प्रदेश सरकार लौह पुरुष के आदर्शों पर दृढ़तापूर्वक अग्रसर–सतपाल महाराज

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। सरदार वल्लभभाई पटेल की 150 वीं जयंती के अवसर पर प्रदेश भर में आयोजित एकता कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत बुधवार को चौबट्टाखाल तहसील में यूनिटी मार्च का भव्य समापन हुआ। कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक सतपाल महाराज ने स्वयं कार्यक्रम में प्रतिभाग कर इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक गरिमामय बनाया। यह यूनिटी मार्च नौगांवखाल से आरंभ होकर चौबट्टाखाल तहसील मुख्यालय में समाप्त हुआ,जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय जनता,जनप्रतिनिधि,युवा,छात्र,स्वयंसेवी संस्थाएं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पूरे मार्ग में सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण में योगदान का स्मरण कर देशभक्ति और एकता का संदेश बुलंद किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के पश्चात देश की 562 से अधिक रियासतों का विलय कर एक भारत,श्रेष्ठ भारत की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा सरदार पटेल की दूरदृष्टि,दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति समर्पण ने देश को सदियों की विखंडन नीति से मुक्त कर एक धागे में पिरोया। उत्तराखंड सरकार भी उन्हीं के आदर्शों पर सतत कार्य कर रही है-चाहे वह विकास,सुशासन हो या राष्ट्रीय एकता। महाराज ने बताया कि पूरे देश के साथ उत्तराखंड में भी इस ऐतिहासिक वर्षगांठ पर सांस्कृतिक,सामाजिक और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं,जिनका उद्देश्य युवाओं में एकता,समरसता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है। यूनिटी मार्च के बाद महाराज ने विकासखंड पोखड़ा के बगड़ीगाड़ गांव पहुंचकर उस पीड़ित परिवार से मुलाकात की,जिसकी सदस्य रानी देवी की बाघ के हमले में दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि ऐसे दुष्कर समय में सरकार उनके साथ पूरी संवेदना और सहायता के साथ खड़ी है। उन्होंने संबंधित विभागों को शीघ्र राहत प्रदान करने के निर्देश भी दिए। यूनिटी मार्च के दौरान क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भी प्रतिभाग कर कार्यक्रम को सफल बनाया। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व ब्लॉक प्रमुख नीरज पांथरी,राकेश नैथानी,महिपाल नेगी,सर्वेंद्र,शैलेश दर्शन,नरेंद्र डंडरियाल,वेदप्रकाश वर्मा,प्रभु शरण बुडाकोटी,गणेश रावत,देवेंद्र भट्ट,सुरेंद्र बिष्ट,सीमा सजवाण सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और युवा शामिल रहे।
