जान जोखिम में डाल किया लोकतंत्र का रक्षा-कर्म-मतदान दल की साहसिक मिशालरात के अंधेरे,जंगलों की खामोशी और चट्टानों की चढ़ाई पार कर चुनाव सामग्री पहुंचा दी सुरक्षित

जखोली/रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। लोकतंत्र की नींव सिर्फ मतदाताओं के वोटों से ही नहीं,बल्कि उन गुमनाम नायकों की निष्ठा से भी मजबूत होती है,जो हर परिस्थिति में चुनाव सम्पन्न कराने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाने को भी तैयार रहते हैं। ऐसा ही एक साहसिक और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया राजकीय प्राथमिक विद्यालय लड़ियासू में तैनात एक मतदान दल ने,जिसने रात के अंधेरे,पहाड़ी खतरे और बिना किसी सहायता के चुनाव सामग्री सुरक्षित जमा स्थल तक पहुंचाई। 3 किमी जंगल,चट्टानी ढलान,हल्की बारिश और अंधकार फिर भी नहीं डगमगाए कदम यह मतदान केन्द्र ग्राम पंचायत लेख लावड़ी के तुनेटा से लगभग 3 किमी खड़ी चढ़ाई के बाद घने चीड़ के जंगल में स्थित है। मतदान सम्पन्न होने के बाद रात 10:30 बजे तक भी सामग्री को नीचे लाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। ऐसे में मतदान अधिकारियों ने एक असाधारण निर्णय लिया,चुनाव सामग्री को खुद अपने कंधों पर लादकर पैदल ही खतरनाक रास्तों से नीचे लाने का। पीठासीन अधिकारी हेमंत चौकियाल,मतदान अधिकारी महावीर रंगवाण,नंदन सिंह राणा,लाखन सिंह और सुरक्षा कर्मी वीरेन्द्र कुमार ने किसी भी प्रकार का बहाना न बनाते हुए अपने-अपने हिस्से का सामान,बिस्तर और बैलेट पेटियां खुद उठाईं और रात 11 बजे निकल पड़े। रास्ता न सिर्फ संकरा और फिसलन भरा था,बल्कि हल्की बारिश और अंधेरा भी मुश्किलें बढ़ा रहा था। लेकिन दल ने 45 मिनट में ये 3 किमी दुर्गम उतराई पूरी कर सड़क तक की दूरी तय की। भोजनमाताओं का भी प्रशंसनीय सहयोग केवल मतदान दल ही नहीं,बल्कि स्थानीय भोजनमाता रेखा देवी और अंशी देवी का भी योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने न केवल उत्तम भोजन की व्यवस्था की,बल्कि रस्सी और टॉर्च की मदद से दल की सुरक्षा सुनिश्चित की। इतना ही नहीं,वे दल के रवाना होने तक साथ बनी रहीं। साहस और सेवा का संगम बना यह मतदान दल रात लगभग 1 बजे,चुनाव वाहन चालक धीरज सिंह के सहयोग से मतदान दल जखोली विकास खण्ड कार्यालय पहुंचा और लगभग 2:30 बजे चुनाव सामग्री जमा कर सुकून की सांस ली। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जब प्रशासन और मीडिया तक पहुँची तो हर किसी ने इस दल के जज्बे और निष्ठा को सलाम किया। पीठासीन अधिकारी ने बताया कि महिला अधिकारी संगीता राणा को मतदान समाप्ति के बाद कार्यमुक्त कर सुरक्षित भेज दिया गया था,जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। एक सवाल… क्या ऐसे समर्पित कर्मियों को सिर्फ सराहना ही पर्याप्त है,हर चुनाव के बाद ऐसी घटनाएँ कुछ समय चर्चा में रहती हैं और फिर भुला दी जाती हैं। मगर यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं,बल्कि प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक संदेश है-ऐसे साहसी कर्मियों को केवल धन्यवाद नहीं,बल्कि सम्मान और व्यवस्था में सुधार के ठोस कदम चाहिए। निष्कर्ष-जब देश का नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करता है,तो उसके पीछे ऐसे नायकों का भी हाथ होता है,जो हर जोखिम उठाकर लोकतंत्र की डगर को सुगम बनाते हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय लड़ियासू के मतदान दल ने दिखा दिया कि कर्तव्य की राह में अगर जज़्बा हो,तो कोई भी रास्ता दुर्गम नहीं होत।