गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विद्यार्थियों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2026 को उत्साह,जागरूकता और प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया गया। स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव के लिए विषय पर आधारित इस आयोजन में विद्यार्थियों,शोधार्थियों और शिक्षकों ने जैव विविधता संरक्षण के महत्व को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान विभाग में विभिन्न जागरूकता गतिविधियों,प्रकृति अवलोकन कार्यक्रमों और वन्यजीव संरक्षण विषयक संवादों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि जैव विविधता केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं,बल्कि मानव जीवन,जलवायु संतुलन और पृथ्वी के अस्तित्व की आधारशिला है। इस अवसर पर आयोजित पक्षी अवलोकन यात्रा और बाह्य अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लगभग 50 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी माध्यमों द्वारा पक्षियों की पहचान और जैव विविधता प्रलेखन की जानकारी भी दी गई। इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने आसपास दिखाई देने वाली लगभग 55 पक्षी प्रजातियों की विस्तृत सूची तैयार की,जिससे उन्हें स्थानीय पारिस्थितिकी को समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में शिक्षकों ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण की शुरुआत अपने आसपास मौजूद जीव-जंतुओं,पक्षियों और प्राकृतिक संसाधनों को समझने से होती है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रकृति संरक्षण को मजबूत किया जाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देता है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए विभाग द्वारा स्थानीय जैव विविधता के अध्ययन,प्रलेखन और जनजागरूकता के लिए हिमालयन वाइल्ड एंड विंग्ड सोसायटी की विभागीय इकाई का गठन भी किया गया। इस मंच के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों,पक्षियों और पारिस्थितिकी संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही उन्हें वन्यजीवों के समक्ष बढ़ते खतरों,पर्यावरणीय चुनौतियों और संरक्षण उपायों की जानकारी भी दी जाएगी। जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मंजू प्रकाश गुसाईं ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती वनाग्नि की घटनाएं अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग केवल पेड़ों और वनस्पतियों को ही नष्ट नहीं करती,बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास,भोजन स्रोत और प्रजनन स्थलों को भी गहरा नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण और वनाग्नि रोकथाम को जन-जागरूकता अभियान के रूप में आगे बढ़ाएं। प्रोफेसर ओ.पी.गुसाईं ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के संरक्षण के लिए उसकी जैव विविधता और पारिस्थितिकी को समझना सबसे पहली आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय वन्यजीवों और पक्षियों के संरक्षण के बिना प्रकृति संतुलन बनाए रखना संभव नहीं है। वहीं प्रोफेसर दीपक सिंह भंडारी और प्रोफेसर आर.एस.फर्त्याल ने विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने और वन्यजीवों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में डॉ.गुंजन गोस्वामी,डॉ.गौरव भट्ट और डॉ.आनंद कुमार ने विद्यार्थियों को आधुनिक जैव विविधता प्रलेखन,पक्षी पहचान,नागरिक विज्ञान और तकनीकी माध्यमों के उपयोग द्वारा वन्यजीव संरक्षण में युवाओं की भूमिका के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज तकनीक के माध्यम से आम नागरिक भी प्रकृति संरक्षण अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शोध छात्र-छात्राओं और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा स्थानीय जैव विविधता संरक्षण,पर्यावरण जागरूकता और वन्यजीव संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि यदि युवा पीढ़ी प्रकृति के प्रति सजग और संवेदनशील बनेगी,तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण मिल सकेगा।
