Monday 23/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलिरुद्रपुर। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहीदी दिवस के अवसर पर शहीद भगत सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान परिसर में स्थापित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल व डिग्री कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष रजत बिष्ट के नेतृत्व में दर्जनों आम नागरिकों और प्रबुद्धजनों ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारियों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता और यह पीढ़ी दर पीढ़ी देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।इस अवसर पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि आजादी के मतवालों ने हमें स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया है। शहीद भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी युवाओं ने अपने विचारों और त्याग से पूरे देश में जागरूकता पैदा की, जो आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है।कार्यक्रम में मो. असलम, हरजीत सिंह धजेल, राजवीर सिंह विर्क, रजत सिंह बिष्ट, सत्यम सिंह, हरप्रीत सिंह, शुभजीत सिंह, मनोज परिहार, गुरजिंदर सिंह, चनकीरत सिंह, पंकज पांडे, अशु कुमारी, सुमित गंगवार, सोहित शर्मा, मन्नू शर्मा सहित कई लोग उपस्थित रहे।अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शहीदों के बताए मार्ग पर चलने और देश की एकता व अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें सभी ने एक स्वर में भाग लेकर देशभक्ति का परिचय दिया।ट्रांजिट कैंप के वार्ड-10 में विकास की नई सौगातमहापौर ने किया सीसी मार्ग और नाली निर्माण का लोकार्पणशिक्षा का बदलता स्वरूप-वैदिक संस्कारों से आधुनिक तकनीक तक,समाज के आईने में शिक्षा की तस्वीरखिर्सू-बुघाणी रोड बनी जानलेवा,गड्ढों और मलबे में दम तोड़ती सड़क-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवालकैबिनेट मंत्री बनने के बाद भरत सिंह चौधरी का ऐतिहासिक स्वागत,देवप्रयाग से श्रीनगर तक उमड़ा जनसैलाब,ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से गूंजा पूरा क्षेत्रजन-जन की सरकार-4 साल बेमिसाल कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर तैयारियां तेजविधायक शिव अरोरा ने पिपलिया न. 2 क्षेत्र में विधायकनिधि से स्वीकृत राधा गोविन्द मन्दिर के सौंदर्यकरण कार्य का फीता काटकर किया लोकार्पणरूद्रपुर । ट्रांजिट कैंप क्षेत्र से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई किशोरी का दस दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं लगने पर बालिका की बरामदगी की मांग को लेकर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने परिजनों के साथ ट्रांजिट कैंप कोतवाली पहुंचकर कोतवाल से मुलाकात की और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कोतवाल को बताया कि 12 मार्च को आरती नाम की किशोरी घर से अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने अपने स्तर पर नाते-रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला। थक-हारकर परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई, परंतु दस दिन का समय गुजर जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। ठुकराल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किशोरी को एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। उन्होंने आशंका जताई कि विलंब होने पर किशोरी के साथ कोई अनहोनी हो सकती है, जिससे पीड़ित परिवार अत्यंत भयभीत और आशंकित है। मुलाकात के दौरान ठुकराल ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस की टीमें सक्रिय की जाएं और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए किशोरी को सकुशल बरामद किया जाए। वहीं, मामले में कोतवाल ने आश्वासन दिया कि पुलिस टीमें लगातार छानबीन कर रही हैं और सर्विलांस की मदद से सुराग जुटाए जा रहे हैं। इस दौरान उषा देवी, आरती, मुनेन्द्र, धर्मेन्द्र, राकेश कुमार, ललित कुमार, आदेश गंगवार, राजेश सक्सेना, संजीव गुप्ता, विक्की, बंटी, राहुल, अजय, सोनू सैनी, संजय, अमित सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।मानवता की मिसाल-नवजात की जिंदगी बचाने को आगे आए बैंक प्रबंधक
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शिक्षा का बदलता स्वरूप-वैदिक संस्कारों से आधुनिक तकनीक तक,समाज के आईने में शिक्षा की तस्वीर


श्रीनगर गढ़वाल। साहित्य समाज का दर्पण है यह कहावत केवल शब्दों तक सीमित नहीं,बल्कि शिक्षा और समाज के गहरे संबंधों को भी उजागर करती है। जिस प्रकार समाज का स्वरूप बदलता है,उसी के अनुरूप शिक्षा की दिशा और दशा भी परिवर्तित होती रहती है। यही शिक्षा आगे चलकर समाज के निर्माण की आधारशिला बनती है। राजकीय इंटर कॉलेज मरखोड़ा-खिर्सू,पौड़ी गढ़वाल के अध्यापक मनोज काला ने शिक्षा के ऐतिहासिक विकास और उसके सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का स्वरूप सदैव समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप परिवर्तित होता रहा है। वैदिक काल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं,बल्कि व्यक्ति के चरित्र,संस्कार और अनुशासन का निर्माण था। गुरुकुल प्रणाली के अंतर्गत विद्यार्थी गुरु के आश्रम में रहकर जीवनोपयोगी शिक्षा प्राप्त करते थे। वेद,उपनिषद,योग,दर्शन और युद्ध-कला जैसे विषयों का अध्ययन कराया जाता था। इस काल में गुरु-शिष्य संबंध अत्यंत पवित्र और सशक्त हुआ करता था। मध्यकाल: अस्थिरता के बीच धार्मिक शिक्षा का वर्चस्व मध्यकालीन भारत में विदेशी आक्रमणों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। इस दौर में लोगों ने अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा को प्राथमिकता दी,जिससे शिक्षा में धार्मिकता का प्रभाव बढ़ गया। हिंदुओं के लिए पाठशालाएं और मुसलमानों के लिए मदरसे स्थापित हुए,जहां संस्कृत,अरबी और फारसी भाषाओं पर विशेष जोर रहा। ब्रिटिश शासन के दौरान शिक्षा में एक बड़ा बदलाव आया। अंग्रेजों ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली की शुरुआत की,जिसमें अंग्रेजी भाषा,विज्ञान,गणित और प्रशासनिक विषयों को प्राथमिकता दी गई। हालांकि इसका उद्देश्य शासन के लिए कर्मचारी तैयार करना था,लेकिन इसी के साथ एक नए शिक्षित वर्ग का उदय भी हुआ। इसके परिणामस्वरूप भारतीय पारंपरिक शिक्षा प्रणाली कमजोर पड़ने लगी। वर्तमान दौर: तकनीक,कौशल और वैश्विक दृष्टिकोण आज की शिक्षा प्रणाली तकनीकी और व्यावसायिक दृष्टिकोण से प्रेरित है। डिजिटल शिक्षा,ऑनलाइन क्लास,स्मार्ट कक्षाएं और ई-लर्निंग जैसे आधुनिक माध्यमों ने शिक्षा को नई दिशा दी है। अब शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सरकार द्वारा शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाना,सर्व शिक्षा अभियान और मध्यान्ह भोजन योजना जैसी पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं,जिनसे शिक्षा का प्रसार समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है। मनोज काला ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में तकनीकी और कौशल आधारित ज्ञान पर अत्यधिक जोर के कारण पारंपरिक मूल्य,संस्कार और चरित्र निर्माण की भावना कहीं न कहीं कमजोर पड़ती जा रही है। इसका प्रभाव समाज में बढ़ते अपराध,नशाखोरी और उपभोक्तावाद के रूप में देखने को मिल रहा है। निष्कर्ष: संतुलित शिक्षा ही मजबूत समाज की कुंजी अंततः यह स्पष्ट है कि शिक्षा का स्वरूप वैदिक काल की आध्यात्मिकता से लेकर आधुनिक युग की वैज्ञानिकता और तकनीकी उन्नति तक निरंतर विकसित हुआ है। परंतु आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक कौशल और रोजगार आधारित शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता,संस्कार और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व दिया जाए। तभी शिक्षा अपने मूल उद्देश्य-मानव का सर्वांगीण विकास और एक स्वस्थ,सशक्त समाज का निर्माण को साकार कर सकेगी।

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