शान्तिपूर्वक एक साथ रहने का अंतरराष्ट्रीय दिवस

श्रीनगर गढ़वाल। हर साल 16 मई को मनाया जाने वाला शांतिपूर्वक एक साथ रहने का अंतरराष्ट्रीय दिवस हमें एक गहरे आध्यात्मिक सत्य की याद दिलाता है-शांति केवल बाहरी परिस्थितियों में नहीं,बल्कि हमारे भीतर की गहराई में बसती है। यह दिवस हमें न केवल दूसरों के साथ, बल्कि स्वयं और समस्त सृष्टि के साथ सामंजस्य स्थापित करने का निमंत्रण देता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से,शांति का अर्थ है मन का वह शुद्ध अवस्था,जहां क्रोध,भय और द्वेष की छाया नहीं होती। यह वह अवस्था है,जहां हम हर प्राणी में एक ही दिव्य चेतना को देखते हैं। भारतीय दर्शन में,वसुधैव कुटुंबकम् का सिद्धांत हमें सिखाता है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है। इस दिवस पर हम इस भावना को आत्मसात कर सकते हैं, जहां मतभेदों को स्वीकार करते हुए भी हम प्रेम और करुणा के धागे से जुड़ते हैं। शांतिपूर्वक एक साथ रहना केवल सामाजिक सहिष्णुता तक सीमित नहीं है,यह एक आंतरिक यात्रा है। जब हम ध्यान,प्रार्थना या आत्म-चिंतन के माध्यम से अपने मन को शांत करते हैं,तो हम न केवल स्वयं को,बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी शांति का उपहार देते हैं। एक छोटा सा क्षण,जब हम किसी के प्रति दया दिखाते हैं,किसी की बात को बिना पूर्वाग्रह सुने हैं, या किसी भिन्न संस्कृति को सम्मान देते हैं, वह शांति का बीज बोता है। आज 16 मई 2025, आइए हम एक संकल्प लें-अपने हृदय में शांति की लौ जलाएं और उसे दूसरों तक पहुंचाएं। एक शांत मन ही वह दीपक है,जो अंधेरे को दूर कर सकता है।