जनप्रतिनिधि चयन में धनबल नहीं,विकास हो प्राथमिकता–राजेन्द्र दानू

श्रीनगर गढ़वाल। जनहित और लोकतंत्र की शुचिता को लेकर समाजसेवी एवं जनचेतना के सजग प्रहरी राजेन्द्र दानू ने पंचायत स्तर की राजनीति में बढ़ते धनबल के प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि जनता ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनती है जो केवल पैसे के दम पर ब्लॉक प्रमुख,जिला पंचायत अध्यक्ष या अन्य पदों तक पहुंचते हैं,तो यह भ्रष्टाचार की मजबूत नींव रखने जैसा है। धनबल से जो सदस्य,ब्लॉक प्रमुख,जिला पंचायत अध्यक्ष बनाएंगे,वे भ्रष्टाचार की नींव रखेंगे। कृपया धन की नहीं,विकास की डिमांड रखें। राजेंद्र दानू का यह बयान उस सच्चाई को उजागर करता है,जो आज ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायतों तक की चुनावी प्रक्रियाओं में देखने को मिलती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चुनावों में धन के प्रभाव से चुने गए जनप्रतिनिधि अक्सर विकास के प्रति जवाबदेह नहीं रहते,बल्कि वे अपनी पूंजी वसूलने और व्यक्तिगत हित साधने की दिशा में काम करते हैं। इसका सीधा नुकसान गांव,जनता और पूरे जनपद को होता है। विकास शील समाज के लिए ईमानदार नेतृत्व की आवश्यक-राजेंद्र दानू ने इस बात पर बल दिया कि पंचायत स्तर पर यदि योग्य,ईमानदार और विकास के प्रति प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि चुने जाएं,तो न केवल शासन की योजनाएं धरातल पर उतरेंगी,बल्कि जन-विश्वास भी सशक्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी समय में जनता को चाहिए कि वह न किसी प्रलोभन में आए,न किसी दबाव में,बल्कि वह समझदारी,विवेक और विकास सोच के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता खुद तय करे कि वह कैसे नेतृत्व को आगे लाना चाहती है,धन आधारित या विकास आधारित। अगर आज चुप रहकर गलत चयन हुआ,तो उसका परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा पंचायती राज व्यवस्था की सफलता जनता की सोच पर निर्भर करती है। यदि जनता ईमानदार नेतृत्व को चुनने का संकल्प ले ले,तो कोई ताकत विकास को रोक नहीं सकती। भ्रष्टाचार की नींव न रखें, स्वच्छ लोकतंत्र को दें बढ़ावा।