देहरादून में सामाजिक सरोकारों पर मंथन-युवाओं,नशा,भ्रष्टाचार और जन-जागरण को लेकर बनीं नई रणनीति

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। देश में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन,जनलोकपाल की मांग और जनभागीदारी आधारित सामाजिक अभियानों से नई चेतना जगाने वाले पद्म भूषण अन्ना हजारे के विचारों से प्रेरित संगठन एक बार फिर सक्रिय मोड में दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय लोक आंदोलन न्यास (टीम अन्ना हजारे) की महत्वपूर्ण बैठक ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में सामाजिक सरोकारों,युवाओं के मुद्दों,नशा मुक्ति,पारदर्शिता और जनहित से जुड़े विषयों पर देशव्यापी स्तर पर फिर से संगठित जनआंदोलन खड़ा करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। बैठक में महाराष्ट्र से अन्ना हजारे द्वारा भेजी गई टीम के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सहभागिता करते हुए संगठन विस्तार,सामाजिक एकजुटता और जनहित आधारित संघर्षों को नई दिशा देने पर गंभीर मंथन किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोक आंदोलन की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना इनामदार,राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रभारी भोपाल सिंह चौधरी तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी कमल टावरी (भाई कमलानंद महाराज) ने समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करते हुए सामाजिक चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया। देहरादून में आयोजित यह बैठक केवल संगठनात्मक चर्चा तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसे सामाजिक पुनर्जागरण की नई पहल के रूप में देखा गया। उत्तराखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों,युवाओं,जनप्रतिनिधियों,समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना इनामदार ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और समाजहित के लिए समर्पित भाव से कार्य करे। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे का जीवन संघर्ष,सादगी,पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों की जीवंत मिसाल है। उन्होंने अन्ना हजारे के पांच मूल सिद्धांत-शुद्ध आचार,शुद्ध विचार, निष्कलंक जीवन,त्याग की भावना और अपमान से विचलित न होना को सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला बताते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन की असली ताकत उसके कार्यकर्ताओं के चरित्र और ईमानदारी में निहित होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक आंदोलन किसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं है,बल्कि यह समाजहित के प्रश्नों पर जनशक्ति को संगठित करने का प्रयास है। उत्तराखंड में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी भोपाल सिंह चौधरी को सौंपे जाने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के सामाजिक संगठनों और सक्रिय नागरिक समूहों को एक मंच पर जोड़कर जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रभारी भोपाल सिंह चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ती नशाखोरी,भ्रष्टाचार,बेरोजगारी,सामाजिक असमानता और जनसमस्याओं के समाधान के लिए समाज को संगठित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मंचों पर बंटी सामाजिक आवाज़ों को एकजुट कर मजबूत जनमंच तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। बैठक में पूर्व अपर सचिव जीवन जोशी ने लोकपाल,लोकायुक्त,प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब शासन व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेह बनेगी और समाज सक्रिय भागीदारी निभाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि अन्ना आंदोलन ने पूरे देश में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू की थी,जिसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी कमल टावरी (भाई कमलानंद महाराज) ने युवाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सामाजिक परिवर्तन बिना युवा शक्ति के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जाए तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने संगठन को गांव-गांव तक ले जाने और जनहित आधारित सामाजिक ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। बैठक में राष्ट्रीय लोक आंदोलन के कुमाऊं मंडल अध्यक्ष पीयूष जोशी ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को गंभीर सामाजिक संकट बताते हुए कहा कि उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में युवा वर्ग दिशाहीनता का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते युवाओं को शिक्षा,रोजगार और सामाजिक चेतना से नहीं जोड़ा गया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को दबाव और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है,इसलिए समाज को ऐसे लोगों के समर्थन में मजबूती से खड़ा होना चाहिए। देहरादून जिला अध्यक्ष जसपाल चौहान ने राजधानी क्षेत्र में बढ़ते नशे और युवाओं पर उसके दुष्प्रभाव को चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती भी है। उन्होंने समाज,प्रशासन और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया। बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में राष्ट्रीय लोक आंदोलन केवल भ्रष्टाचार विरोध तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि शिक्षा,युवाओं का भविष्य,पर्यावरण,सामाजिक न्याय,नशा मुक्ति और जनहित से जुड़े व्यापक मुद्दों पर समाज को संगठित करने का कार्य करेगा। कार्यक्रम में डॉ.अरविंद धर्मोज,गीता चौधरी,डॉ.मुकुल,डॉ.सर्वेश कुमार गोद,पी.सी.थपलियाल,मोहन सिंह रावत,सुशील चमोली,सुरेश कुमार,स्वप्निल सिंह,डॉ.सुयश मिश्रा,नेहा चौहान,अनिल कुमार,मनीष कुमार,पूजा चमोली,संजय एचएम,प्रियंका,सुमित कुमार, गिरीश ढोलकोटी,निशांत सिंह,भोपाल सैनी,फरमान राजपूत,मुनव्वर राणा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।
