मसूरी में गुरु राम राय स्कूल की छत पर चला हथौडा, बारिश में भीगी ज़िंदगी, 80 साल से रह रहे परिवारों का फूटा ग़ुस्सा



मसूरी के लक्ष्मणपूरी क्षेत्र में बंद पड़े गुरु राम राय स्कूल की छत को देहरादून से आए लोगों ने बारिश के बीच उखाड़ दिया। इससे स्कूल के नीचे रह रहे 6 गरीब परिवारों के घरों में पानी घुस गया और लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। वही लक्ष्मणपूरी क्षेत्र में गुरु राम राय ट्रस्ट की भूमि पर बसे अन्य 14 परिवारों के साथ 6 परिवारों को पूर्व में मकानों को खाली करने का नोटिस दिया गया है जो कोर्ट में विचारधीन है।
यह कार्यवाही गुरु राम राय ट्रस्ट के प्रबंधन, देहरादून के निर्देश पर की गई। आरोप है कि प्रबंधन ने स्थानीय मजदूरों की मदद से बिना किसी पूर्व सूचना या वैध आदेश के स्कूल की छत को हटवा दिया। स्कूल के नीचे और आस-पास के मकानों में रह रहे परिवारों ने बताया कि छत हटते ही तेज़ बारिश का पानी सीधे उनके कमरों में घुस गया, जिससे बिस्तर, खाने-पीने का सामान, बच्चों की किताबें और रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें बर्बाद हो गईं। स्थानीय निवासियों का दावा है कि वे पिछले 80 वर्षों से इस ज़मीन पर रह रहे हैं, और अब नए महंत देवेन्द्र दास के नेतृत्व में गुरु राम राय प्रबंधन उन्हें बेदखल करने पर तुला है। एक बुज़ुर्ग महिला की आंखों में आंसू थे जब उन्होंने कहा कि हमने तो अपने बच्चों को यहीं बड़ा किया। पुराने महंत ने हमें कभी नहीं निकाला। वो इंसानियत से काम लेते थे, पर अब लगता है जैसे हम अजनबी बन गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 2018 में प्रबंधन द्वारा तय किराया वे समय से देते आ रहे हैं। बीच में किराया बढ़ाया भी गया, पर उन्होंने बिना विवाद उसका भी भुगतान किया। कई लोगों ने अपने घरों की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए हैं कृ अब जब मकान थोड़े अच्छे हुए, तो उन्हें खाली करने के लिए धमकाया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, मसूरी को पहले ही बंद करवा दिया गया था, जिससे वहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई। अब वही स्कूल तोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि मकानों को खाली करवाने की अगली कड़ी में अब ज़मीन का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाएगा। बड़ी बात यह है कि यह पूरा मामला वर्तमान में न्यायालय में लंबित है, इसके बावजूद अचानक छत उखाड़ देना कई सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि जब मामला अदालत में है, तो प्रबंधन को ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए।

स्थानीय निवासी जगत रौथाण ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे। लेकिन जब तक फ़ैसला नहीं आता, हमें यूं परेशान क्यों किया जा रहा है? क्या गरीबों की कोई सुनवाई नहीं?। उन्होने कहा कि प्रभावित परिवारों ने गुरु राम राय दरबार के वर्तमान महंत देवेन्द्र दास से सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि एक संत का काम लोगों को उजाड़ना नहीं, बल्कि उन्हें बसाना होता है। औ अगर आज गुरु राम राय होते, तो क्या वे अपने अनुयायियों को इस तरह की हालत में देखना पसंद करते।
ब्ता दे कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक मामला कोर्ट में है, किसी भी तरह की तोड़फोड़ या बेदखली पर रोक लगाई जाए और मौजूदा हालात की निष्पक्ष जांच कराई जाए। पीडित लोगों ने गुरु राम राय दरबार के महंत देवेन्द्र दास से अपील की है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए।