तिब्बती समुदाय ने पंचेन लामा की गुमशुदगी के 30 साल पूरे होने पर किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन



पहाडों की रानी मसूरी में तिब्बती समुदाय ने शनिवार को 11वें पंचेन लामा गेडुन चोएक्यी न्यिमा की गुमशुदगी के 30 साल पूरे होने पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च का आयोजन किया। यह प्रदर्शन मसूरी हैप्पी वैली से षुरू हुआ या मालरोड होते हुए गांधी चौक पहुचा। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा द्वारा 1995 में गेडुन चोएक्यी न्यिमा को पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी गई थी। मात्र 6 वर्ष की उम्र में उन्हें उनके परिवार सहित 17 मई 1995 को चीन सरकार द्वारा अगवा कर लिया गया था। तब से लेकर आज तक उनका कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है। प्रदर्शनकारियों ने चीन सरकार से गेडुन चोएक्यी न्यिमा की रिहाई और उनके हालात के बारे में पारदर्शी जानकारी देने की मांग की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से भी अपील की कि वे इस विषय पर दबाव बनाएँ। मसूरी में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों तिब्बती नागरिकों, भिक्षुओं और छात्रों ने भाग लिया। शांतिपूर्ण मार्च के बाद एक कैंडल लाइट सभा आयोजित की गई, जिसमें पंचेन लामा के चित्र के समक्ष मौन प्रार्थना की गई। तिब्बती संसद के एक सदस्य ने कहा, ष्गेडुन चोएक्यी न्यिमा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, तिब्बत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। उनका 30 वर्षों से लापता रहना न केवल एक व्यक्ति की त्रासदी है, बल्कि पूरे तिब्बती समाज की पीड़ा है। चीनी सरकार का दावा है कि गेडुन चोएक्यी न्यिमा श्सुरक्षित हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैंश्, लेकिन आज तक किसी स्वतंत्र एजेंसी को उनकी स्थिति की पुष्टि करने की अनुमति नहीं दी गई है। बता दे कि तिब्बती समुदाय इस दिन को हर साल पंचेन लामा गुमशुदगी दिवस के रूप में मनाता है और यह तिब्बती आंदोलन की चेतना को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है