परम पूजनीयश्री श्री 1008 आदियोगी पुरी जी महाराज जीके दिव्य आशीर्वाद,“भारत विश्व गुरु बने” तथा“One World • One Mission • One Humanity”के पावन सिद्धांत से प्रेरित होकर,

काशीपुर – डॉ दीपक ढल ने
देवभूमि हिमाचल प्रदेश की पुण्य धरा को साक्षी मानकर यह पवित्र संकल्प लिया कि अपना जीवन मानव सेवा, धर्मनीति, राष्ट्र निर्माण और समाज सुधार हेतु समर्पित करूँगा।दीपक ढल ने कहा कि मैं यह प्रण करता हूँ कि हिमाचल प्रदेश में केवल सत्ता और राजनीति की नहीं, बल्कि धर्मनीति, जननीति और मानवनीति की स्थापना हेतु कार्य करूँगा —
जहाँ सेवा राजनीति से ऊपर हो,
चरित्र पद से ऊपर हो,
और राष्ट्रहित व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर हो।देवभूमि हिमाचल, जो ऋषियों, सिद्धों, देवताओं और तपस्वियों की भूमि रही है, आज अनेक सामाजिक विकृतियों और चुनौतियों से जूझ रही है।
मैं संकल्प लेता हूँ कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर निम्न कुरीतियों और समस्याओं के विरुद्ध जनजागरण एवं सुधार अभियान चलाऊँगा —
◉ नशाखोरी, शराब और ड्रग्स माफिया◉ युवाओं में बढ़ता अवसाद, आत्महत्या और दिशाहीनता◉ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद एवं प्रशासनिक शोषण◉ गौ हत्या, पशु क्रूरता एवं सनातन मूल्यों का अपमान◉ जंगलों, पहाड़ों और नदियों का विनाश
◉ अवैध खनन एवं पर्यावरण दोहन◉ महिलाओं, बेटियों और बुजुर्गों के प्रति असुरक्षा एवं असम्मान◉ बेरोज़गारी और युवाओं का पलायन
◉ पर्यटन के नाम पर फैलती अश्लीलता एवं नशा संस्कृति
◉ हिमाचली संस्कृति, लोक भाषा और परंपराओं का क्षरण
◉ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी◉ जातिवाद, सामाजिक विभाजन और आपसी वैमनस्य◉ धन और लालच के कारण मानवता का पतन
मैं यह भी संकल्प लेता हूँ कि —◆ हिमाचल को नशामुक्त बनाने हेतु जनआंदोलन चलाऊँगा।◆ गौ सेवा, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनधर्म बनाऊँगा।
◆ युवाओं को अध्यात्म, राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण से जोड़ूँगा।◆ मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और मानव सेवा के क्षेत्र में निःस्वार्थ कार्य करूँगा।
◆ गाँव, गरीब, किसान, सैनिक, बुजुर्ग और मातृशक्ति के सम्मान हेतु कार्य करूँगा।
◆ धर्म को जोड़ने का माध्यम बनाऊँगा, तोड़ने का नहीं।
मेरा उद्देश्य किसी दल, पद या सत्ता की प्राप्ति नहीं,
बल्कि देवभूमि हिमाचल और भारत माता की सेवा है।
मैं विश्वास करता हूँ कि —
“जब समाज धर्म से जुड़ता है,
तब राष्ट्र शक्तिशाली बनता है।
जब युवा संस्कारों से जुड़ते हैं,
तब भविष्य सुरक्षित होता है।
और जब सेवा साधना बन जाती है,तब ईश्वर स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं।”हे प्रभु,
मुझे इतना सामर्थ्य देना कि मैं
पीड़ित का सहारा बन सकूँ,
भटके हुए को मार्ग दिखा सकूँ,
और देवभूमि हिमाचल को पुनः
शांति, संस्कृति, अध्यात्म और मानवता की भूमि बना सकूँ।
न राजनीति…
अब धर्मनीति।
न स्वार्थ…
अब राष्ट्रार्थ।
न विभाजन…
अब मानव कल्याण।
॥ भारत माता की जय ॥
॥ जय देवभूमि हिमाचल ॥
॥ जय गौ माता ॥
॥ जय सनातन धर्म ॥
॥ ॐ शांति शांति शांति ॥
