महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, आजीविका उपकरणों का वितरणपेपर प्लेट मशीन, सिलाई मशीन और खाद्य प्रसंस्करण किट देकर स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास

मसूरी के पास के गांव में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जौनपुर ब्लॉक के ग्राम ढाणा में एक सराहनीय पहल की गई। इंद्र सूर्य ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न आजीविका सहायता उपकरण वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को घर बैठे आय के अवसर उपलब्ध कराना और ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में इंद्र सूर्य ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष कर्नल अनिल थापा (सेवानिवृत्त) ने महिलाओं को पेपर प्लेट निर्माण मशीनें, सिलाई मशीनें, जूस एवं अचार निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण और कच्चा माल वितरित किया। इन संसाधनों के माध्यम से महिलाएं छोटे स्तर पर अपना स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी और परिवार की आय में योगदान दे सकेंगी। कर्नल अनिल थापा ने कहा कि ग्रामीण विकास तभी संभव है जब महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर महिलाओं को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की शक्ति प्रदान करते हैं। ट्रस्ट का प्रयास है कि गांवों की महिलाओं को ऐसे संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और आत्मनिर्भर बनें। कार्यक्रम का आयोजन डीबीआर अंबेडकर जन जागृति समिति के अध्यक्ष शिब्बी भाई तथा खियर्सी वार्ड की जिला पंचायत सदस्य सबिता देवी के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में महिलाओं को केवल सहायता नहीं, बल्कि अवसरों की आवश्यकता है। यदि उन्हें सही प्रशिक्षण और संसाधन मिलें तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकती हैं। ग्रामीण महिलाओं ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मिले हुए उपकरण उनके लिए रोजगार का नया माध्यम बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी भी दी गई। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार के प्रयास गांवों में आर्थिक बदलाव लाने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
