Thursday 06/ 08/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

मां भगवती की महिमा से आलोकित हुआ सरणा गांव-देवी भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का सैलाब


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पुण्य एवं आध्यात्मिक धरा,गौलक्ष्य पर्वत तथा इंद्रगवन की पावन तलहटी में स्थित सरणा गांव इन दिनों मां आदिशक्ति की भक्ति और देवी आराधना में सराबोर है। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को धर्म,संस्कृति और अध्यात्म के रंग में रंग दिया। कथा स्थल पर मां भगवती गौरा देवी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। व्यासपीठ पर विराजमान विद्वान आचार्य पंडित प्रमोद चमोली ने अपने ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक प्रवचनों के माध्यम से देवी भागवत महापुराण के विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने सात्विक,राजस,तामस,निर्गुण एवं ज्ञानमय यज्ञों के महत्व,देवी यज्ञों के विधान तथा उनके आध्यात्मिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां भगवती की कृपा से ही जीव का कल्याण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के दौरान आचार्य ने सुदर्शन को देवी के कामबीज “क्लीं” मंत्र की प्राप्ति,भगवती के दर्शन और उनके आशीर्वाद से राज्य प्राप्ति के प्रेरणादायी प्रसंग का वर्णन किया। साथ ही नवरात्र व्रत,कुमारी पूजन एवं कन्या पूजा के महत्व को बताते हुए श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया। श्रीराम चरित्र,वसुदेव-देवकी आख्यान,नर-नारायण एवं प्रह्लाद प्रसंग तथा श्रीकृष्णावतार की संक्षिप्त कथा के माध्यम से धर्म,भक्ति और सदाचार का महत्व समझाया गया। आचार्य ने त्रिदेवों की तुलना में जगतजननी भगवती की सर्वोच्च महिमा का वर्णन करते हुए महिषासुर के जन्म,उसकी तपस्या और अंततः मां दुर्गा द्वारा उसके वध की कथा का मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव से भाव-विभोर दिखाई दिए। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य चंद्रभान सिंह बिष्ट,पूर्व प्रधान गहड़ राकेश भण्डारी,प्रधान भैसकोट सुनीता देवी नयाल, हरियाली देवी के अनन्य भक्त मुनीन्द्र ज्ञानी,वरिष्ठ समाजसेवी जयबल्लभ पंत,पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज भट्ट सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त बलोड़ी,ढिकवालगांव,धरिगांव,स्वीत,खोला,गहड़,जलेथा,हरकंडी तथा सरणा सहित आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में विद्वान आचार्य पंडित प्रमोद चमोली,आचार्य पंडित अनुसूया प्रसाद भट्ट,पंडित हरिश बहुगुणा,पंडित मुकेश नैथानी,पंडित महेन्द्र जुयाल,पंडित प्रवीण बेलवाल तथा रोशन नौटियाल सहित समस्त आचार्य मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सामाजिक समरसता,सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक जागरण के इस महायज्ञ में नवयुवक मंगल दल सरणा ने सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कथा के उपरांत सभी भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया गया तथा मां भगवती से क्षेत्र की सुख,समृद्धि,शांति और खुशहाली की कामना की गई। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के माध्यम से सरणा गांव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है,बल्कि यह आयोजन सामाजिक एकता,सांस्कृतिक संरक्षण और सनातन मूल्यों के संवर्धन का भी सशक्त माध्यम बनकर क्षेत्र में नई आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रहा है।

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