Tuesday 10/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
डेढ़ लाख की स्मैक के साथ शातिर नशा तस्कर गिरफ्तार, किच्छा पुलिस की कार्रवाईकिच्छा। ऊधमसिंहनगर पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत किच्छा कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शातिर नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब डेढ़ लाख रुपये कीमत की स्मैक बरामद हुई है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देश पर जनपद में अवैध नशे की तस्करी और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी सितारगंज के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली किच्छा द्वारा गठित पुलिस टीम ने सोमवार को चेकिंग के दौरान ग्राम मिलख को जाने वाले मार्ग पर स्थित मजार के पास एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को रोककर तलाशी ली।तलाशी के दौरान आरोपी के पास से मोटरसाइकिल संख्या UK 06 BD 2599 से परिवहन करते हुए एक प्लास्टिक की पन्नी में 15.20 ग्राम अवैध स्मैक, 1700 रुपये नकद और एक ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया गया। बरामद स्मैक की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग डेढ़ लाख रुपये आंकी गई है।पुलिस ने आरोपी शावेज खान उर्फ समीर (27 वर्ष) पुत्र असलम खान निवासी ग्राम दरऊ, थाना किच्छा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ कोतवाली किच्छा में एफआईआर संख्या 79/2026 के तहत धारा 8/21/60/29 एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश किया जा रहा है।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी का पूर्व में भी मादक पदार्थ तस्करी से जुड़ा आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मुकदमे दर्ज हैं।राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में उत्तराखंड के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, जीते कई पदकहाउस ऑफ हिमालयाज की तर्ज पर नगर निगम बनायेगा ब्रांडः महापौरमंगलवार को नॉनवेज परोसने पर सामान जब्तलोहाघाट विधानसभा में भाजपा से आने लगे अभी से टिकट के दावेदार।एआई टूल्स से एजुकेशन, रिसर्चऔर इंडस्ट्रीज़ में नई संभावनाएं
राज्य

एमओयू साइन-हैप्रेक और हिमालया वेलनेस मिलकर बढ़ाएंगे औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती पहाड़ के किसानों को मिलेगा नया आर्थिक आधार


श्रीनगर गढ़वाल। औषधीय और सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहन देने,ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) और बेंगलुरु स्थित हिमालया वेलनेस कंपनी के बीच एक ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) हुआ है। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थान औषधीय पौधों के अनुसंधान,प्रशिक्षण और व्यावसायिक उत्पादन में सहयोग करेंगे। हैप्रेक परिसर में आयोजित इस समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित ने बताया कि यह करार न केवल औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है,बल्कि इससे स्थानीय समुदायों को स्थायी आजीविका के नए अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हैप्रेक अपनी उन्नत नर्सरी में दारूहल्दी जैसे उच्च औषधीय मूल्य वाले पौधों की प्रजातियों का विकास करेगा। इन पौधों की संगठित खेती से जंगली प्रजातियों पर दबाव घटेगा और किसानों को सतत आर्थिक लाभ मिलेगा। डॉ.पुरोहित ने आगे कहा इस एमओयू से न केवल पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता संरक्षण को बल मिलेगा,बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में हरित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी। यह साझेदारी युवाओं के लिए रोजगार,प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर लेकर आई है। उन्होंने बताया कि हिमालया कंपनी इस समझौते के अंतर्गत हैप्रेक से जुड़े स्नातकोत्तर छात्रों को औद्योगिक प्रशिक्षण,इंटर्नशिप और शोध परियोजनाओं के अवसर प्रदान करेगी,जिससे वे औषधीय पौधों के प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन और विपणन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। हैप्रेक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.सुदीप सेमवाल ने इस पहल को शोध और उद्योग के बीच सेतु बताया। उन्होंने कहा हिमालया जैसी अग्रणी कंपनी के साथ सहयोग से औषधीय पौधों की खेती को नया आयाम मिलेगा। इससे स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक तकनीक,बाजार और नीति समर्थन एक साथ मिल सकेगा। वहीं हिमालया वेलनेस कंपनी के हेड-बॉटेनिकल एक्सट्रैक्शन यूनिट डॉ.अतुल एन.जाधव ने इस पहल को विन-विन मॉडल की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि यह तीन वर्षीय परियोजना न केवल पर्यावरणीय स्थिरता और जैव विविधता संरक्षण को बल देगी,बल्कि युवाओं में हरित उद्यमिता (Green Entrepreneurship) को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस साझेदारी के माध्यम से उत्तराखंड राज्य औषधीय पौधों के वैश्विक बाजार में एक सशक्त पहचान बना सकेगा। डॉ.जाधव ने कहा हिमालयी क्षेत्रों की समृद्ध जैव संपदा को वैज्ञानिक दिशा देकर ही हम प्रकृति,समुदाय और उद्योग-तीनों के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं। यह समझौता उसी दिशा में ठोस कदम है। यह समझौता आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था,पर्यावरणीय स्थिरता और औषधीय पौधों के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार की नई गाथा लिखेगा।

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