मंथरा व कौशल्या के शानदार अभिनय में – नरेश छाबड़ा

 

30साल तक कैकई का दमदार व संजीदा अभिनय कर चुके इस बार क्लब ने उन्हें दासी मंथरा व महारानी कौशल्या के अभिनय करने की सेवा सौंपी है मंथरा का अभिनय एक नकारात्मकता भरा अभिनय है जो अपने कुटिलता भरे संवादो से रानी कैकयी का मस्तिष्क पलट देती है और उन्हें राम को बनवास ही देना पड़ता है वहीं महारानी कौशल्या के पात्र का अभिनय संजीदा जो दया व ममताभरा है दोनो ही विरोधी पात्रों में उन्होंने अपनी प्रतिभा अभिनय कला का सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है उनका मानना है कि अभिनय के लिए साफ सुंदर चेहरे का होना आवश्यक है जिस अभिनय के सभी भाव स्पष्ट दिखाई दे तथा साफ आवाज के साथ-साथ आवाज का उतार- चढ़ाव सही ज्ञान हो ,बाडी लेंग्वेज बढ़िया गेट अप व सिक्रिप्ट एक कलाकार के अभिनय में चार चांद लगाता है सुंदर गायकी के साथ सुर-ताल का ज्ञान आवश्यक है नरेश को गायन व आर्टिकल लेखन में रूचि है 1988से वह मंच से जुड़कर अनेक पुरुष व लगभग सभी महिला पात्रों का अभिनय कर चुके हैं लीला मंचन के दौरान उनकी अभिनय प्रतिभा देखते ही बनती है व दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं जब तक प्रभु श्रीराम की कृपा होगी तब तक इसे जारी रखेंगे।