उत्तराखंड का पहला निजी नेचर रिजर्व, जबरखेत नेचर रिजर्व 2015 में मसूरी जबरखेत में निजी वन संपदा में स्थापित किया गया था। वन संपदा के मालिक विपुल जैन और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सेजल वोरा द्वारा स्थापित इस रिजर्व का उद्देश्य यह प्रदर्शित करना था कि वन बहाली किस तरह से स्थायी पर्यटन और स्थानीय आजीविका के विकास के साथ-साथ चल सकती है।यह मॉडल बेहद सफल साबित हुआ है और इसने पर्यटन और संरक्षण के लिए राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। विपुल जैन ने बताया कि जबरखेत नेचर रिजर्व एक संपन्न प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जो रोजगार प्रदान करता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाता है, साथ ही मसूरी आने वाले आगंतुकों को एक नया और रोमांचक गंतव्य देता है। पिछले 10 सालो में 30 हजार से अधिक आगंतुकों ने मसूरी जबरखेत नेचर रिजर्व में आकर प्राकृतिक का आनंद लिया है औा वर्तमान में मसूरी के शीर्ष तीन गंतव्यों में से एक है उन्होने बताया कि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी और प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड डा. धनजय मोहन द्वारा जबरखेत नेचर रिजर्व टीम को उनके समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।
उन्होने बताया कि मसूरी जबरखेत नेचर रिजर्व अपने 10 साल पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें मसूरी के सामाजिक और राजनीति से जुड़े लोगों ने शिरकत की। डॉ. सेजल वोरा द्वारा बताए गए रिजर्व की 10 साल की यात्रा पर एक फोटो-प्रदर्शनी भी भी लगाई गई जिसको सभी मौजूद लोगो ने सहराया। स्थानीय गायक आदि मनराल द्वारा प्रकृति का जश्न मनाते हुए एक संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें सभी मौजूद श्रोताओं के मन को मोह लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पर प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड डा. धनजय मोहन ने राज्य भर में ऐसे और अधिक मॉडलों को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया और मसूरी जबरखेत नेचर रिजर्व की टीम की वन को संरक्षक करने के साथ रोजगार और पर्यटन की दृष्टि से विकसित किये जाने पर सराहना की। डॉ. धनंजय मोहन ने कहा कि सभी प्राइवेट फॉरेस्ट स्वामियों से आह्वान किया वह भी मसूरी जबरखेत नेचर रिजर्व को मॉडल के रूप में अपनाकर वनों को संरक्षित करने के साथ रोजगार के साधन उपलब्ध करे। उन्होंने संदेश दिया कि जहां भी रहो प्रकृति का ध्यान रखें, प्रकृति कहीं न कहीं उसका फल उनको देगी। मसूरी नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मीरा सकलानी ने मसूरी जबरखेत नेचर रिजर्व टीम के प्रयासों और समुदाय-आधारित दृष्टिकोण की सराहना की, और स्थायी विकास के लिए स्थानीय समुदाय की बात सुनने के महत्व पर जोर दिया।कार्यक्रम में डा0 ज्योति मारवाह द्वारा उत्पादित स्थानीय फूलों पर आधारित एक स्मारक इत्र का विमोचन भी किया गया। वन संरक्षक कहकशां नसीम और पी.के. पात्रो ने पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन के महत्व के बारे में बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मसूरी जबरखेत नेचर रिजर्व उत्तराखंड राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल प्रस्तुत कर रहा है, जहाँ हमारे पास अच्छी मात्रा में वन क्षेत्र और बहुत सारे वन्यजीव हैं जो स्थायी पर्यटन में योगदान दे सकते हैं।कार्यक्रम का समापन गणमान्य व्यक्तियों द्वारा देवदार और शाहबलूत का पौधा लगाने के साथ हुआ। इस मौके पर उत्तराखंड होटल एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप साहनी, मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन अध्यक्ष रजत अग्रवाल, मसूरी होटल एसोसिएशन अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सभासद विशाल खरोला, वुडस्टॉक स्कूल हनीफ्ल सेंटर निदेशक अक्षय शाह, स्टीव ऑल्टर, डॉ. समीर सिन्हा सहित अन्य लोग मौजूद थे।
मसूरी के जबरखेत नेचर रिजर्व ने धूमधाम के साथ मनाई 10वीं वर्षगांठ, वन संरक्षण, रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में बन रहे मॉडल
