दिल्ली वाला होने के नाते मेरा फ़र्ज़ है कि मैं आपको कुछ ऐसी बातें बताऊँ जो आपके काम की हों!एयरपोर्ट पर सावधानियां :

काशीपुर -दिल्ली मे तीन एयरपोर्ट हैं जिनका नाम एक ही है, इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट लेकिन इसके तीन अलग अलग टर्मिनल हैं, टर्मिनल 1, 2 और 3, जिसमे सिर्फ टर्मिनल 3 ही अंतर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों का संचालन करता है बाकी दो टर्मिनल डोमेस्टिक फ़लाइट्स के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं।
टर्मिनल 1 हो 2 हो या फिर 3 हो, तीनो ही टर्मिनल्स पर धोखाधड़ी चरम पर है, ये धोखाधड़ी टैक्सी वालों से शुरू होती है, वो भी तीनो अराइवल्स पर। जैसे ही आप किसी भी अराइवल गेट से बाहर निकलते हैं, आपके पास टैक्सीयों को दलाल दौड़े आते हैं, आपके कान मे बोलते हैं, कहाँ जाना है, ये एक पूरा नेक्सस है यानी एक गिरोह है जो प्राइवेट टैक्सी ओपेरेट करते हैं, और आपको सस्ते रेट का भी लालच देते हैं, इनसे आपको बचना है। हालांकि तीनो अराइवल गेट से बाहर निकलते ही आपको प्रीपेड टैक्सी के भी ऑप्शन मिलते हैं जिन्हे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस चलाती है लेकिन ये भी हेराफेरी मास्टर हैं, आपसे AC गाड़ी का चार्ज वसूल लेते हैं और आपको गाड़ी देते हैं नॉन AC, साथ ही इनके पास जो रेट चार्ट होता है, उसमे भी गड़बड़ रहती है और इनके पास ज्यादातर गाड़ियाँ भी मारुती इको या थकी हुई मारुती डिज़ायर ही मिलती हैं।
आपके पास सबसे अच्छा विकल्प है ओला, उबर या रेपिडो की टैक्सी जिसे आप ओला उबर या रेपिडो स्टैंड से ले सकते हैं लेकिन उसके लिए आपको थोड़ा पैदल चलना पड़ेगा। ओला उबर या रेपिडो ने टैक्सी अरेंजमेंट्स के लिए अपने अपने स्टाफ भी खड़े किये हुए हैं जो आपकी सहायता भी करते हैं लेकिन यहाँ भी एक पेच है, ये लोग भी आपको सिडान की जगह एक्सेल गाड़ी बुक करने का ज़ोर देते हैं। अगर आपका बजट ठीक ठाक है तो उबर की ब्लैक सबसे आरामदायक गाड़ी है बस उसका किराया थोड़ा ज्यादा है।किसी दलाल द्वारा गाड़ी लेने पर आपके लुटने के चांस रहते हैं क्युंकि एक तो ये लोग दादागिरी से अनाधिकृत काम करते हैं दूसरा, ये आपको इनके सैट होटल तक ले जाने की ज़िद पर अड़े रहते हैं जहाँ से इनको कमीशन तो मिलती ही है, साथ ही आपके आगे के जितने भी टूर आप उस होटल के द्वारा गाड़ी से करते हैं, उस पर भी इनकी कमीशन तय होती है। इसलिए बेहतर है कि आप अपना होटल खुद ऑनलाइन बुक करके दिल्ली आएं और ओला उबर या रेपिडो की टैक्सी से वहाँ तक चले जाएँ। आप सस्ते होटल के चक्कर मे पहाड़ गंज या इसके आसपास होटल ना ही बुक करें तो अच्छा है क्युंकि सबसे ज्यादा स्कैम इसी इलाके मे होता है। आपके पास होटलों का अच्छा विकल्प है सेंटर मे करोल बाग, पटेल नगर साऊथ मे पंचशील इंकलेव, ग्रेटर कैलाश, पूर्वी दिल्ली मे प्रीत विहार और नॉर्थ मे डेरावाल नगर।दिल्ली दर्शन की गाड़ी सामान्यतः दो हजार से ढाई हजार रूपये मे बुक हो जाती हैं और दिल्ली सरकार की बसें पांच सौ रूपये के लगभग लेती हैं, जिसमे आप आराम से AC मे बैठ के दिल्ली घूम सकते हैं, लेकिन अगर आप कैब या ऑटो से घूमना चाहते हैं और आपने अगर ड्रायवर के कहने से खाना के लिए गाड़ी रुकवाई या ड्राइवर के कहने से शॉपिंग कर ली तो समझ लीजिये आप लुट गए और ड्राइवर के वारे न्यारे आपने करा दिए इसलिए शॉपिंग के अच्छे ऑप्शन हैं जैसे कनॉट प्लेस या उसी मे जनपथ मार्किट, सरोजिनी नगर मार्किट, करोल बाग मार्किट, सेन्ट्रल मार्किट लाजपत नगर और साऊथ की फेमस मार्किट साऊथ एक्स। इन सभी मार्केट्स मे आपका ड्राइवर जाने से मना करेगा ही क्युंकि यहाँ से उसे खाली हाथ जो लौटना पड़ेगा। चांदनी चौक और पालिका बाजार की मार्किट आपके लिए नही है जब तक आपको शादी ब्याह की शॉपिंग ना करनी हो, यदि शादी ब्याह की शॉपिंग के इरादे से चांदनी चौक जाना ही पड़े तो बिना दलाल के, जिसमे रिक्शावला भी शामिल है, आप सीधा नई सड़क के अंदर गलियों मे चले जाएँ और ऐसी दुकान से सामान खरीदें जहां रेट फिक्स्ड हों।
दिल्ली के बाजारों मे राह चलते भी स्कैम होते हैं याद रखिये, कहीं दो लोग आपस मे ही सामान खरीद के उलझते मिलें और आपको वो सामान बहुत सस्ता लगे तो उस जगह से तुरंत निकल जाइये क्युंकि वो बेचने वाला और वो खरीदने वाला, दोनो ही मिले हुए होते हैं। राह चलते नकली चश्मे, नकली कैमरे, नकली मिक्सी, नकली घड़ियाँ, नकली फोन, आपको चारों तरफ बिकते दिखेंगे, आप होशियार रहिये, जो दिखेगा, वो मिलेगा नही। दिल्ली आइये, केवल घूमने के लिए, आपके अपने शहर मे शॉपिंग कीजिये जहाँ आपको इस बात की गारंटी भी मिले की ख़राब निकलने पर आपका सामान वापस भी हो जायेगा। आज कल हर छोटे बड़े शहरों मे सभी चीज़ें आसानी से मिल जाती हैं इसलिए सस्ते के चककर मे दिल्ली मे लुटने से अच्छा है, अपने शहर से शॉपिंग की जाये।
रेलवे स्टेशन पर सावधानियां:
सेम एयरपोर्ट की तरह यहाँ भी दलालों की भरमार रहती है, लेकिन यहाँ आपको जेबकत्रों और उठाईगिरों से भी सावधान रहना है, आपकी पलक झपकते ही सामान गायब करने का हुनर रखते हैं ये लोग। दिल्ली से बाहर जाना है और रेल की टिकट नही है तो बेशक जनरल डिब्बे मे चले जाना लेकिन टिकट दलाल के हाथों मे मत पड़ जाना, आपको कब किसकी टिकट पकड़ा दी जाएगी आपको पता भी नही चलेगा और हो सकता है उस ऑफलाइन टिकट को कैंसिल करा के उसका पैसा भी ले लिया गया हो।रेलवे स्टेशन पर ही होटलों के दलाल भी मिलते हैं लेकिन ना, आपको अपना होटल खुद ढूढना है, या पहले से ऑफलाइन बुक करके जाना है, ये काम आप टैक्सी ड्राइवर, ऑटो ड्राइवर या रिक्शा चालक को मत दीजिये। आप मेल हैं, अकेले हैं और समय नही बिता पा रहे तो किसी के बहकावे मे आकर, लड़कियों संग डांस करने, गुरुग्राम मत पहुँच जाना, पर्स तो खाली होगा ही ऊपर से क्रेडिट कार्ड का बोझ और लेकर आओगे अपने ऊपर, याद रखना, दिल्ली मे डांस क्लब जैसी कोई चीज़ नही है, गुरुग्राम के छोटे छोटे क्लबस मे भी स्टैग एंट्री नही है, फीमेल पार्टनर का जुगाड़ क्लब वाले ही कर देते हैं और फिर यहीं आपके साथ खेला हो जाता है। मसाज का भी शौक है तो वो घर पर करा के आना, दिल्ली गुरुग्राम मे फस गए तो कपड़े भी उतर जायेंगे।
दिल्ली मे देखने लायक बहुत कुछ है, लेकिन अय्याशी के लिहाज से दिल्ली मत आना। खुद आओ या परिवार को लाओ, अपने पर्स, मोबाईल, लैपटॉप और अन्य सामान को अपनी हिफाज़त मे रखो, खासकर मोबाईल और पर्स को हाथों मे दबोच के रखो, कहीं भी जाओ, सामान गाड़ी मे बिलकुल मत छोड़ के जाओ, बेशक वो टैक्सी हो, ऑटो हो या रिक्शा हो। किसी अनजान का दिया प्रसाद, मिठाई आदि यानी फ्री की कोई चीज़ कभी मत खाओ। दिल्ली के ड्राइवरों से भी कड़क भाषा या अभद्र भाषा मे बात ना करो, बात उतनी ही करो, जितनी ज़रूरी हो। अपने आगे के प्लान्स किसी से डिस्कस मत करो, दिल्ली आना है तो सतर्क रहो, सुरक्षित रहो।
दिल्ली मे घूमने की जगहें : बिरला मंदिर, अक्षरधाम मंदिर, लोटस टेम्पल, गौरी शंकर मंदिर चांदनी चौक , माँ कात्यानी छतरपुर मंदिर, बड़ी दादा बाड़ी मेहरोली , लाल जैन मंदिर चांदनी चौक, कुतुब मीनार, लाल किला, हुमायूं टूम्ब, इंडिया गेट, विजय चौक, इंदिरा गाँधी म्युज़ियम, गाँधी म्युज़ियम, राजघाट, साइंस म्युज़ियम, रेल म्युज़ियम, नेशनल म्युज़ियम, प्रधानमंत्री म्युज़ियम
दिल्ली साइटसिंग बस की सुविधा बाबा खड़क सिंह मार्ग से सुबह 9 बजे। दिल्ली आगरा सेम डे टूर की गाड़ी किसी भी होटल या रोड साइड दुकान से कभी मत बुक करना, सुबह 6 बजे की चली बस, रात को दो बजे वापस लाएगी और उस पर भी आपके खाने और घुमाने को लेकर, कई झगडे होंगे, क्युंकि खाने के ढाबों से लेकर, वृन्दावन और मथुरा के मंदिरों तक मे, इनका एजेंट साथ चलेगा और जबरदस्ती, दान के नाम पर आपकी जेब हलकी कराता जायेगा। ताज महल देखने का सपना आपका अधूरा ही रह जायेगा क्युंकि वहाँ से अपनी जेब भरने के बाद, ये आपको, अपने हाल पे छोड़ देंगे।
