Friday 08/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
मसूरी में फ्लैशलाइट और हूटर लगाकर वीआईपी रौब झाड़ना पड़ा भारी, मसूरी पुलिस ने सीज की कारमसूरी,पर्यटन सीजन के बीच मसूरी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत नियम तोड़कर वीआईपी रौब गांठने वालों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बुधवार की देर षाम को मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने लाल-नीली फ्लैशलाइट, हूटर और काले शीशों वाली एक लग्जरी कार को पकड़कर सीज कर दिया।जानकारी के अनुसार कोतवाली मसूरी पुलिस लाइब्रेरी चौक पर सघन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान कैंपटी रोड की ओर से एक काले रंग की मारुति सियाज कार ( आरजे 45-सीवी-6666) फ्लैशलाइट जलाते हुए तेज रफ्तार में मसूरी की ओर आती दिखाई दी। कार पर लाल-नीली बत्ती और हूटर लगा होने से पुलिस को संदेह हुआ, जिस पर वाहन को तुरंत रोक लिया गया।पुलिस पूछताछ में चालक ने खुद को केंद्रीय मंत्रालय का अधिकारी बताते हुए पुलिसकर्मियों पर प्रभाव बनाने की कोशिश की, लेकिन जब उससे वाहन के वैध दस्तावेज और ड्राइविंग लाइसेंस मांगा गया तो वह कोई मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। जांच में यह भी सामने आया कि चालक चप्पल पहनकर वाहन चला रहा था और कार पर अवैध काली फिल्म भी लगी हुई थी।सख्ती से पूछताछ करने पर चालक ने स्वीकार किया कि उसने जाम और टोल टैक्स से बचने तथा रास्तों में वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए वाहन पर फ्लैशलाइट और हूटर लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मौके पर ही हूटर और फ्लैशलाइट उतरवाकर वाहन को सीज कर दिया।मसूरी कोतवाल देवेन्द्र चौहान पुलिस ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर ऑपरेशन प्रहार के तहत पूरे जनपद में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने, फर्जी वीआईपी कल्चर दिखाने और कानून व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।पर्यटन सीजन में मसूरी में बढ़ते ट्रैफिक और वीआईपी कल्चर के बीच पुलिस की इस कार्रवाई को आम लोगों ने भी सराहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग लाल-नीली बत्ती और हूटर लगाकर नियमों को ताक पर रख देते हैं, जिससे आम जनता को परेशानी होती है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।मसूरी में षौच के दौरान 100 मीटर गहरी खाई में गिरा युवक, मसूरी पुलिस और फायर टीम ने रात में चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन  पर्यटन नगरी मसूरी में मंगलवार देर रात बड़ा हादसा टल गया, जब धनोल्टी रोड पर एक युवक अचानक करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। सूचना मिलते ही मसूरी पुलिस, फायर सर्विस और 108 एंबुलेंस की टीम ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर घायल युवक को सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार बुधवार की देर रात करीब 12 बजे एक व्यक्ति ने मसूरी पुलिस को सुचना दी कि वुड स्टॉक स्कूल से आगे धनोल्टी रोड पर एक व्यक्ति सड़क से नीचे खाई में गिर गया है। सूचना मिलते ही कोतवाली मसूरी पुलिस आपदा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। वहीं फायर सर्विस मसूरी और 108 एंबुलेंस की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। अंधेरी रात और दुर्गम खाई के बावजूद पुलिस और फायर कर्मियों ने रस्सियों व अन्य आपदा उपकरणों की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया और करीब 100 मीटर नीचे गिरे युवक को बाहर निकाला। घायल युवक की पहचान नरेश पुत्र हुकम सिंह निवासी सिविल रोड, रावत मेडिकल स्टोर मसूरी, उम्र 32 वर्ष के रूप में हुई। रेस्क्यू के बाद युवक को तुरंत 108 एंबुलेंस से सिविल अस्पताल मसूरी पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर गंभीर चोट होने पर पांच टांके लगाए। सूचना मिलने पर युवक के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। प्राथमिक उपचार के बाद युवक को परिजन अपने साथ घर ले गए।पुलिस जांच में सामने आया कि युवक सड़क किनारे लघुशंका करने के दौरान संतुलन बिगड़ने से खाई में गिर गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस, फायर सर्विस और 108 टीम के त्वरित रेस्क्यू अभियान की सराहना की है, जिसकी बदौलत युवक की जान बच सकी।9 करोड़ की मसूरी माल रोड बदहाल, मोती लाल नेहरू मार्ग की सडक में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क’ , पूव ्रपालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल ने पीडब्लूडी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप  पर्यटन नगरी मसूरी की बदहाल सड़कों को लेकर पूर्व पालिका अध्यक्ष ओपी उनियाल ने लोक निर्माण विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने माल रोड और मोतीलाल नेहरू मार्ग की खराब हालत को लेकर विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।पत्रकारों से वार्ता करते हुए ओपी उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के प्रयासों से करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से माल रोड का सौंदर्यीकरण और डामरीकरण कराया गया था, लेकिन विभागीय इंजीनियरों की लापरवाही के चलते आज माल रोड की हालत फिर बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होते ही करीब दो किलोमीटर लंबी माल रोड पर कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन रही है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। सड़क किनारे बनी नालियां मलबे और गंदगी से पटी पड़ी हैं, जबकि पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है।ओपी उनियाल ने मोतीलाल नेहरू मार्ग की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से हुए डामरीकरण कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि छह महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह टूट गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब यह समझना मुश्किल है कि “सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।” उन्होंने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि खराब निर्माण कार्यों से सरकार और जनप्रतिनिधियों की छवि भी प्रभावित हो रही है। पूर्व पालिका अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी देहरादून से मांग की कि माल रोड और मोतीलाल नेहरू मार्ग पर हुए निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सरकारी धन की रिकवरी की जाए।दो किश्तें बकाया होने पर फाइनेंस कंपनी पर वाहन कब्जाने का आरोप, कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन रुद्रपुर। खेड़ा निवासी युवा व्यापारी इरफान अली ने चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इरफान अली के अनुसार उन्होंने लगभग दो वर्ष पूर्व कंपनी से डिजायर कार फाइनेंस करवाई थी। पिछले दिनों उनके बेटे को स्पाइनल कॉर्ड से संबंधित गंभीर बीमारी होने के कारण उपचार में करीब 15 लाख रुपये खर्च हो गए, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई और वाहन की दो किश्तें समय पर जमा नहीं हो सकीं।आरोप है कि 3 मई को चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने हरिद्वार में वाहन को रोककर उसमें सवार यात्रियों को बीच रास्ते उतार दिया तथा गाड़ी को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद जब इरफान अली रुद्रपुर स्थित कंपनी कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से वार्ता की, तो कंपनी कर्मचारियों द्वारा दूसरी गाड़ी, जिसे कंपनी ने नहीं रोका था, उसकी भी किश्तों का हिसाब जोड़ते हुए अतिरिक्त चार्ज लगाए जाने की बात कही गई।इरफान अली का कहना है कि उन्होंने बकाया दो किश्तें जमा करने की बात कही, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया। इसके विरोध में सोमवार को चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने ढोल बजाकर कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की।मामले की गंभीरता को देखते हुए आवास विकास चौकी पुलिस एवं एलआईयू की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। पुलिस प्रशासन द्वारा चोलामंडलम कंपनी के रीजनल मैनेजर शिवराज ब्रिज से फोन पर वार्ता कराई गई, जिसमें बुधवार सुबह मामले के निस्तारण का आश्वासन दिया गया। इसके बाद धरना-प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।धरना-प्रदर्शन में मोहन खेड़ा, संजय जुनेजा, सौरभ राज बेहड़, परवेज कुरेशी, उमर अली, मोनिका ढाली, मोहम्मद अशफाक अंसारी, रणजीत सिंह राणा, अनंत बिश्नोई, मारूफ, रेहान, ताहिर, हैरी पन्नू, समप्रीत ग्रोवर, गौरव कुमार, गोविंद सिंह, सरजू सिंह सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।रीजनल पार्टी ने भाजपा को बादाम भेजकर याद दिलाया लोकायुक्त का वादाश्री जगरनाथ भक्त शिरोमणि मां कर्मा देवी की प्रदेशध्यक्ष बीना साहू ने स्कूल के बच्चों को बांटे ग्लूकोन डी के पैकेटमुख्यमंत्री की घोषणा को धरातल पर उतरने की कवायद शुरूसरकारी जमीन पर ‘अवैध मजार’ का खेल बेनकाब15 साल में नहीं बदली गांवों की तस्वीर, जनता बदलाव चाहती है: सुमेंद्र सिंह बोहरा  कांग्रेस नेता सुमेन्द्र सिंह बोहरा इन दिनों मसूरी विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे हैं। ग्राम गढ़, बुरांशखंडा, पन्याली और सरोना न्याय पंचायत क्षेत्र में पहुंचकर उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और क्षेत्र की बदहाल सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।ग्रामीणों से बातचीत के दौरान सुमेंद्र सिंह बोहरा ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और ग्रामीणों को शहर तक आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता वर्षों से सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रही है, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।उन्होंने वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेष जोषी पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों से लगातार विधानसभा जीतने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों की सड़कें आज भी बदहाल हैं, जिससे लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।बोहरा ने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी उन्हें मसूरी विधानसभा से चुनाव लड़ने का अवसर देती है और जनता का समर्थन मिलता है, तो वह अगले पांच वर्षों में क्षेत्र में सड़क निर्माण, अस्पतालों के विकास और स्कूलों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि गांवों का समग्र विकास करना है।उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र की जनता अब बदलाव चाहती है और विकास के मुद्दों पर गंभीर नेतृत्व की तलाश में है। जनसंपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा।
राज्य

डॉक्टर प्यारेलाल के प्रथम स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि व वैचारिक कार्यक्रम
स्मारिका व पुस्तक का लोकार्पण और “साम्राज्यवाद और मानसिक नियंत्रण का तंत्र” पर परिचर्चा

रुद्रपुर, 7 दिसंबर। पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉक्टर प्यारेलाल के स्मृति शेष होने की पहली वार्षिकी पर स्थानीय नगर निगम सभागार में श्रद्धांजलि व वैचारिक कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर एक ‘स्मारिका’ – एक अभूतपूर्व समय, अंधेरे का दौर और एक जनपक्षधर बुद्धिजीवी का जीवन तथा कृषि और खाद्यान्न केंद्रित लेख और अनुवाद ‘भूख और मुनाफे की नूराकुश्ती’ का लोकार्पण हुआ। साथ ही “साम्राज्यवाद और मानसिक नियंत्रण का तंत्र” विषय पर सारगर्भित परिचर्चा हुई। वरिष्ठ कवि बाली सिंह चीमा ने नज़्म प्रस्तुत किए।

इस दौरान श्रद्धांजलि देते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ. प्यारेलाल मानवीय संवेदना से लबरेज, कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार, एक प्यारे कॉमरेड थे। उनका अध्ययन अगाध, जिज्ञासा असीम और मार्क्सवादी निष्ठा अटूट थी। गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में कृषि क्षेत्र में अहम शोध किए। उनका सामाजिक परिवर्तन की जद्दोजहद से लगभग चार दशक का जुड़ाव, उनकी जिजीविषा और उनका योगदान हम सबके लिए प्रेरणास्पद है। उन्होंने महत्वपूर्ण लेखन और तमाम ज़रूरी लेखों-किताबों का अनुवाद किया। लंबी बीमारी से जूझते हुए उनका 6 दिसंबर 2024 को दुखद निधन हो गया था।

“साम्राज्यवाद और मानसिक नियंत्रण का तंत्र” विषय पर चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रोफेसर भूपेश कुमार सिंह ने कहा कि दुनिया को अपने नियंत्रण में लेने के लिए अमेरिकी साम्राज्यवाद ने तीन गतिविधियों – पूँजी निवेश का विस्तार, भारी सैन्य व्यय व विदेशी सहायता कार्यक्रम – को प्रमुख हथियार के रूप में प्रयुक्त किया। उन्होंने जनमानस को नियंत्रित करने के लिए प्रचार माध्यमों के जबर्दश्त इस्तेमाल की प्रणाली का खुलासा किया। कहा कि आज विचारों के नियंत्रण तंत्र एक जन सम्पर्क उद्योग का रूप ले चुका है जो जनता के मस्तिष्क को अपने अनुरूप ढ़ालने के लिए मनोवैज्ञानिक कौशल के बादशाह बन चुके हैं। इसके लिए शिक्षा, धर्मोपदेश, विज्ञापन, मीडिया, राजनीति आदि अनेक तरीके इस्तेमाल होते हैं। ये इतने ताकतवर व प्रभावी हैं कि व्यवस्था के शिकार अपनी दुर्दशा को स्वाभाविक और किस्मत की मार मान लेते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि पूँजीवाद मिथकों को गढ़ता है और लोगों पर प्रभुत्व स्थापित करता है। बेहद कुशलता से मिथक जनता की चेतना में धीरे-धीरे पैठा दिये जाते हैं। अधिकतर लोगों को इस बात का इल्म ही नहीं होता है कि उन्हें हेरा-फेरी का शिकार बनाया जा रहा है। इसका परिणाम होता है- व्यक्ति की निश्क्रियता।

वक्ताओं ने भारतीय समाज की मौजूद स्थिति को बताते हुए कहा कि कैसे भारत में जनविरोधी नव उदारवादी नीतियाँ लागू होने के साथ संकट गहराता गया, ज़िंदगी बेहाल होती गई और धर्म-राष्ट्रीयता, मंदिर-मस्जिद, गोरक्षा, लबजेहाद, धर्मांतरण, मॉब लिंचिंग, कश्मीर-पाकिस्तान-चीन आदि के शोर में निजीकरण-छंटनी-बंदी, विकराल रूप लेती बेरोजगारी, भयावह महँगाई जैसे असल मुद्दे गायब होते गए। जनता को गुमराह करने के नए अस्त्र विकसित हुए जो नफ़रत फैलाने में सिद्धहस्त होते गए और लंपटता व उन्माद चरम पर पहुँच गया। तमाम तरीकों से जनता को भीड़ तंत्र में बदलकर मूल मुद्दों से ही भटका दिया गया। इसके मायाजाल में उलझी जानता बढ़ती तबाही को भूलकर काल्पनिक शत्रुओं के उन्मूलन में सक्रिय हो गई।

वक्ताओं ने कहा कि यह इस दौर की वह परिघटना है, जिससे फासीवादी ताकतों ने देश-समाज के राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक हर मोर्चे पर वर्चस्व कायम किया और जन-मानस की चेतना में गहरी पैठ बनाई। जिसके चलते देश में राष्ट्रवाद के नाम पर भगवाकरण और विकास के नाम पर पूँजी की लूट की खुली छूट की राह आसान हुई। कथित हिन्दू धर्म आधारित फ़ासीवाद और कॉरपोरेट फ़ासीवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आज जनविरोधी दोनों संस्कृति ने गलबहियाँ कर लीं हैं।

परिचर्चा का समाहार करते हुए मदन पांडेय ने कहा कि आज पूँजीवाद की ताकत उसके पास उपलब्ध तकनीकी, मानसिक और सामाजिक उपकरणों के समुच्चय के रूप में है। प्यारेलाल जी अपने अंतिम समय तक इस बात से जूझ रहे थे कि क्यों साम्राज्यवादी लूट तंत्र बेलगाम है, जनता इतनी बेहाल है, फिर भी परिवर्तन का संघर्ष गतिरोध का शिकार है? इसी जद्दोजहद में वे इस सोच तक पहुंचे कि पूँजीवाद ने सांस्कृतिक वर्चस्व कायम करने का सशक्त हथियार विकसित किया है। इस दिशा में उनका सृजित साहित्य, सामाजिक सरोकार, आशावाद हमारे लिए प्रेरणास्पद है और एक शोषणमुक्त समाज बनाने के उनके स्वप्न को पूरा करने की साझी ज़िम्मेदारी हम सभी पर है।

कार्यक्रम और परिचर्चा में आदि ने भागेदरी निभाई। स्मारिका और पुस्तक पर परिचयात्मक बात मुकुल ने रखी। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर राजेश प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर गार्गी प्रकाशन और द बुक ट्री की ओर से किताबों की प्रदर्शनी भी लगी।

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