अनुभवात्मक शिक्षा को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनना चाहिए–प्रो.धामी

श्रीनगर गढ़वाल। 11 जून 2025 को महीने भर चलने वाले गुरु दक्षता फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के समापन सत्र के दौरान कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल उत्तराखंड के पूर्व कुलपति प्रो.एच.एस.धामी ने उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में अनुभवात्मक शिक्षा को एकीकृत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का आयोजन यूजीसी और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तत्वावधान में हाइब्रिड मोड के माध्यम से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा किया गया था। देश भर से नव नियुक्त शिक्षकों की एक प्रतिष्ठित वर्चुअल सभा को संबोधित करते हुए प्रो.धामी ने इस बात पर जोर दिया कि अनुभवात्मक शिक्षा केवल एक शैक्षणिक प्रवृत्ति नहीं है,बल्कि आज की तेजी से विकसित हो रही ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में प्रासंगिक और उत्तरदायी बने रहने के लिए भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि पारंपरिक कक्षा-आधारित शिक्षण महत्वपूर्ण बना हुआ है,लेकिन इसे व्यावहारिक,समस्या-आधारित और परियोजना-उन्मुख दृष्टिकोणों के साथ पूरक होना चाहिए जो महत्वपूर्ण सोच,रचनात्मकता,सहयोग और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग को बढ़ावा देते हैं। अग्रणी वैश्विक शिक्षा मॉडल के उदाहरणों का हवाला देते हुए प्रो.धामी ने उच्च शिक्षा संस्थानों से ऐसे पाठ्यक्रम को फिर से डिजाइन करने का आग्रह किया जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समग्र और बहु-विषयक शिक्षा के दृष्टिकोण के अनुरूप हों। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के पृथ्वी विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो.एच.सी.नैनवाल ने आधुनिक शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षकों की अपूरणीय भूमिका पर गहन वक्तव्य दिया। प्रो.नैनवाल ने मानव शिक्षकों के अनूठे और अपूरणीय मूल्य को रेखांकित करते हुए कहा,आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस जानकारी की नकल कर सकती है,लेकिन इसमें सहानुभूति,अंतर्ज्ञान और मानवीय जुड़ाव का अभाव होता है जो एक शिक्षक कक्षा में लाता है। शिक्षकों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता होती है,कुछ ऐसा जो कोई एल्गोरिदम अनुकरण नहीं कर सकता है। उन्होंने विस्तार से बताया कि ऐसे युग में जहां तकनीक तेजी से शिक्षा को बदल रही है,यह भावनात्मक बुद्धिमत्ता है,छात्रों को मानवीय स्तर पर समझने,प्रेरित करने और उनसे जुड़ने की क्षमता-जो प्रभावी शिक्षण का मूल है। उन्होंने एआई-संचालित प्लेटफार्मों पर अत्यधिक निर्भरता के खिलाफ आगाह किया। महीने भर (13 मई से 11 जून 2025) चलने वाले गुरु दक्षता कार्यक्रम में देश के 19 अलग-अलग राज्यों से 60 शिक्षक प्रतिभागियों ने भाग लिया,जिसमें विभिन्न संस्थानों और विषयों के प्रख्यात विद्वानों ने व्याख्यान दिया एवं अपने अनुभव साझा किए और नए शिक्षकों को आज की कक्षाओं के लिए आवश्यक मूल्यों,उपकरणों और नवीन प्रथाओं के बारे में बताया। समापन भाषण में केंद्र के कार्यवाहक निदेशक डॉ.राहुल कुंवर सिंह ने परिवर्तनकारी शिक्षक प्रशिक्षण पहलों को बढ़ावा देने के लिए एमएमटीटीसी की प्रतिबद्धता को दोहराया जो आचार्य देवो भव की भावना को बनाए रखते हैं और राष्ट्रीय शैक्षिक लक्ष्यों में सार्थक योगदान देते हैं। सत्र के दौरान प्रतिभागियों से फीडबैक भी लिया गया। अपने समापन भाषण में केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ.राहुल कुंवर सिंह ने परिवर्तनकारी शिक्षक प्रशिक्षण पहलों को बढ़ावा देने के लिए एमएमटीटीसी की प्रतिबद्धता को दोहराया जो आचार्य देवो भव की भावना को बनाए रखते हैं और राष्ट्रीय शैक्षिक लक्ष्यों में सार्थक योगदान देते हैं। सत्र के दौरान प्रतिभागियों से फीडबैक भी लिया गया। समापन सत्र का संचालन केंद्र के सहायक निदेशक डॉ.सोमेश थपलियाल ने किया। पूरा कार्यक्रम हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर उत्तराखंड के कुलपति प्रो.एमएमएस रौथाण के मार्गदर्शन में आयोजित एवं उसी विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ.राहुल कुंवर सिंह के नेतृत्व में इसे क्रियान्वित किया गया।