ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बना हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय 12 वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न

श्रीनगर गढ़वाल। ज्ञान,परंपरा और उपलब्धियों के अद्भुत संगम के बीच हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12 वां दीक्षांत समारोह 24 मार्च मंगलवार को भव्यता और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया,जहां एक ओर दीक्षार्थियों के चेहरों पर वर्षों की मेहनत की चमक थी,वहीं दूसरी ओर अभिभावकों और शिक्षकों की आंखों में गर्व और संतोष साफ झलक रहा था। कुलाधिपति डॉ.योगेन्द्र नारायण की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह का शुभारंभ उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 105 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए,जिनमें 50 विद्यार्थी सत्र 2022-24 और 55 विद्यार्थी सत्र 2023-25 के शामिल रहे। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में 177 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई,जबकि दोनों सत्रों को मिलाकर कुल 319 शोधार्थियों ने यह सर्वोच्च शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही 6806 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान कर विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित किया। समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्तमान कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, जिसका प्रमाण उसकी बेहतर नैक ग्रेडिंग है। उन्होंने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने के लिए नवाचार,शोध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बल देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने सांस्कृतिक वेशभूषा में दीक्षांत समारोह आयोजित करने की पहल को भारतीय परंपराओं के संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम बताया। कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने अपने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं,बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। डिग्री केवल कागज नहीं,बल्कि विद्यार्थी की असली शक्ति होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश के विकास में करने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया,जिसमें उन्होंने युवाओं से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति डॉ.योगेन्द्र नारायण ने विद्यार्थियों को अतीत की ज्ञान-परंपरा से सीख लेते हुए वर्तमान के आधुनिक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण एवं अभियंत्रिकी विभाग की शोध पत्रिका माउन्टेन रिसर्च के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। अंत में कुलसचिव अनीश उज्जमां ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आयोजन की सफलता के लिए समन्वयक प्रो.हरभजन सिंह चौहान एवं सभी समितियों को बधाई दी। इस भव्य अवसर पर श्रीनगर की महापौर आरती भण्डारी,एसएसबी के डीआईजी सुभाष चन्द्र नेगी,प्रो.रामशंकर दुबे,प्रो.मंजुला राणा,प्रो.मोहन पंवार,प्रो.एनएस पंवार सहित विश्वविद्यालय परिवार के अनेक गणमान्य सदस्य,शिक्षक,कर्मचारी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह ने न केवल विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया,बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए नई ऊर्जा,प्रेरणा और जिम्मेदारी का भी संदेश दिया-यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता रही।
