Sunday 20/ 09/ 2026 

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उत्तराखण्ड

गीत-संगीत,संस्कृति और भक्ति से सराबोर रही बैकुण्ठ मेले की छठवीं संध्या लोकगायकों की प्रस्तुतियों पर देर रात तक झूमे दर्शक

गढ़वाल। ऐतिहासिक बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या लोकसंस्कृति,भक्ति और मनोरंजन के रंगों में डूबी रही। नगर पालिका परिसर में देर रात तक चली इस संध्या में गीत-संगीत की ऐसी अनूठी छटा बिखरी कि पूरा श्रीनगर शहर झूम उठा। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड ने बीते 25 वर्षों में अद्भुत प्रगति की है और आने वाला समय इस देवभूमि को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा करेगा। बैकुण्ठ मेला हमारी सांस्कृतिक एकता और लोक परंपराओं का सजीव प्रतीक है,जो समाज को अपनी जड़ों से जोड़ता है। मंत्री ने कहा कि ऐसे मेले न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं बल्कि सामाजिक सद्भाव और लोक संस्कृति के संरक्षण के केंद्र भी हैं। मेयर आरती भण्डारी ने कहा कि बैकुण्ठ मेला अब श्रीनगर की पहचान बन चुका है। यह हमारे पुरखों की परंपरा और हमारी नई पीढ़ी के उत्साह का संगम है। यहां स्थानीय कलाकारों की भागीदारी इस मेला संस्कृति को और समृद्ध बनाती है। इस मौके पर नगर के नागरिकों,जनप्रतिनिधियों,अधिकारियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालु दर्शकों की भारी भीड़ रही। मेले की छठवीं संध्या का असली आकर्षण प्रसिद्ध लोकगायक रोहित चौहान,कल्पना चौहान और अमित सागर की मनमोहक प्रस्तुतियां रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत रोहित चौहान ने गणेश,गंगा और शिव आरती से की,जिससे पूरा वातावरण भक्ति भाव से सरोबर हो गया। उनके लोकप्रिय गीत पहाड़ छुटी गे मांजी का आंसू देखी मेरू दिल टूटी गे,मेरी पितरों की बसाई टीरी पाणी जुगता ह्वे पर दर्शक तालियां बजाते थिरक उठे। दर्शकों की मांग पर उन्होंने गोरी मुखुड़ी सजीली नाक मां की नथुली और मेरी भनुली जांई च ब्यूटी पार्लर मां की जैसे गीतों से मंच को झंकृत कर दिया। इसके बाद मंच पर पहुंचीं प्रसिद्ध लोकगायिका कल्पना चौहान जिन्होंने अपने सुरीले स्वर में बदरीनाथ दैणु ह्वेगेई मि मंता लेकी अंयू छूं भजन से आरंभ करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने मन भरमेगी मेरू तेरी बांसुरी सूणी,मुंड मां लटुलों कू डिलू बण्यूं च और जय बदरी केदारनाथ गंगोत्री जय जय” जैसे गीतों से देवभूमि की लोकधारा को जीवंत किया। लोकगायक अमित सागर ने अपने ऊर्जावान अंदाज में चेत की चेत्वाली,महादेवा और बाघ का डेरा जैसे गीतों से दर्शकों को देर रात तक झूमने पर विवश कर दिया। मंच पर गूंजती तालियों,हूटिंग और नृत्य ने संध्या को यादगार बना दिया। सोमवार को आयोजित मांगल गायन प्रतियोगिता में पारंपरिक भक्ति और लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। कुल 11 टीमों ने भाग लेकर अपनी मधुर प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। जय मां धारी देवी मंडली ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया,जबकि राधा कृष्ण मंडली ने द्वितीय और चंद्रबदनी मंडली ने तृतीय स्थान हासिल किया। इन मांगल गीतों ने मेले के पंडाल को भक्ति और लोक परंपरा की अनोखी भावना से भर दिया। कुल मिलाकर बैकुण्ठ मेले की छठवीं संध्या भक्ति,संस्कृति और उल्लास का ऐसा संगम बनी,जो श्रीनगरवासियों के हृदय में लंबे समय तक गूंजता रहेगा।

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