Tuesday 22/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
जिला विधिक सेवा प्राधिकारण उद्यम सिंह नगर माननीय सचिव ममता पंत, के आदेशानुसार आदेश संख्या-56/2026-27 के तत्वावधान पर, एक संयुक्त कैंप का आयोजन रामस्वरूप भगत उच्चतर मध्यमिक विद्यालय मुडे़ली प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में किया गया मंच का संचालन पैरालीगल वॉलीन्टर गीता शर्मा द्वारा छात्र-छात्राओं को विधिक नीशुल्क सुविधाओं की जानकारी दी गई और विमला मुडे़ली के, द्वारा,छात्र-छात्राओं को अन्य जानकारीयो से जागरूक किया गया विषय- नालसा और सालसा, की वीभिन्न योजनाओं और अपराधों के लिए, न्यूनातम मुआवजा राशि के प्रावधान हैं जैसे,एसिड अटैक, मानव तस्कारी,समूहिक बलात्कार, मानव तस्कारी, नाबालिक बच्चों का यौन उत्पीड़न, घरेलु हिंसा साइबर क्राइम, सड़क सुरक्षा के नियमों और हेल्पलाइन नंबर 112 की जानकारी दी गई और साथ ही बताया सिविल कोर्ट खटीमा में हर 3 महीने बाद राष्ट्रीय लोक अदालत, का आयोजन किया जाता हैं, जिला विधिक सेवा प्राधिकारण उधम सिंह नगर में स्थाई लोक अदालत है जो राविवर सेकंड सैटरडे को बंद रहती है ,इसे परमानेट लोक अदालत मैं अन्य केसों का निसतारण कर फैसला करा दिया जाता हैं,, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर – 1098 छात्र छात्राओं को बताकर विधिक नीशुल्क सुविधाओं ग्रामीण विधिक सेवा सहायता केंद्रों की जानकारी देकर नालसा टोल न०-15100 इतयादि की विधिक, सुविधाओं की जानकारी से छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया पैरालीगल बाॅलियंटर, की उपस्थिति संख्या-टीम नंबर -36 से गीता शर्मा टीम नंबर- 41 से विमला मुडेला , माया देवी, ठगो देवी प्रभु दयाल, विधिक शिविर कैंप में उपस्थित रहे ।सितारगंज रामलीला कमेटी के पदाधिकारीयों ने उठाया ध्वज पताका पूरे विधि विधान से किया गया पूजन🔶 नगर पालिका निर्वाचन (किच्छा एवं सिरौलीकलां) को लेकर एसएसपी अजय गणपति ने किया स्ट्रांग रूम का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा।उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने आज सितारगंज स्वास्थ्य केंद्र में साप्ताहिक हड़ताल के तहत धरना किया और आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने सहित कई मांगों उठाई इस दौरान यूनियन की जिला उपसचिव अनिता अन्ना ने कहा कि भाजपा सरकार आशाओं के श्रम का लगातार शोषण कर रही है. उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशाओं को न तो राज्य कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है और ना ही सरकार द्वारा लागू न्यूनतम वेतन मिलता है। जो कि बिल्कुल अनुचित और अन्यायपूर्ण है। लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि आशाओं को स्वास्थ्य विभाग व बाहरी विभाग के भी कई कमीशन आधारित काम सौंप दिए जाते हैं। उस पर भी जब एकमुश्त राशि बनती है तो कई जगह विभाग के अधिकारी कमीशन मांग लेते हैं उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन एक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ऐक्टू के नेतृत्व में 22 नवंबर को देहरादून कूच करेंगे और अपने हक अधिकार की मांग को बुलंद करेंगे। प्रदेश की हजारों आशा वर्कर्स इस आंदोलन में भाग लेंगी ब्लॉक महामंत्री शर्मिन सिद्दकी ने कहा कि हमारी मांग है कि 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए वायदे को पूरा सरकार पूरा करे, आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दे, न्यूतम वेतन लागू करे, सेवानिवृत्ति के बाद अनिवार्य पेंशन लागू करे, आशाओं के श्रम की राशि का भुगतान हर माह करे, ट्रेनिंग व पल्स पोलियो अभियान की राशि 500 रुपए प्रतिदिन करे, आशाओं के साथ विभागीय अधिकारियों का सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की गारंटी हो, हर अस्पताल में आशा घर का निर्माण करने व अस्पतालों में डॉक्टर व स्टाफ की कमी को दूर किया जाए, मनमाने तरीके से आशाओं की छटनी रोकने की है धरने में जिला उप सचिव अनीता अन्ना, ब्लॉक महामंत्री शर्मिन सिद्दकी, भावना बिष्ट, यशोदा देवी मोहनी, इंद्रावती, हेमंती नेगी, खुशनुमा , पूनम शर्मा, अनीता बोरा, ममता शर्मा, संगीता, प्रेमा देवी, फूलादेवी, मंजीत कौर, रहीमा, शबनम, कुलदीप कौर, मीना देवी,अंगूरी देवी, सफ़ीना, भागीरथी, रबीना, देवी, मोबिना, कंचन गुप्ता, पुष्पा देवी, मंजीत, निर्वेश कुमारी,मीना,विजेता देवी, सीता देवी, दुर्गा देवी, सबीना, रीना देवी, लीलावती, कमला देवी, सरोजनी, ज्योति, सच्ची, सरिता, मीना देवी, विमला कौर, विजयवती, निर्मला देवी, व अन्य आशाएं शामिल थी।राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण समिति की बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई सम्पन्नआज मजदूर सत्याग्रह का सातवां (7)दिन है ऐरा श्रमिक संगठन के महिला मजदूरों और बच्चों सहित सत्याग्रह पर कम्पनी गेट पर उपस्थित है कंपनी प्रबंधन 16 तारीख से हमें कंपनी गेट से हटाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं लेकिन वह किसी भी तरह सफल नहीं हो पा रहे हैं इस प्रयास में कंपनी प्रबंध के आज रुद्रपुर सिविल कोर्ट में प्रस्तुत हुए और सिविल कोर्ट द्वारा अगली डेट 15 अक्टूबर को दे दी गई16 सितंबर को अपेक्स बिल्डर लिमिटेड कम्पनी में हुई वार्ता को लेकर AlC महोदय जी द्वारा दिया गया आश्वासन की 28 सितम्बर को जिला प्रशासन में वार्ता होगी लेकिन आज तक कोई भी सूचना लिखित में नहीं दिया गया इसको लेकर आज ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूर ALC महोदय रुद्रपुर से मिलने गये लिकिन ALC महोदय किच्छा होने की सूचना दी गई 17 सितंबर से लगातार ALC महोदय रुद्रपुर से मिलने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मिलना मुश्किल हो रहा हैयह कि जिला प्रशासन को यह भलीभांति विदित है की एन सी एल टी की दिल्ली शाखा के निर्देशन में अपेक्स बिल्डसिस लिमिटेड, सेक्टर -09,सिडकुल पंतनगर की नीलामी प्रक्रिया सम्पन्न हुई। जिसके तहत कम्पनी के स्वामित्व और प्रबंधन को समस्त श्रमिकों और कर्मचारियों सहित जसमृत डिजाइनर को हस्तगत किया गया।जिससे पूर्ण सहमति ब्यक्त करते हुए जसमृत डिजाइनर के स्वामी द्वारा एन सी एल के समक्ष लिखित हलफनामा / शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए उक्त नीलामी प्रक्रिया में वर्णित सभी शर्तों को स्वीकार करने की प्रतिबद्धता ब्यक्त करते हुए उक्त कारखाने के स्वामित्व और प्रबंधन को ग्रहण किया।किन्तु श्रमिकों की आज तक कार्यबहाली नहीं की गईं है। जिसके पश्चात् प्रार्थी यूनियन द्वारा एन सी एल टी की उच्च शाखा एन सी एल ए टी में रिट / याचिका दायर की। जिस पर एन सी एल ए टी द्वारा स्पष्ट आदेश दिया गया कि एन सी एल ए टी के तहत हुई नीलामी प्रक्रिया में वर्णित सभी शर्ते सभी पक्षों पर बाध्यकारी होंगे। इसके पश्चात् भी कम्पनी प्रबंधन द्वारा कारखाने के 102 स्थाई श्रमिकों की आज तिथि तक भी कार्यबहाली नहीं की गईं है। जो कि उक्त नीलामी प्रक्रिया में वर्णित शर्तों, उक्त के क्रम में एन सी एल टी की डबल बैंच यानि एन सी एल ए टी के उक्त आदेशों का और उक्त के क्रम में नये मालिक द्वारा एन सी एल टी के समक्ष प्रस्तुत अपने ही उक्त हलफनामे /शपथपत्र का घोर उल्लंघन है। घोर छल कपट है।जिससे उक्त 102 श्रमिकों और उनके परिवारों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।शिक्षक भविष्य निर्माता होता है – डॉ स्वामी चंद्रामसूरी शरदोत्सव का न्योता लेकर सीएम धामी से मिले गणेश जोशी और मीरा सकलानीलंबे अंतराल बाद लौट रहा मसूरी का ऐतिहासिक शरदोत्सव, मुख्यमंत्री नेहै आयोजन में पहुंचने का दिया भरोसा पहाड़ों की रानी मसूरी में लंबे समय बाद होने जा रहे ऐतिहासिक शरदोत्सव 2026 को लेकर शहर में उत्साह बढ़ने लगा है। शरदोत्सव को भव्य रूप देने की तैयारियों के बीच कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और नगर पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें शरदोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए आयोजन में पहुंचने का भरोसा दिया। शरदोत्सव को मसूरी की पुरानी सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। लंबे समय से बंद पड़े इस आयोजन की दोबारा शुरुआत से स्थानीय कलाकारों, युवाओं, व्यापारियों और नागरिकों में उत्साह है। आयोजन के माध्यम से मसूरी की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय कला और प्रतिभाओं को मंच देने की तैयारी की जा रही है।मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा मसूरी मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने मसूरी क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और विकास कार्यों से भी उन्हें अवगत कराया। उन्होंने सड़क, पेयजल, पर्यटन विकास, रोजगार और युवाओं से जुड़े विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। हालांकि मुलाकात का प्रमुख केंद्र शरदोत्सव रहा और मुख्यमंत्री को आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। शरदोत्सव के आयोजन को लेकर शहर में विभिन्न समितियों के गठन और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ स्थानीय कलाकारों और अन्य प्रतिभाओं को अवसर देने की तैयारी है। इससे मसूरी के पर्यटन सीजन में भी नई गतिविधियां जुड़ने की उम्मीद है। मुलाकात में सभासद कुशाल सिंह राणा, जसबीर कौर, प्रदेश संस्कृति प्रकोष्ठ संयोजक राजेंद्र रावत, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन समेत अन्य लोग मौजूद रहे।मसूरी में रेलवे की जमीन पर कब्जे को लेकर मसूरी झड़ीपानी में कार्रवाई, 31 मकानों पर नोटिस चस्पा संपदा अधिकारी के बेदखली आदेश के बाद उत्तर रेलवे की टीम पहुंची, भारी पुलिस बल रहा तैनात झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर उत्तर रेलवे ने कार्रवाई तेज कर दी है। संपदा अधिकारी की अदालत से बेदखली आदेश जारी होने के बाद सोमवार को उत्तर रेलवे के अधिकारियों की टीम भारी पुलिस बल के साथ झड़ीपानी पहुंची। टीम ने रेलवे की भूमि पर बने 31 मकानों पर नोटिस चस्पा किए। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी तरह के विरोध की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।उत्तर रेलवे की ओर से जारी संपदा अधिकारी के आदेश के अनुसार झड़ीपानी स्थित ओक ग्रोव स्कूल के समीप रेलवे की करीब 100 वर्ग मीटर भूमि पर जगमोहन उर्फ सांझ कैफे पुत्र दर्शन लाल द्वारा अनधिकृत कब्जा किए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी।रेलवे अधिकारियों के अनुसार संपदा अधिकारी की अदालत ने पूरे मामले में रेलवे की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और पक्ष को देखने के बाद कब्जे को अनधिकृत माना है। आदेश में प्रतिवादी को 15 दिन के भीतर रेलवे की भूमि से कब्जा हटाकर रेलवे को भूमि सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में रेलवे प्रशासन को नियमानुसार बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करने तथा कार्रवाई में आने वाला खर्च वसूल करने का अधिकार भी दिया गया है।रेलवे ने तीन पुराने विक्रय अभिलेखों का दिया हवालारेलवे की ओर से संपदा अधिकारी की अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि संबंधित भूमि रेलवे की है और इसके समर्थन में रेलवे के पास पुराने विक्रय अभिलेख मौजूद हैं। रेलवे ने अपने जवाब में 21 अप्रैल 1886, 28 दिसंबर 1895 तथा वर्ष 1920-21 के अभिलेखों का हवाला देते हुए भूमि पर रेलवे का अधिकार बताया है। रेलवे का कहना है कि इन दस्तावेजों से संबंधित प्रतियां भी वाद पत्रावली में प्रस्तुत की गई हैं।रेलवे अधिकारियों ने प्रतिवादी के उस दावे को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें भूमि को निजी संपत्ति बताया गया था। रेलवे के अनुसार प्रतिवादी की ओर से भूमि के स्वामित्व को प्रमाणित करने वाला ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे संबंधित 100 वर्ग मीटर भूमि पर उसका मालिकाना हक साबित हो सके।हाई कोर्ट के आदेश का भी दिया हवालामामले में प्रतिवादी की ओर से वर्ष 1940 के सीमांकन, राजस्व विभाग की रिपोर्ट और उत्तराखंड हाई कोर्ट में दाखिल रिट याचिकाओं का हवाला दिया गया था। प्रतिवादी ने दावा किया था कि राजस्व विभाग की सीमांकन कार्रवाई में संबंधित भूमि रेलवे की नहीं पाई गई। वहीं रेलवे ने संपदा अधिकारी की कार्यवाही में कहा कि हाई कोर्ट ने पूर्व में रेलवे की नोटिस संबंधी कार्यवाही को प्रक्रिया संबंधी आधार पर निरस्त किया था, लेकिन रेलवे को कानून के अनुसार कार्रवाई करने से नहीं रोका गया था। इसी आधार पर रेलवे ने संपदा अधिकारी के समक्ष नए सिरे से कार्रवाई की।पुलिस बल की मौजूदगी में चस्पा हुए नोटिससोमवार को उत्तर रेलवे के अधिकारियों और रेलवे पुलिस की टीम झड़ीपानी पहुंची। कार्रवाई को देखते हुए मसूरी पुलिस की ओर से भी भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। मसूरी कोतवाल नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाली।आषु षर्मा सिनियर सेक्षन इंजीनियर रेलवे देहरादून ने बताया कि नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई संपदा अधिकारी के आदेश के अनुपालन में की गई है। अधिकारियों के मुताबिक आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।इस कार्रवाई के बाद झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे और स्थानीय लोगों के बीच जमीन के स्वामित्व और सीमांकन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वही स्थानीय लोगों ने कहा वह कई दशकों से यहां पर रह रह है और उनके द्वारा भूमि को खरीद कर मकान बनाया है वह नगर पालिका परिषद में भी दाखिल खारिज हो रखा हे ऐसे में रेलवे के अधिकारी आये दिन रेलवे की संपत्ति बताकर उनके मकानों में नोटिस लगा रहे है जिससे उनका मानसिक उत्पीड़न भी हा रहा है उन्होंने कहा कि उनके द्वारा रेलवे बोर्ड से उनकी सम्पति के कागजात दिखाने को कहा गया वह रेलवे के अधिकारी कागज नहीं दिखा रहे है। उन्होंने कहा वह सक्षम न्यायालय में पूरे मामले को लेकर जायेगे। इस मौके पर मसूरी कोतवाल नरेन्द्र सिंह, एसएसआई सतेन्द्र भाटी सहित भारी पुलिस फोर्स मौजूद था।प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर करनपुर में जलाए हजारों दीप, हलवा प्रसाद का हुआ वितरण
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जान हथेली पर रख केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने आग से बचाया जंगल और विश्वविद्यालय परिसर


देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। जहां एक ओर जंगलों में धधकती आग पर्यावरण,वन्यजीवन और मानव बस्तियों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है,वहीं दूसरी ओर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग के प्राध्यापकों ने साहस,समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को भावुक और गौरवान्वित कर दिया। करीब 50 हेक्टेयर जंगल में फैली भीषण आग को बुझाने के लिए विश्वविद्यालय के प्राध्यापक अपनी जान जोखिम में डालकर रातभर दावानल से जूझते रहे। खड़ी पहाड़ियों,चीड़ की सूखी पत्तियों,घने धुएं,अंधेरे और संसाधनों की भारी कमी के बावजूद शिक्षकों की टीम ने अदम्य साहस दिखाते हुए न केवल आग पर काबू पाया,बल्कि विश्वविद्यालय परिसर को भी एक बड़ी तबाही से बचा लिया। घटना शुक्रवार शाम की है,जब अलकनंदा नदी के बाएं किनारे स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में अचानक अफरातफरी मच गई। पौड़ी के सबदरखाल क्षेत्र की ओर से जंगल में लगी आग तेजी से फैलते हुए विश्वविद्यालय परिसर की दिशा में बढ़ने लगी। चीड़ के जंगलों से उठती आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार पूरे क्षेत्र को भयावह बना रहा था। वातावरण इतना धुएं से भर गया कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिसर प्रशासन ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने पर दो वनकर्मी मौके पर पहुंचे,लेकिन नृसिंहाचल क्षेत्र की खड़ी चढ़ाई और रास्ते की कठिन परिस्थितियों के कारण आग तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। ऐसे संकटपूर्ण समय में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रोफेसर पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने बिना देर किए परिसर और बालगुरुकुल के प्राध्यापकों की एक टीम गठित की और खुद नेतृत्व करते हुए जंगल की ओर रवाना हो गए। लगभग 12 फीट ऊंची परिसर की बाउंड्रीवाल पार कर टीम खतरनाक पहाड़ी रास्तों से होते हुए करीब डेढ़ घंटे बाद घटनास्थल तक पहुंची। वहां का दृश्य अत्यंत भयावह था। चीड़ की सूखी पत्तियां,घास और तेज हवा आग को और भड़का रही थी। जंगल में जगह-जगह आग धधक रही थी और आसपास के वन्यजीवों पर संकट मंडरा रहा था। वन विभाग के कर्मचारी नरोत्तम प्रसाद और मुकेश नेगी ने मोर्चा संभालते हुए टीम को दिशा-निर्देश दिए,जिसके बाद सभी लोग एकजुट होकर आग बुझाने में जुट गए। तीखी ढलानों,फिसलन और धुएं के बीच आग पर नियंत्रण पाना आसान नहीं था। कई बार टीम के सदस्य फिसले,कांटे चुभे और चोटिल भी हुए,लेकिन किसी ने हिम्मत नहीं हारी। अंधेरा बढ़ने के साथ हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए,फिर भी पूरी टीम लगातार आग बुझाने में जुटी रही। लगभग डेढ़ घंटे की कठिन मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली। इस दौरान टीम को जंगल में कई पक्षी जले और अधजली अवस्था में मिले,जिसने सभी को भीतर तक झकझोर दिया। लगभग 50 हेक्टेयर जंगल को आग की चपेट से बचाने और विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षित रखने के बाद टीम ने राहत की सांस ली। हालांकि आग बुझाने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। अंधेरे,पानी की कमी और प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण अध्यापकों की टीम जंगल में रास्ता भटक गई। स्थिति इतनी कठिन हो गई कि एक कदम चलना भी मुश्किल हो रहा था। टीम ने खेड़ा गांव की ओर शरण लेने का प्रयास किया,लेकिन घने जंगल और अंधेरे के कारण रास्ता भटक गए। काफी संघर्ष और कठिनाइयों के बाद रात लगभग 10 बजे टीम किसी तरह सुरक्षित विश्वविद्यालय परिसर पहुंच पाई। इस साहसिक अभियान में डॉ.वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल,डॉ.सुरेश शर्मा,डॉ.सुखदेव सिंह,डॉ.प्रदीप कुमार,डॉ.सूर्यकांत चौबे,करुण कुमार,दिगंबर रतूड़ी,सुनील गोदियाल और संपदा अधिकारी उमाकांत भट्ट सहित कई लोग शामिल रहे।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भी विश्वविद्यालय परिसर के तीनों ओर भीषण आग लग चुकी थी,जिसमें परिसर को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस दौरान विद्युत केबल सहित कई व्यवस्थाएं आग की भेंट चढ़ गई थीं और परिसर को लगभग 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। निदेशक प्रोफेसर पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि बिना संसाधनों के विकट परिस्थितियों में टीम ने जिस साहस और समर्पण के साथ यह कार्य किया,वह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यह केवल आग बुझाने का कार्य नहीं था,बल्कि परिसर और प्रकृति के प्रति शिक्षकों की गहरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचायक है। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए जंगल से लगती परिसर की सीमा पर लगभग 18 फीट चौड़ा सीमेंट मार्ग बनाया जाएगा,जिससे आग को परिसर तक पहुंचने से रोका जा सके। साथ ही प्रकृति के अनुकूल दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे। कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी ने भी इस साहसिक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि प्रोफेसर सुब्रह्मण्यम के नेतृत्व में प्राध्यापकों की टीम ने असाधारण साहस का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि यह टीम विश्वविद्यालय परिवार ही नहीं,बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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