Sunday 08/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
प्रत्येक ब्लाॅक में लगाई जायेगी अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीन–डाॅ.धन सिंह रावतकार्मिकों के हित में संघ भवन निर्माण को लेकर तेज हुई पहल,प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापनपीएमश्री अटल उत्कृष्ट इंटर कॉलेज डांगचौरा में हुआ प्रेरक मार्गदर्शन सत्रपशुपालन विभाग की योजनाओं से गांवों में बढ़ रहा स्वरोजगारअलकनंदनी सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 31 महिलाओं को मिला सम्मान,महिला चक्रव्यूह मंचन बना आकर्षण का केंद्रनशा माफिया नाजिम के घर पर चलेगा बुल्डोजर: महापौरमहापौर विकास शर्मा ने केन्द्रीय गृह मंत्री का किया स्वागतभूतबंगला विवाद पर वर्गविशेष के लोगो को विधायक शिव अरोरा की खुली चुनौती हिन्दू परिवार उनके बीच मे एक हीं क्यों ना हो हिन्दू दीपावली – होली दम ख़म से मनाएंगे रोक सको तो रोक लोविधायक के हस्तक्षेप के बाद महिला से अभद्रता करने पुलिसकर्मी हुआ लाइन हाजिररुद्रपुर में बीएलके-मैक्स ​हॉस्पिटल की मेडिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत
राज्य

प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए रमेश मिनान को भारत सरकार ने किया चैंपियन फार्मर अवार्ड से सम्मानित


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की जैविक और प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए उत्तरकाशी जनपद के ग्राम सैंज ब्लोक भटवाड़ी निवासी प्रगतिशील किसान रमेश मिनान ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। दिनांक 17 जनवरी 2026 को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत क्षेत्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती गाजियाबाद द्वारा उन्हें चैंपियन किसान चैंपियन फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कृषि निदेशालय देहरादून उत्तराखंड में आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय संगोष्ठी के दौरान प्रदान किया गया,जिसमें प्रदेशभर से चयनित 10 उत्कृष्ट किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती में अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें उत्तरकाशी जिले से रमेश मिनान का चयन पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बना। प्राकृतिक खेती से बदली सोच,बनी मिसाल-रमेश मिनान ने रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती को न केवल अपनाया,बल्कि उसे व्यवहारिक,लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया। गो-आधारित खेती,देशी बीजों का संरक्षण,जैविक खाद,जीवामृत व प्राकृतिक कीटनाशकों के प्रयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पादन का उदाहरण प्रस्तुत किया है। सम्मान नहीं किसानों के परिश्रम की पहचान कार्यक्रम में मौजूद कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने कहा कि रमेश मिनान जैसे किसान आत्मनिर्भर भारत की खेती की असली रीढ़ हैं,जो प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर कृषि को नई दिशा दे रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उत्तरकाशी,बल्कि पूरे गढ़वाल और उत्तराखंड के किसानों का मनोबल बढ़ा है। गांव से देश तक पहचान-सम्मान प्राप्त करने के बाद रमेश मिनान ने इसे अपने गांव,क्षेत्र और सभी मेहनतकश किसानों को समर्पित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती ही आने वाले समय में किसान,मिट्टी और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करेगी। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो गांव का किसान भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान बना सकता है।

Check Also
Close