श्रीनगर गढ़वाल। रक्षाबंधन पर्व इस बार केवल एक पारिवारिक उत्सव नहीं रहा,बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणास्रोत बनकर सामने आया। धर्म जागरण से जुड़े स्वयंसेवकों ने इस पर्व को समरसता दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया और इसे जमीनी स्तर पर साकार भी किया। धर्म जागरण विभाग से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं ने श्रीनगर व आसपास की सेवा बस्तियों एवं बाल्मीकि बस्तियों में घर-घर जाकर रक्षा सूत्र बांटे। बहनों को रक्षासूत्र के साथ भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दिया गया। इस अवसर पर धर्म जागरण के जिला संयोजक भगवती सिंह कठैत ने कहा धर्म जागरण विभाग रक्षाबंधन को केवल एक पर्व नहीं,बल्कि सामाजिक समरसता का उत्सव मानता है। यह पर्व हमें जाति,वर्ग,भाषा,क्षेत्र जैसे भेदों को मिटाकर एकजुट होने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे धर्म जागरण के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय घिल्डियाल ने कहा रक्षा सूत्र वितरण कार्यक्रम का उद्देश्य है समाज के उन वर्गों में धर्म,संस्कृति और सनातन मूल्यों का जागरण करना,जिन्हें वर्षों तक उपेक्षित रखा गया। कार्यक्रम के दौरान शैलेश रावत,हरिकृष्ण नौटियाल,नरीलाल निर्वेद,प्रभात पाण्डेय,आशुतोष कुकरेती सहित कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे,जिन्होंने बस्तियों में समरसता का संदेश फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर इस अभिनव पहल ने पर्व को एक नई दिशा दी है,जिसमें धर्म के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को जोड़ने की भावना सजीव हुई है। यह प्रयास न केवल प्रेरणास्पद है,बल्कि वर्तमान सामाजिक संरचना में एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर भी संकेत करता है।
सेवा बस्तियों में बंधा समरसता का रक्षा सूत्र,धर्म जागरण के स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर मनाया पर्व
