आज मजदूर सत्याग्रह का सातवां (7)दिन है ऐरा श्रमिक संगठन के महिला मजदूरों और बच्चों सहित सत्याग्रह पर कम्पनी गेट पर उपस्थित है कंपनी प्रबंधन 16 तारीख से हमें कंपनी गेट से हटाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं लेकिन वह किसी भी तरह सफल नहीं हो पा रहे हैं इस प्रयास में कंपनी प्रबंध के आज रुद्रपुर सिविल कोर्ट में प्रस्तुत हुए और सिविल कोर्ट द्वारा अगली डेट 15 अक्टूबर को दे दी गई16 सितंबर को अपेक्स बिल्डर लिमिटेड कम्पनी में हुई वार्ता को लेकर AlC महोदय जी द्वारा दिया गया आश्वासन की 28 सितम्बर को जिला प्रशासन में वार्ता होगी लेकिन आज तक कोई भी सूचना लिखित में नहीं दिया गया इसको लेकर आज ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूर ALC महोदय रुद्रपुर से मिलने गये लिकिन ALC महोदय किच्छा होने की सूचना दी गई 17 सितंबर से लगातार ALC महोदय रुद्रपुर से मिलने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मिलना मुश्किल हो रहा हैयह कि जिला प्रशासन को यह भलीभांति विदित है की एन सी एल टी की दिल्ली शाखा के निर्देशन में अपेक्स बिल्डसिस लिमिटेड, सेक्टर -09,सिडकुल पंतनगर की नीलामी प्रक्रिया सम्पन्न हुई। जिसके तहत कम्पनी के स्वामित्व और प्रबंधन को समस्त श्रमिकों और कर्मचारियों सहित जसमृत डिजाइनर को हस्तगत किया गया।जिससे पूर्ण सहमति ब्यक्त करते हुए जसमृत डिजाइनर के स्वामी द्वारा एन सी एल के समक्ष लिखित हलफनामा / शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए उक्त नीलामी प्रक्रिया में वर्णित सभी शर्तों को स्वीकार करने की प्रतिबद्धता ब्यक्त करते हुए उक्त कारखाने के स्वामित्व और प्रबंधन को ग्रहण किया।किन्तु श्रमिकों की आज तक कार्यबहाली नहीं की गईं है। जिसके पश्चात् प्रार्थी यूनियन द्वारा एन सी एल टी की उच्च शाखा एन सी एल ए टी में रिट / याचिका दायर की। जिस पर एन सी एल ए टी द्वारा स्पष्ट आदेश दिया गया कि एन सी एल ए टी के तहत हुई नीलामी प्रक्रिया में वर्णित सभी शर्ते सभी पक्षों पर बाध्यकारी होंगे। इसके पश्चात् भी कम्पनी प्रबंधन द्वारा कारखाने के 102 स्थाई श्रमिकों की आज तिथि तक भी कार्यबहाली नहीं की गईं है। जो कि उक्त नीलामी प्रक्रिया में वर्णित शर्तों, उक्त के क्रम में एन सी एल टी की डबल बैंच यानि एन सी एल ए टी के उक्त आदेशों का और उक्त के क्रम में नये मालिक द्वारा एन सी एल टी के समक्ष प्रस्तुत अपने ही उक्त हलफनामे /शपथपत्र का घोर उल्लंघन है। घोर छल कपट है।जिससे उक्त 102 श्रमिकों और उनके परिवारों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में ऐसे अनगिनत आदेश पारित किये हैं कि भारत में न्यायालयों / न्यायाधीकरणों द्वारा पारित आदेशों को लागू कराना प्रशासन का संवेधानिक दायित्व है। ऐसा ना करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद – 256 का घोर उल्लंघन है। साथ ही ऐसे भी आदेश पारित किये हैं कि एन सी एल टी के तहत किसी कारखाने की नीलामी प्रक्रिया में वर्णित शर्त सभी पक्षों पर बाध्यक्षरी होंगी। जिन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। प्रार्थी यूनियन द्वारा भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी जिसे माननीय न्यायालय द्वारा एन सी एल टी को हस्तगत कर दिया था। उसके उपरांत ही उक्त कारखाने की नीलामी प्रक्रिया सम्पन्न हुई थी।स्पष्ट है उक्त नीलामी कार्यवाही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय का उक्त आदेश भी समाहित है।
उक्त के क्रम में उत्तराखंड राज्य के सबसे बड़े श्रम अधिकारी श्रमायुक्त उत्तराखंड, महोदय द्वारा सहायक श्रमायुक्त महोदय रुद्रपुर को नोटिस जारी करके उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत विधिक कार्यवाही अमल में लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। किन्तु इनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गईं है। कारखाने में बिना लाइसेंस के ठेका श्रमिकों से अविधिक रूप से उत्पादन कार्य कराया जा रहा है। लिखित शिकायत देने पर भी सहायक श्रमायुक्त द्वारा उक्त अविधिक कृत्य पर रोक लगाने हेतु कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं की गईं है।जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष अनगिनत बार वार्ता हुई, जिसमें वार्ता की अध्ययता कर रहे जिला स्तर के अधिकारियों ने भी हर बार स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया गया कि उक्त 102 श्रमिकों की कार्यबहाली कराये बिना कारखाने में उत्पादन कार्य प्रारम्भ करना सर्वथा अविधिक कृत्य है।नीलामी प्रक्रिया में वर्णित शर्तों का घोर उल्लंघन है। इसके बाद भी आज तिथि तक उक्त 102 श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली नहीं की गईं है।जो की नीलामी प्रक्रिया में वर्णित उक्त शर्तों का, स्वयं कारखाने के नये स्वामी द्वारा एन सी एल टी के समक्ष प्रस्तुत उक्त हलफनामे का,प्रार्थी यूनियन की याचिका पर एन सी एल टी की डबल बैंच द्वारा पारित उक्त आदेश का, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त आदेशों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 256 का घोर उल्लंघन है।
ऐसे में प्रार्थी यूनियन जिला प्रशासन से यही अपेक्षा करती है कि वो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेशों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 256 का अनुपालन करके तत्काल उक्त 102 श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली सुनिश्चित कराके अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वाह करके एन सी एल टी के तहत कारखाने की हुई नीलामी प्रक्रिया में वर्णित शर्तों को, प्रार्थी यूनियन की रिट याचिका पर एन सी एल टी की डबल बैंच द्वारा पारित उक्त आदेश को लागू कराये।
महोदय उक्त श्रमिक दिनांक 16/09/2026 से ड्यूटी समय में प्रातः 9:00 बजे कारखाने में ड्यूटी पर बहाल करने के अनुरोध के साथ में उपस्थित हो रहे हैं और शायं 5:00 बजे घर वापस चले जाते हैं. किन्तु कंपनी प्रबंधन द्वारा उनकी कार्यबहाली नहीं की जा रही है।
ऐसे में आप महोदय से विनम्र अनुरोध है कि उक्त श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली कराके न्याय प्रदान करने की कृपा करें। आपकी अति कृपा होगी। धन्यवाद
आज मजदूर सत्याग्रह पर महिला और बच्चे और मजदूर सैकड़ो की तादाद पर उपस्थित है जिसमे दीपा देवी, संगीता ,अनीशा देवी, पूनम देवी, पूर्णिमा , भरत जोशी , दीवान सिंह,प्रदीप सिंह ,बुद्ध सेन,सत्येंद्र कुमार,गणेश चंद,उपेंद्र, सूर्यभान यादव,दिव्या, इशानी ,अपेक्षा, मयंक गंगवार सैकड़ो की संख्या पर उपस्थित है
