मसूरी इंटरनेशनल स्कूल ने अपने 42वें स्थापना दिवस को हर्षोल्लास, गरिमा और आत्मीयता के साथ मनाया। यह केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं था, बल्कि विद्यालय की चार दशकों की गौरव गाथा का जीवंत उत्सव था, जिसमें वर्तमान और भूतपूर्व छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक और कर्मचारीगण समान रूप से सहभागी बने। समारोह की शुरुआत सुबह वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन से हुई, जिसमें शांति, समृद्धि और विद्या की वृद्धि के लिए प्रार्थनाएं की गईं। हवन में विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शालू बब्बर, समस्त शिक्षकगण और छात्राओं ने सहभागिता की, जिससे सम्पूर्ण परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार हुआ। विद्यालय की छात्राओं ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य, पश्चिमी समकालीन नृत्य, समूह गायन और प्रेरणादायक नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का दिल जीत लिया। हर प्रस्तुति में छात्राओं की मेहनत, रचनात्मकता और उनके भीतर छिपी कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल रहा जब पूर्व छात्राओं का पुनर्मिलन। दुनिया के विभिन्न कोनों से आई इन पूर्व छात्राओं ने मंच पर आकर अपने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं, जो कई बार श्रोताओं की आंखों को नम कर गईं। उन्होंने बताया कि कैसे मसूरी इंटरनेशनल स्कूल ने उनके व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। एक पूर्व छात्रा ने भावुक होकर कहा कि यह स्कूल हमारे जीवन की नींव है। यहाँ की शिक्षा, अनुशासन और स्नेह ने हमें जीवन के हर मोड़ पर मजबूती से खड़ा रहना सिखाया। प्रधानाचार्या श्रीमती शालू बब्बर ने अपने ओजस्वी और भावनात्मक संबोधन में कहा कि मसूरी इंटरनेशनल स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार है जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं दुनिया भर में फैली हुई हैं। पूर्व छात्राओं की वापसी इस बात का प्रमाण है कि विद्यालय ने न केवल शिक्षा दी, बल्कि जीवन के मूल्य भी संजोए।
मसूरी इंटरनेशनल स्कूल का 42वां स्थापना दिवस, पूर्व छात्राओं के संग यादों और प्रेरणाओं का अनमोल संगम
