श्रीनगर गढ़वाल। आज आपको कृषि विशेषज्ञ डॉ.आशीष कुमार बता रहे हैं रबी सीजन की फसलों की कटाई,मड़ाई और भंडारण के बाद अब खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई की तैयारी की जाएगी,खरीफ में किसानों को कई फसलों के लिए नर्सरी तैयार करने की जरूरत होती है,कुछ फसलों के बीज की सीधी बुआई की जाती है,खरीफ में बोई जाने वाली किसी भी फसल की बुवाई से पहले बीजोपचार करना जरूरी है,बीजोपचार से बोयी गयी फसल में फफूंद जनित रोग लगने की सम्भावना कम हो जाती है जिससे पैदावार अच्छी होती है,आइए जानते है। बीजोपचार क्या है-बीजोपचार खेती की एक वैज्ञानिक पद्धति है जो बेहतर बीज प्रबन्धन और फसल उत्पादन का एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प है,बीजोपचार पद्धति अपना कर किसान फसल को रोग मुक्त कर सकते है साथ ही उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी हासिल कर सकते है,किसानों को सावधानी से बीजों का उपचार करना जरूरी है क्योंकि बीज अनेक रोगाणु फंगस,जीवाणु,विषाणु व सूत्र कृमि के वाहक होते हैं,इसकी वजह से बीजों की गुणवत्ता और अंकुरण के साथ फसल की बढ़वार,रोग से लड़ने की क्षमता,उत्पादकता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है,इसलिए बीज भंडारण से पहले अथवा बुवाई से पहले जैविक या रासायनिक अथवा दोनों के द्वारा बीज का उपचार किया जाना अत्यंत जरूरी है। सामान्यत-बीज उपचार फफूंदनाशी,कीटनाशक या दोनों के संयोजन से किया जाना चाहिए ताकि बीज-जनित या मृदा-जनित रोगजनक जीवाणु और भंडारण कीड़ों से उन्हें मुक्त किया जा सके,बीजों का उपचार दो प्रकार से किया जाता है,एक बीज विसंक्रमण और दूसरा बीज संरक्षण के जरिए,किस प्रकार करें बीजोपचार,बीजोपचार के लिए ड्रम में बीज और दवा डालकर ढक्कन बंद करके हैंडल द्वारा ड्रम को 5 से 10 मिनट तक घुमाया जाता है,इस विधि से एक बार में 25-35 किलो ग्राम बीज उपचार किया जा सकता है,बीज उपचार की पारंपरिक विधि घड़ा विकल्प है,इस विधि से बीज और दवा को घड़ा में निश्चित मात्रा में डालकर घड़े के मुंह को पॉलीथीन से बांधर 10 मिनट तक अच्छी तरह से हिलाया जाता है,थोड़ी देर बाद घड़े का मुंह खोलकर उपचारित बीज को अलग बोरे में रखा जाता है,बीज उपचार की अन्य विधि प्लास्टिक बोरा विधि है,इस विधि में बीज और दवा को डालकर बोरे में मुंह को रस्सी से बांध दिया जाता है और 10 मिनट तक अच्छी तरह हिलाने के बाद जब दवा की परत बीज के ऊपर अच्छी तरह लग जाए तब बीज को भंडारित अथवा बुवाई की जाती है,बीज का उपाचर रासायनिक विधि से भी किया जाता है, इस विधि में 10 लीटर पानी में फफूंदनाशक और कीटनाशक की निर्धारित मात्रा 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल बनाकर गन्ना,आलू,अन्य कंद वाले फसल को 10 मिनट तक घोल में डुबोकर बुवाई की जाती है,जिनमें बीजोपचार के लिए प्रमुख फफूंदनाशक दवा कैप्टान,कार्बेन्डाइजिम,थीरम,पाइराक्लोस्ट्रैबिन,एजोकक्सीस्ट्रोबिन,इप्कोनाजो,फ्लूडियोक्सोनिल,फ्लक्सापायरोक्सैड आदि है,धान का बीजोपचार 15 फीसदी नमक घोल से भी किया जाता है,इस विधि में साधारण नमक के 15 फीसदी घोल में बीज को डुबोया जाता है,जिससे कीट से प्रभावित बीज,खरपतवार के बीज ऊपर तैरने लगते हैं और स्वस्थ बीज नीचे बैठ जाता है,जिसे अलग कर साफ पानी से धोकर,भंडारित अथवा सीधे खेतों में बुवाई किया जा सकता है. बीज जनित बीमारी जैसे उकटा,जड़ गलन के उपचार के लिए जैविक फफूंदनाशी ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास से 5 से 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित किया जाना चाहिए। बीजोपचार करने के कई फायदे हैं,यह पौधों की बीमारियों के प्रसार को रोकता है,बीज को सड़ने या बीजांकुरों को झुलसने से बचाता है,साथ ही बीज अंकुरण में सुधार होता है और पौधे एक समान उगते हैं,भंडारण कीड़ों से सुरक्षा प्रदान करता है,मृदा जनित कीटों और कवकजनित रोगों से बीज की रक्षा करता है,थोडी सी दवा का प्रयोग करके अत्य अधिक फायदा मिल सकता है। पोषक तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों से बीजोपचार बीजों को पोषक तत्वों,विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भिगाकर उपचार करना चाहिए,धान के बेहतर अंकुरण और शक्ति क्षमता में सुधार के लिए बीजों को एक फीसदी केसीएल घोल में 12 घंटे तक भिगोया जा सकता है,अथवा ग्रोफास्ट Ampul 2ml /Kg का उपयोग किया जा सकता है।
खरीफ में फसलों के बीजों की बुवाई से पूर्व,बीजोपचार अवश्य करें,जिससे फसल को मिलेगी कवक जनित रोगों और कीटों से सुरक्षा–डॉ.आशीष कुमार कृषि विशेषज्ञ
