Thursday 25/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

चीन और तिब्बत में पवनपुत्र हनुमान की शक्तियों की खोज–लेखक कमल किशोर डुकलान

श्रीनगर गढ़वाल। भारतीय सनातन परंपरा में देवत्व केवल पूजा का विषय नहीं,बल्कि ज्ञान,योग और चेतना का जीवंत विज्ञान रहा है। जिन शक्तियों को आधुनिक विज्ञान आज खोज रहा है,उनके बीज हजारों वर्ष पूर्व हमारे शास्त्रों और योग परंपरा में निहित थे। पवनपुत्र हनुमान ऐसे ही दिव्य चरित्र हैं, जिनकी शक्तियां आज भी चीन और तिब्बत जैसे देशों में शोध का विषय बनी हुई हैं। हनुमान केवल आस्था के प्रतीक नहीं,बल्कि मानवीय चेतना की चरम अवस्था के उदाहरण हैं। पवनसुत,महावीर,बजरंगबली हनुमान भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में केवल एक देवता नहीं,बल्कि योग,बुद्धि,विद्या और ब्रह्मांडीय चेतना के प्रतीक माने जाते हैं। माता सीता द्वारा प्रदत्त वरदान के फलस्वरूप वे अष्ट चिरंजीवियों में स्थान पाते हैं और कलियुग में उन्हें सबसे प्रभावशाली एवं जाग्रत देवता के रूप में पूजित किया जाता है। अष्ट सिद्धियों के स्वामी हनुमान को योग साधना के माध्यम से प्राप्त अणिमा,महिमा,लघिमा,गरिमा,प्राप्ति,प्रकाम्य,ईशित्व और वशीकरण-ये आठ सिद्धियां उन्हें अद्वितीय बनाती हैं। इन सिद्धियों में लघिमा वह शक्ति है,जिसके माध्यम से शरीर को अत्यंत हल्का कर आकाश में गमन संभव होता है। महिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर ही पवनपुत्र हनुमान ने समुद्र लांघकर लंका पहुंचना,माता सीता तक प्रभु श्रीराम का संदेश देना और पुनः सकुशल लौटना जैसे अद्भुत कार्य संपन्न किए। उनके इस पराक्रम से प्रसन्न होकर माता सीता ने उन्हें अजर-अमर होने का वरदान प्रदान किया। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,अस बर दीन्ह जानकी माता। चारों जुग परताप तुम्हारा,है प्रसिद्धि जगत उजियारा॥ यह चौपाई हनुमान की योग-साधना और सिद्धियों का सार प्रस्तुत करती है। रामायण एवं रामचरितमानस में प्रयुक्त लांघना शब्द का सामान्य अर्थ छलांग लगाना नहीं है। इसका गूढ़ अर्थ है-योग-बल से एक स्थान से दूसरे स्थान तक वेगपूर्वक पहुंचना। हनुमान ने यह सामर्थ्य यम,नियम,तप,संयम और ध्यान के माध्यम से अर्जित किया था। वे शरीर और आकाश के बीच पूर्ण संतुलन साधने में सक्षम थे। शास्त्रों में हनुमान की उड़ान शक्तियों से जुड़ी पांच प्रमुख घटनाओं का उल्लेख मिलता है-बाल्यावस्था में सूर्य को फल समझकर आकाश में उड़ जाना,सीता माता की खोज में समुद्र पार कर लंका जाना और लौटना,लंका दहन जैसा विराट पराक्रम,द्रोणाचल पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण का प्राणरक्षण,पाताल लोक से राम-लक्ष्मण को अहिरावण से मुक्त कराना। जब जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया,तब उन्होंने स्थिर होकर योग-बल से समुद्र पार किया-यह दर्शाता है कि यह शक्ति आवेग नहीं,बल्कि साधना से प्राप्त चेतना थी। हनुमान की लघिमा सिद्धि का उल्लेख प्राचीन चीनी ग्रंथों में भी मिलता है,जहां इसे लेविटेशन पावर कहा गया है। यह कोई तंत्र विद्या नहीं,बल्कि ध्यान,संयम और चेतना जागरण से प्राप्त ब्रह्मांडीय शक्ति मानी जाती है। आज चीन और तिब्बत में ध्यान साधकों द्वारा शरीर को भूमि से ऊपर उठाने की क्षमता पर वैज्ञानिक शोध किए जा रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह शक्ति शरीर की भौतिक सीमाओं से परे जाकर ऊर्जा संतुलन से उत्पन्न होती है-जिसका आदर्श उदाहरण हनुमान जी हैं। हनुमान की शक्तियों को केवल पौराणिक कथाओं तक सीमित करना उचित नहीं होगा। वे योग विज्ञान,मानसिक ऊर्जा,आत्मसंयम और ब्रह्मांडीय चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। चीन और तिब्बत में हो रहा शोध इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सनातन परंपरा में निहित ज्ञान आज भी विश्व को दिशा दिखा रहा है। हनुमान का जीवन हमें यह संदेश देता है कि-यदि साधना,संयम और सेवा का मार्ग अपनाया जाए,तो असंभव भी संभव बन सकता है।

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