Thursday 25/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

ओडिसी नृत्य की अद्भुत छटा से मंत्रमुग्ध हुआ परिसर-एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रसिद्ध नृत्यांगना अभयालक्ष्मी की अनुपम प्रस्तुति


श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र में कला-संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला,जब स्पिक मैके के सहयोग से आयोजित विशेष प्रस्तुति में देश की प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना अभयालक्ष्मी ने अपने अद्भुत अभिनय,भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध गतियों से सभी को भावविभोर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ओडिसी कलाकार अभयालक्ष्मी ने अपने नृत्य के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय परंपरा की उस गहराई को दर्शाया,जिसे शब्दों में बांधना कठिन है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एम.ए.थिएटर के विद्यार्थियों के साथ विशेष संवाद भी किया,जिसमें नृत्य और अभिनय में नेत्राभिनय,मुद्रा,भाव-प्रकटीकरण और शरीर संचालन की बारीकियों पर विस्तृत जानकारी दी। अभयालक्ष्मी पद्मश्री गुरु अरुणा मोहंती की वरिष्ठ शिष्या हैं और 6 वर्ष की आयु से नृत्य की साधना कर रही हैं। भरतनाट्यम से शुरुआत कर आज वे ओडिसी नृत्य को देश-दुनिया के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने के मिशन में सक्रिय हैं। एक सफल नृत्यांगना होने के साथ वे एक प्रभावशाली शिक्षिका,कोरियोग्राफर और थिएटर कलाकार भी हैं। मंच पर अपनी कलात्मक उपस्थिति दर्ज कराते हुए अभयालक्ष्मी ने रामायण के धनुषभंग और महाभारत के चीर-हरण प्रसंगों को इतनी प्रभावी अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार क्षणभर के लिए पौराणिक काल में प्रवेश कर गया हो। उनकी भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को चरित्रों की मन:स्थिति से जोड़ दिया-आंखों की भाषा,हाथों की मुद्राएं और पैरों की लय सबने मिलकर प्रस्तुति को अविस्मरणीय बना दिया। आहे निला सैला की प्रस्तुति ने छुआ दिल,एक विशेष प्रस्तुति में अभयालक्ष्मी ने भगवान जगन्नाथ से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग और मुस्लिम कवि सालवेग के प्रसिद्ध भजन आहे निला सैला पर नृत्य किया। कवि की श्रद्धा,उनकी भावनाएं और मंदिर न जाने की विवशता ये सब भाव नृत्यांगना की अभिव्यक्ति में इतनी सहजता से उभरकर आए कि दर्शकों ने इसे प्रस्तुति की सबसे प्रभावशाली कड़ी बताया। कार्यक्रम में नृत्यांगना अभयालक्ष्मी का स्वागत डॉ.मारीसा पंवार ने अंगवस्त्र भेंट कर किया। यह आयोजन केंद्र में पहली बार स्पिक मैके के सहयोग से हुआ,जिसने विश्वविद्यालय में कला-संस्कृति के आयामों का विस्तार किया है। लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के निदेशक डॉ.गणेश खुगशाल गणी ने कहा स्पिक मैके के माध्यम से हमारे शिक्षार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों से सीखने व साक्षात्कार का अनमोल अवसर मिलेगा। हम भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों और कार्यशालाओं की श्रृंखला को और विस्तार देंगे। उन्होंने स्पिक मैके गढ़वाल संभाग के प्रभारी परवेज अहमद का भी विशेष धन्यवाद किया।

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