Sunday 29/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
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पुरानी पेंशन बहाली को लेकर तेज हुई आवाज-राज्यपाल से मिले मोर्चा के प्रतिनिधि,कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा का आधार है पुरानी पेंशन


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड में संघर्ष अब निर्णायक दौर की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के प्रदेश मुख्य संयोजक जयदीप रावत एवं प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से शिष्टाचार भेंट कर पुरानी पेंशन योजना बहाली के संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा ज्ञापन सौंपा। इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुरानी पेंशन योजना केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं,बल्कि कर्मचारियों के बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा,आत्मसम्मान और स्थायित्व की गारंटी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पेंशन प्रणाली की अनिश्चितताओं के कारण लाखों कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है,जिससे उनमें गहरी चिंता और असंतोष व्याप्त है। महामहिम राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था को कर्मचारियों के हित में एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बताते हुए आश्वस्त किया कि इस विषय पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा। राज्यपाल के इस सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए प्रतिनिधिमंडल ने उनका हार्दिक धन्यवाद और आभार प्रकट किया। वार्ता के दौरान जिलाधिकारी गढ़वाल स्वाति एस.भदौरिया ने भी वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली एवं एकीकृत पेंशन योजना की व्यावहारिक चुनौतियों और कमियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्मचारियों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने मोर्चा द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों और संघर्ष की सराहना की जिसे कर्मचारियों की आवाज को मजबूती देने वाला बताया गया। इस अवसर पर मोर्चा के जनपद अध्यक्ष भवान सिंह नेगी तथा दीपक नेगी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने एक स्वर में कहा कि जब तक पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं होती,तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा। यह मुलाकात उत्तराखंड में पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है,जिसने कर्मचारियों की उम्मीदों को नया बल दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और नीति निर्धारण में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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