Sunday 14/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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तीन दिन तक मौत से जूझती रही गौमाता-पर्यावरण मित्रों और गौशाला कर्मियों ने चलाया साहसिक रेस्क्यू अभियान


देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। देवप्रयाग में मानवता,संवेदनशीलता और सेवा भाव का प्रेरणादायी उदाहरण उस समय देखने को मिला जब बेली बैंड के नीचे नदी किनारे खड़ी दुर्गम चट्टानों के बीच पिछले तीन दिनों से फंसी एक निराश्रित गाय को नगर पालिका परिषद देवप्रयाग के पर्यावरण मित्रों एवं गौशाला कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों से सकुशल बचा लिया गया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जानलेवा जोखिम के बावजूद बचाव दल ने साहस और समर्पण का परिचय देते हुए गौमाता को सुरक्षित बाहर निकालकर गौशाला पहुंचाया। जानकारी के अनुसार उक्त गाय नदी किनारे गहरी खाई और विशाल चट्टानों के बीच ऐसे स्थान पर फंस गई थी,जहां से उसका स्वयं बाहर निकल पाना असंभव था। तीन दिनों तक वह भूख-प्यास और प्राकृतिक विपरीत परिस्थितियों के बीच जीवन के लिए संघर्ष करती रही। स्थानीय लोगों द्वारा इसकी सूचना मिलने पर गौशाला कर्मचारियों ने अपने स्तर पर कई प्रयास किए,लेकिन दुर्गम स्थल और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों के कारण सफलता नहीं मिल सकी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसकी सूचना नगर पालिका परिषद देवप्रयाग को दी गई। सूचना मिलते ही पालिका प्रशासन सक्रिय हुआ और पर्यावरण मित्रों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। बचाव दल ने अपनी जान जोखिम में डालकर नदी किनारे खड़ी खतरनाक चट्टानों तक पहुंच बनाई और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। रेस्क्यू अभियान के दौरान कर्मचारियों ने अत्यंत सावधानी और धैर्य का परिचय दिया। नदी के तेज बहाव, फिसलन भरी चट्टानों और गहरी खाई के बीच चलाया गया यह अभियान किसी चुनौती से कम नहीं था। आखिरकार अथक प्रयासों के बाद गौमाता को सुरक्षित नदी पार करवाकर अरण्यक जन सेवा संस्था द्वारा संचालित गौशाला में पहुंचाया गया,जहां उसकी देखभाल और उपचार की व्यवस्था की गई है। इस सराहनीय बचाव अभियान में नगर पालिका परिषद देवप्रयाग के पर्यावरण मित्र रोहित कुमार,मोहन कुमार,उमेश,सुदीप तथा गौशाला के दिनेश और राजेश सहित अन्य सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मानवीय कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए बचाव दल के साहस और समर्पण को सलाम किया। यह घटना केवल एक गोवंश के जीवन को बचाने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह संदेश भी देती है कि संवेदनशीलता,सेवा और सामूहिक प्रयास से किसी भी संकट का सामना किया जा सकता है। देवप्रयाग में चलाया गया यह रेस्क्यू अभियान मानवता और पशु संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।

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