पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जहां एक ओर जनपद पौड़ी के कई गांव प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं,वहीं दूसरी ओर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के त्योहार रक्षाबंधन ने राहत और उम्मीद की एक नई कहानी लिख दी। शनिवार, 9 अगस्त 2025 को कोतवाली पौड़ी क्षेत्र के आपदा प्रभावित सैजी गांव में वह भावुक दृश्य देखने को मिला,जब कठिन हालात से घिरी बहनों ने पौड़ी पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें अपना रक्षक भाई मान लिया। यह सिर्फ रेशम का धागा नहीं था,बल्कि आपदा में टूटे हुए दिलों में विश्वास का एक मजबूत बंधन था। संकट के बीच मानवता की मिसाल,बीते दिनों की मूसलधार बारिश और भूस्खलन ने इस क्षेत्र में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। घरों की नींव हिल गई,रास्ते टूट गए,और कई परिवार असहाय स्थिति में हैं। ऐसे कठिन वक्त में पौड़ी पुलिस और एसडीआरएफ के जवान राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटे हुए हैं। वे न सिर्फ़ आपदा से लड़ रहे हैं,बल्कि ग्रामीणों के मन में साहस और भरोसा भी जगा रहे हैं। ये धागा अब सिर्फ राखी नहीं,हमारा हौसला है,सैजी गांव की बहनों ने जब जवानों की कलाई में राखी बांधी,तो उनकी आंखों में राहत की चमक थी। किसी ने कहा,हमारे अपने तो दूर हैं,लेकिन ये वर्दी वाले भाई दिन-रात हमारी सुरक्षा में खड़े हैं। जवानों ने भी इस बंधन को पूरे दिल से स्वीकार करते हुए हर परिस्थिति में साथ निभाने का वचन दिया। इस अवसर पर मौजूद पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने कहा कि यह बंधन उन्हें और भी जिम्मेदार बनाता है। उनका वादा है कि चाहे हालात कितने भी कठिन हों,हम बहनों की सुरक्षा में हमेशा ढाल बनकर खड़े रहेंगे। रक्षाबंधन के इस विशेष अवसर पर आपदा प्रभावित इलाके में भाई-बहन के रिश्ते की यह अनोखी मिसाल वर्षों तक लोगों के दिलों में उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बनी रहेगी।
रक्षाबंधन पर वर्दीधारी भाइयों को मिला विश्वास का सबसे बड़ा तोहफा हर परिस्थिति में साथ का वचन
