Tuesday 10/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
सूबे के शत-प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में बनेंगे बालिका शौचालय–डाॅ.धन सिंह रावतनन्दादेवी राजजात के लिए 109.65 करोड़ स्वीकृत–महाराजन्याय पंचायत कुंडी के पाली में आयोजित हुआ बहुउद्देश्यीय शिविर,69 शिकायतें दर्ज,28 का मौके पर निस्तारणपीएम श्री अटल उत्कृष्ट इंटर कॉलेज डांगचौरा में सिटीजनशिप स्किल क्विज का आयोजन,विद्यार्थियों ने दिखाई ज्ञान व प्रतिभा की शानदार झलकडेढ़ लाख की स्मैक के साथ शातिर नशा तस्कर गिरफ्तार, किच्छा पुलिस की कार्रवाईकिच्छा। ऊधमसिंहनगर पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत किच्छा कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शातिर नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब डेढ़ लाख रुपये कीमत की स्मैक बरामद हुई है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देश पर जनपद में अवैध नशे की तस्करी और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी सितारगंज के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली किच्छा द्वारा गठित पुलिस टीम ने सोमवार को चेकिंग के दौरान ग्राम मिलख को जाने वाले मार्ग पर स्थित मजार के पास एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को रोककर तलाशी ली।तलाशी के दौरान आरोपी के पास से मोटरसाइकिल संख्या UK 06 BD 2599 से परिवहन करते हुए एक प्लास्टिक की पन्नी में 15.20 ग्राम अवैध स्मैक, 1700 रुपये नकद और एक ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया गया। बरामद स्मैक की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग डेढ़ लाख रुपये आंकी गई है।पुलिस ने आरोपी शावेज खान उर्फ समीर (27 वर्ष) पुत्र असलम खान निवासी ग्राम दरऊ, थाना किच्छा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ कोतवाली किच्छा में एफआईआर संख्या 79/2026 के तहत धारा 8/21/60/29 एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश किया जा रहा है।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी का पूर्व में भी मादक पदार्थ तस्करी से जुड़ा आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मुकदमे दर्ज हैं।राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में उत्तराखंड के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, जीते कई पदकहाउस ऑफ हिमालयाज की तर्ज पर नगर निगम बनायेगा ब्रांडः महापौरमंगलवार को नॉनवेज परोसने पर सामान जब्त
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अद्भुत हमारी संस्कृति-इगास पर्व पर गायों की पूजा और भैला जलाने की अनुपम परंपरा ग्रामीण जीवन-आस्था और लोक आनंद का अद्वितीय संगम

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की लोक संस्कृति में इगास बग्वाल केवल दीपों का पर्व नहीं,बल्कि यह हमारे जीवन,श्रम,पशुधन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अद्वितीय उत्सव है। यह पर्व उस आत्मीय रिश्‍ते की झलक दिखाता है,जो सदियों से मनुष्य,पशु और धरती के बीच गहराई से बुना हुआ है। गाय मातृत्व,समृद्धि और कृषि संस्कृति की आत्मा इगास पर्व की सुबह गांवों में विशेष उल्लास का वातावरण रहता है। घर-घर में गायों और बैलों को स्नान कराया जाता है। उन्हें हल्दी,रोली और चावल से तिलक लगाया जाता है। गले में फूलों की मालाएं सजाई जाती हैं और स्नेहपूर्वक गुड़,आटे की छापड़ी या पुरन खिलाई जाती है। यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि कृतज्ञता का प्रतीक है क्योंकि गाय हमारे अन्न,ऊर्जा और आजीविका की जननी है। वह खेतों की उर्वरता,दूध की मधुरता और जीवन की समृद्धि का स्रोत है। गढ़वाल की लोक कहावत इस भावना को बड़े सहज रूप में व्यक्त करती है गाय बिनु घर उजाड़,बैल बिनु खेत सूने। अर्थात गाय और बैल के बिना न तो घर का अस्तित्व है,न खेती का जीवन। भेलो जलाना-अंधकार से उजाले की ओर यात्रा का प्रतीक संध्या ढलते ही गांवों में बच्चों और युवाओं के चेहरे खुशी से दमक उठते हैं। हर हाथ में भेलो यानी लकड़ी या घास-फूस से बनी छोटी-छोटी मशालें जल उठती हैं। आसमान की ओर घूमती हुई इन जलती भेलो की कतारें जब पूरे आकाश में घूमती हैं,तो मानो अंधकार को पराजित करने और उजाले का स्वागत करने का संदेश देती हैं। यह दृश्य न केवल सौंदर्य का,बल्कि लोक-आस्था और एकता का प्रतीक बन जाता है। लोक आनंद में रमा पूरा गांव
इगास पर्व के इस अवसर पर हर घर में दीपों की ज्योति,ढोल-दमाऊ की थाप और लोकगीतों की मधुर गूंज वातावरण को पावन बना देती है। बच्चे भेलो जलाते हैं,बुजुर्ग लोककथाएं सुनाते हैं और महिलाएं पारंपरिक पकवानों की सुगंध से घर आंगन महकाती हैं। इस पावन अवसर पर पूर्व विधायक गणेश गोदियाल एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता राजेश चमोली ने भी थलीसैंण क्षेत्र में आयोजित गाय पूजन कार्यक्रम में सहभागिता की। दोनों जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गौमाता की पूजा की और इस परंपरा को हमारी संस्कृति की आत्मा बताया। पूर्व विधायक गणेश गोदियाल ने कहा कि इगास हमारी मिट्टी की खुशबू और लोक जीवन की आत्मा से जुड़ा पर्व है। यह हमें हमारी जड़ों,परंपराओं और पशुधन के महत्व की याद दिलाता है। गायों की पूजा केवल आस्था नहीं,बल्कि हमारी जीवनशैली का आधार है। जब तक हम अपनी संस्कृति को संजोए रखेंगे,तब तक हमारी पहचान अमर रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि इगास पर्व सामाजिक एकता,श्रम और कृतज्ञता का प्रतीक है जो हमें प्रकृति और परिश्रम के प्रति सम्मान का भाव सिखाता है। गांववासियों ने भी दीपों,गीतों और उल्लास के बीच इस पर्व को एक सामाजिक उत्सव के रूप में मनाया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई आनंद और श्रद्धा में सराबोर नजर आया। इगास-लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव इगास बग्वाल केवल तिथि का नहीं,बल्कि हमारी लोक आत्मा का उत्सव है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची समृद्धि केवल संपत्ति में नहीं,बल्कि प्रकृति, पशुधन और संस्कृति के प्रति सम्मान में निहित है। जहां दीप जलते हैं,वहां अंधकार टिक नहीं पाता और जहां इगास मनाई जाती है,वहां लोक संस्कृति सजीव रहती है।

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