिक सत्यापन करे। खंड शिक्षा अधिकारियों की इस प्रक्रिया में जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाए। 3.प्री-प्राइमरी से इंटरमीडिएट तक सभी विद्यालयों का सर्वेक्षण,सरकारी,अर्द्धसरकारी एवं निजी प्राइवेट विद्यालयों के भवनों की संरचनात्मक स्थिति की जांच की जाए। जर्जर भवनों में चल रही कक्षाओं को अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। 4.पूर्व से जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों की सूचीबद्ध जांच। उन विद्यालयों की भी जांच हो जो आपदा के पूर्व ही खराब हालत में थे ताकि बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से समय रहते कदम उठाया जा सके। प्रतिलिपि प्रेषित की गई-राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव उत्तराखंड राज्य के शिक्षा महानिदेशक। कुशलानाथ ने यह भी आग्रह किया कि यह पहल बाल अधिकार संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यदि समय रहते इन सुझावों पर कार्रवाई की जाती है, तो भविष्य में संभावित त्रासदियों से बचा जा सकता है और बच्चों की शिक्षा व जीवन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।