धान की पूसा डीएसटी -1 किस्म अम्लीय और क्षारीय मिट्टी में अन्य धान की किस्मों की अपेक्षा देगी अधिक पैदावार

श्रीनगर गढ़वाल। आज आपको उद्यान विशेषज्ञ डॉ.आशीष कुमार धान पैदावार के विषय में अवगत करा रहे हैं। पूसा डीएसटी चावल 1,नई दिल्ली में आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा विकसित एक जीनोम-संपादित चावल किस्म है,जो एमटीयू 1010 किस्म पर आधारित है। इसे डीएसटी (सूखा और नमक सहिष्णुता) जीन को लक्षित करके सूखे और नमक तनाव के प्रति सहनशीलता में सुधार करने के लिए तैयार किया गया है। इस किस्म से लवणीय और क्षारीय मिट्टी में पैदावार में 9.66% से 30.4% तक की वृद्धि होने की उम्मीद है,साथ ही उत्पादन में 20% तक की वृद्धि की संभावना है। प्रमुख विशेषताऐं- जीनोम संपादन: पूसा डीएसटी चावल 1 को CRISPR-Cas9 जीनोम-संपादन प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विकसित किया गया है,जो विदेशी जीन को शामिल किए बिना चावल के डीएनए में सटीक परिवर्तन करने की अनुमति देता है। सूखा एवं नमक सहिष्णुता: डीएसटी जीन को सूखे और नमक तनाव के प्रति पौधे की लचीलापन बढ़ाने के लिए संपादित किया गया है,जिससे इसे लवणीय और क्षारीय मिट्टी वाले क्षेत्रों में खेती के लिए उपयुक्त बनाया जा सके। उपज में वृद्धि- क्षेत्र परीक्षणों से पता चला है कि पूसा डीएसटी चावल 1 मूल एमटीयू 1010 किस्म की तुलना में लवणीय और क्षारीय मिट्टी में उपज में 30.4% तक की वृद्धि कर सकता है। गैर जीएमओ-पूसा डीएसटी चावल 1 को विकसित करने में प्रयुक्त जीनोम संपादन प्रक्रिया में विदेशी जीनों का समावेश शामिल नहीं है,जिससे यह गैर-जीएमओ किस्म बन जाती है और जैव सुरक्षा नियमों के अनुरूप है। संभावित लाभ: स्थायी कृषि-सूखे और नमक सहनशीलता में सुधार करके,पूसा डीएसटी चावल 1 खराब मिट्टी और सीमित जल संसाधनों वाले क्षेत्रों में किसानों की मदद कर सकता है,तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे सकता है। उत्पादन में वृद्धि-इस किस्म की बढ़ी हुई उपज क्षमता खाद्य सुरक्षा में योगदान दे सकती है और भारत को कृषि उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। मीथेन उत्सर्जन में कमी–पूसा डीएसटी चावल 1 की छोटी अवधि भी मीथेन गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती है,जिससे पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान मिलेगा। विकास और महत्व-आईसीएआर-आईएआरआई:पूसा डीएसटी चावल 1 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई) द्वारा विकसित किया गया था। जैव सुरक्षा विनियम-पूसा डीएसटी चावल 1 को विकसित करने में प्रयुक्त जीनोम संपादन तकनीक को कड़े जीएमओ विनियमों से मुक्त माना जाता है,क्योंकि इसमें विदेशी जीनों का समावेश शामिल नहीं है। भारत का माइनस 5 और प्लस 10 फॉर्मूला-पूसा डीएसटी चावल 1 का विकास चावल की खेती के क्षेत्र को कम करने तथा उत्पादन बढ़ाने के भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,जैसा कि माइनस 5 और प्लस 10 फार्मूले में रेखांकित किया गया है।