आस्था,परंपरा और संस्कृति का महाकुंभ-खानसौड़ में 18 अप्रैल से सजेगा नागेन्द्र देवता थल्लू मेला

रुद्रप्रयाग/जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल की पावन धरती पर लोक आस्था,सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का अद्भुत संगम एक बार फिर जीवंत होने जा रहा है। जहां देव परंपराएं केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी भी हैं-ऐसे ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच जखोली क्षेत्र के खानसौड़ में भगवान नागेन्द्र देवता का भव्य थल्लू मेला आगामी 18 अप्रैल से आरंभ होगा। नागेन्द्र देवता मेला एवं पर्यटन विकास समिति पट्टी लस्या के तत्वावधान में आयोजित यह पांच दिवसीय मेला 18 से 22 अप्रैल तक पूरे क्षेत्र में उत्सव का वातावरण बनाए रखेगा। मेला समिति के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह मेवाड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि 28 ग्राम पंचायतों के आराध्य देवता भगवान नागेन्द्र देवता का यह ऐतिहासिक मेला हर वर्ष की भांति इस बार भी श्रद्धा और भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है। इस बार मेले को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। पंचों की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि नागेन्द्र देवता के साथ जगदी माता,शिव शक्ति,नागराजा की छड़ी तथा घण्डियाल देवता की डोली को भी नृत्य स्थली खानसौड़ में आमंत्रित किया जाएगा। देव डोलियों के आगमन और पारंपरिक नृत्य के साथ पूरा क्षेत्र भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण में सराबोर हो उठेगा। मेले के दौरान स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रमुख आकर्षण रहेंगे। लोकगीत,लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को मंच प्रदान करेंगी और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेंगी। मेला समिति के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह मेवाड़ ने बताया कि मेले को भव्य स्वरूप देने के लिए क्षेत्रीय विधायक एवं ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी का सहयोग लिया जाएगा। उनके सहयोग से विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए जाएंगे,जहां ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इस प्रकार मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं,बल्कि जन-जागरूकता और विकास का भी माध्यम बनेगा। मेले के विभिन्न दिनों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा,जिससे क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद स्थापित हो सके। समिति ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में मेले में भाग लें और इसके प्रचार-प्रसार में सहयोग कर इस परंपरा को और मजबूत बनाएं। खानसौड़ का नागेन्द्र देवता थल्लू मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि गढ़वाल की जीवंत संस्कृति,लोक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है,जो हर वर्ष नई ऊर्जा और उत्साह के साथ समाज को जोड़ने का कार्य करता है।
