मसूरी के निकटवर्ती मसूरी देहरादून को जोड़ने वाला झाड़ीपानी-कोलूखेत मार्ग इस समय अपनी सबसे बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। सड़क पर पड़े गहरे गड्ढे, टूटे हुए किनारे और जगह-जगह जमा मलवे ने इस रास्ते को एक जानलेवा ट्रैक में तब्दील कर दिया है। स्थानीय लोग अब प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या नगर पालिका और संबंधित विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहे हैं?। यह मार्ग मसूरी से झड़ीपानी, कोलूखेत मार्ग मसूरी देहरादून को जोडता है ओर स्थानीय नागरिको के साथ र्प्यटक मसूरी देहरादून मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक का भारी दबाब को देखते हुए मसूरी झड़ीपानी, कोलूखेत मार्ग को प्रयोग करते है। इस पर रोज़ाना स्कूली बच्चे, कर्मचारी, स्थानीय दुकानदार और पर्यटक सफर करते हैं। लेकिन पिछले कई सालो से सड़क की हालत इतनी ख़राब हो चुकी है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बारिश होते ही सड़क पर गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा और भी बढ़ जाता है। रात के समय सड़क पर कोई स्ट्रीट लाइट नहीं है, जिससे अंधेरे में कई वाहन फिसल चुके हैं। कई दोपहिया वाहन चालक गिर चुके हैं, जिससे वह गंभीर रूप् से घायल हो गए। कमला देवी, झाड़ीपानी की एक निवासी, कहती हैं,हमने नगर पालिका और मसूरी विधायक कैबिनेट मंत्री को कई बार शिकायत पत्र दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें बच्चों को स्कूल भेजते हुए डर लगता है कि कहीं रास्ते में कुछ हो न जाए। स्थानीय निवासी रमेष ने बताया कि सड़क की वजह से हमारी गाड़ियाँ जल्दी खराब हो जाती हैं। उन्होने बताया कि हाल में हुए पालिका के चुनाव में जितने वाले प्रत्याषियों ने बादा किया था कि चुनाव के बाद वह झड़ीपानी, कोलूखेत मार्ग को ठीक करायेगे परन्तु लगता है कि कूर्सी के बैठने के बाद जन प्रतिनिधि जनता को भूल गए है। उन्होने कहा लगता है कि नगर पालिका प्रशासन को किसी मासूम की जान जाने का इंतजार है? अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होने कह कि नगर पालिका प्रषासन को बारिश से पहले गड्ढों को भरने और सड़क को समतल करने का कार्य तुरंत शुरू किया जाए। बता दे कि झड़ीपानी-कोलूखेत मार्ग की हालत आज जिस स्तर पर पहुंच चुकी है, वह न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि एक पूरे समुदाय की सुरक्षा और जीवनशैली पर सीधा प्रहार है।
मसूरी में झाड़ीपानी-कोलूखेत मार्ग की हालत बद से बदतर, स्थानीय जनता में रोष, मसूरी पालिका प्रशासन बना मूकदर्शक
