Wednesday 19/ 08/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

भैरव मंदिर में गूंजा हरियाली और आस्था का संदेश-हरेला पर्व पर सुख-समृद्धि की कामना के साथ प्रकृति संरक्षण का संकल्प


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं,धार्मिक आस्था और प्रकृति के प्रति गहरे जुड़ाव का प्रतीक हरेला पर्व श्रीकोट गंगानाली स्थित पौराणिक भैरव मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। श्री भूमि भूमियाल मंदिर विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित हरेला पर्व कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम देखने को मिला। पौराणिक भैरव मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली,हरियाली और शांति की मंगलकामना के साथ पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने देवभूमि की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप हरेला पर्व की महत्ता को आत्मसात करते हुए प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्री भूमि भूमियाल मंदिर विकास समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हरेला महज एक पर्व नहीं,बल्कि उत्तराखंड की उस जीवनशैली का प्रतीक है,जिसमें मनुष्य और प्रकृति के बीच सदियों से आत्मीय संबंध रहा है। पहाड़ की संस्कृति में पेड़-पौधों,जलस्रोतों,जंगलों और धरती को जीवन का आधार माना गया है। ऐसे में हरेला पर्व प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में हरेला जैसे लोकपर्वों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण करने,पेड़-पौधों की देखभाल करने,जलस्रोतों को संरक्षित रखने तथा अपने आसपास स्वच्छ एवं हरा-भरा वातावरण बनाए रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष शशिकांत,सचिव पंकज,सह-सचिव यशीष रावत,कोषाध्यक्ष गजेंद्र खत्री तथा समिति के संरक्षक मधुसूदन एवं गंगा सिंह रावत सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक,श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। हरेला पर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ,सुरक्षित और हरा-भरा पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। धार्मिक आस्था से ओत-प्रोत वातावरण में संपन्न हुआ यह आयोजन सामाजिक एकता,सांस्कृतिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर गया।

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