मसूरी की सीवरेज परियोजना पर उठे सवाल, खुले नालों में बह रहा होटलों का गंदा पानीधोबीघाट जलस्रोत तक पहुंच रहा सीवर, स्थानीय लोगों ने जताई पेयजल दूषित होने की आशंका

पहाड़ों की रानी मसूरी में करोड़ों रुपये की सीवरेज परियोजना के दावों की पोल एक बार फिर खुलती नजर आ रही है। शहर के कई होटल संचालकों पर नियमों को ताक पर रखकर सीवर का गंदा पानी खुले नालों में छोड़ने के आरोप लगे हैं। इससे न केवल क्षेत्र में दुर्गंध और गंदगी का माहौल बना हुआ है, बल्कि स्थानीय लोगों ने पेयजल स्रोतों के दूषित होने की गंभीर आशंका भी जताई है। ताजा मामला मसूरी के जेपी बैंड क्षेत्र का है, जहां आसपास संचालित कुछ होटलों का सीवर खुले नालों में बहाए जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंदा पानी सीधे बड़े नाले में छोड़ा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू फैल रही है और लोगों का रहना मुश्किल हो गया है।
धोबीघाट जलस्रोत तक पहुंच रहा गंदा पानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नालों में छोड़ा जा रहा सीवर का पानी नीचे धोबीघाट स्थित प्राकृतिक जलस्रोत में जाकर मिल रहा है। यही जलस्रोत मसूरी के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख आधार है, जहां से जल संस्थान पानी लिफ्ट कर विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई करता है। लोगों का कहना है कि यदि सीवर का पानी लगातार जलस्रोत में मिल रहा है तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खासकर गर्मी के मौसम में जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
पहले भी हुई शिकायतें, लेकिन नहीं निकला स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। पूर्व में जल संस्थान और प्रशासन की ओर से कार्रवाई भी की गई, सीवर प्रवाह रोकने के प्रयास हुए और कुछ होटल संचालकों को चेतावनी भी दी गई, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। लोगों का आरोप है कि मसूरी में कुछ ऐसे होटल भी संचालित हो रहे हैं, जिनकी अपनी पर्याप्त सीवरेज व्यवस्था नहीं है। पर्यटन सीजन में जब होटलों में भीड़ बढ़ती है तो अतिरिक्त सीवर को खुले नालों में छोड़ दिया जाता है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि खुले में बहता सीवर न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इससे आसपास के लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। दुर्गंध, मच्छरों की बढ़ती संख्या और दूषित जल से संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले होटल संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
जल संस्थान ने दिए जांच और कार्रवाई के संकेत
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूरी जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने कहा कि शिकायत का गंभीरता से संज्ञान लिया गया है। विभागीय टीम को मौके पर भेजा जाएगा और जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई होटल संचालक खुले नाले में सीवर का गंदा पानी छोड़ता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए उच्च अधिकारियों से निर्देश भी लिए जाएंगे। अमित कुमार ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्थान को पेयजल स्रोतों को दूषित करने का अधिकार नहीं है। जल स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बड़ा सवालः- करोड़ों की सीवरेज योजना के बावजूद क्यों बह रहा सीवर?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मसूरी में सीवरेज परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, तो फिर खुले नालों में सीवर बहने की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि संबंधित विभागों को नियमित निगरानी और सख्त प्रवर्तन सुनिश्चित करना होगा, अन्यथा पर्यटन नगरी की छवि और लोगों के स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
