Thursday 25/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

महात्मा गांधी को नीचा दिखाने के लिए भगवान राम के नाम का प्रयोग अनुचित मनरेगा का नाम बदलना न देशहित में,न आस्था के अनुरूप–धीरेंद्र प्रताप


श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नीचा दिखाने के उद्देश्य से भगवान राम के नाम का प्रयोग किया जाना न केवल अनुचित है,बल्कि आस्था और मर्यादा दोनों के विरुद्ध है। उन्होंने मनरेगा योजना का नाम बदलकर भगवान राम के नाम पर किए जाने के प्रस्ताव की कड़े शब्दों में आलोचना की। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भगवान राम के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना चाहती है तो वह भगवान राम के नाम पर हजार नई योजनाएं शुरू कर सकती थी,लेकिन महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसी योजना को किसी अन्य नाम से जोड़ना एक सोची-समझी राजनीतिक मंशा को दर्शाता है। यह कदम किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी एक महामानव थे,जिन्होंने सत्य,अहिंसा और त्याग के बल पर देश को आजादी दिलाई,जबकि भगवान राम भारतीय संस्कृति और मर्यादा के प्रतीक हैं। इन दोनों की तुलना करना या एक के स्थान पर दूसरे का नाम रखना,भगवान राम की गरिमा को भी राजनीतिक विवादों में घसीटने जैसा है,जो सर्वथा अनुचित है। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि इस विषय पर भाजपा नेतृत्व को गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए और विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व को यह तय करना चाहिए कि क्या वे महात्मा गांधी को अपमानित करना चाहते हैं,या अनजाने में भगवान राम की महिमा को विवादों में डाल रहे हैं। दोनों ही स्थितियां देश और समाज के लिए घातक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यह प्रस्ताव संसद में पारित कर दिया गया हो,लेकिन संसद से भी बड़ी देश की जनता होती है। देश की आम जनता इस निर्णय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और व्यापक स्तर पर इसका विरोध हो रहा है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और मनरेगा योजना का नाम पुनः राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर ही यथावत रखा जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि भगवान राम को किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवाद से दूर रखा जाना चाहिए,क्योंकि वे करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। धीरेंद्र प्रताप ने अंत में कहा कि महात्मा गांधी और भगवान राम दोनों ही देश और समाज के लिए पूज्य हैं,लेकिन उनकी तुलना करना या एक को दूसरे के विरुद्ध खड़ा करना नैतिक रूप से अक्षम्य और सामाजिक सौहार्द के लिए घातक है।

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