दून मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय महिला आयोग की ‘शी इज अ चेंजमेकर’ कार्यशाला आयोजन
मसूरी। शहर के विकास और जनसमस्याओं के समाधान में महिलाओं की भूमिका अब केवल सहभागिता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और बदलाव की अगुवाई करने में भी आगे आना होगा। इसी सोच के साथ राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज सभागार में ‘शी इज अ चेंजमेकर’ (वह बदलाव लाने वाली है) कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी के नेतृत्व में महिला सभासदों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला की मुख्य थीम ‘शी इज अ चेंजमेकर’ का उद्देश्य महिला जनप्रतिनिधियों को यह समझाना रहा कि वे स्थानीय शासन व्यवस्था में बदलाव की मजबूत वाहक बन सकती हैं। इसमें नेतृत्व कौशल विकसित करने, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने, प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने और नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय महिला आयोग और जिला प्रशासन देहरादून के तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक समझ और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मजबूत करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने की। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों को स्थानीय स्तर पर प्रभावी नेतृत्व करने, नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रेरित किया।
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की यह कार्यशाला महिला जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रही। स्थानीय निकायों में महिलाएं केवल प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि शहर के विकास और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें नीतिगत विषयों को समझने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल करने और अपने निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करना जरूरी है, ताकि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा सकें और विकास योजनाओं में सक्रिय योगदान दे सकें।
कार्यशाला में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी के साथ सभासद गीता कुमाई, नीतू चौहान, गौरी थपलियाल और शिवानी जैरवाण भारती ने प्रतिभाग किया। महिला प्रतिनिधियों की सहभागिता को स्थानीय निकायों में महिलाओं के नेतृत्व और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।
