Wednesday 23/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
जिला विधिक सेवा प्राधिकारण उद्यम सिंह नगर माननीय सचिव ममता पंत, के आदेशानुसार आदेश संख्या-56/2026-27 के तत्वावधान पर, एक संयुक्त कैंप का आयोजन रामस्वरूप भगत उच्चतर मध्यमिक विद्यालय मुडे़ली प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में किया गया मंच का संचालन पैरालीगल वॉलीन्टर गीता शर्मा द्वारा छात्र-छात्राओं को विधिक नीशुल्क सुविधाओं की जानकारी दी गई और विमला मुडे़ली के, द्वारा,छात्र-छात्राओं को अन्य जानकारीयो से जागरूक किया गया विषय- नालसा और सालसा, की वीभिन्न योजनाओं और अपराधों के लिए, न्यूनातम मुआवजा राशि के प्रावधान हैं जैसे,एसिड अटैक, मानव तस्कारी,समूहिक बलात्कार, मानव तस्कारी, नाबालिक बच्चों का यौन उत्पीड़न, घरेलु हिंसा साइबर क्राइम, सड़क सुरक्षा के नियमों और हेल्पलाइन नंबर 112 की जानकारी दी गई और साथ ही बताया सिविल कोर्ट खटीमा में हर 3 महीने बाद राष्ट्रीय लोक अदालत, का आयोजन किया जाता हैं, जिला विधिक सेवा प्राधिकारण उधम सिंह नगर में स्थाई लोक अदालत है जो राविवर सेकंड सैटरडे को बंद रहती है ,इसे परमानेट लोक अदालत मैं अन्य केसों का निसतारण कर फैसला करा दिया जाता हैं,, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर – 1098 छात्र छात्राओं को बताकर विधिक नीशुल्क सुविधाओं ग्रामीण विधिक सेवा सहायता केंद्रों की जानकारी देकर नालसा टोल न०-15100 इतयादि की विधिक, सुविधाओं की जानकारी से छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया पैरालीगल बाॅलियंटर, की उपस्थिति संख्या-टीम नंबर -36 से गीता शर्मा टीम नंबर- 41 से विमला मुडेला , माया देवी, ठगो देवी प्रभु दयाल, विधिक शिविर कैंप में उपस्थित रहे ।सितारगंज रामलीला कमेटी के पदाधिकारीयों ने उठाया ध्वज पताका पूरे विधि विधान से किया गया पूजन🔶 नगर पालिका निर्वाचन (किच्छा एवं सिरौलीकलां) को लेकर एसएसपी अजय गणपति ने किया स्ट्रांग रूम का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा।उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने आज सितारगंज स्वास्थ्य केंद्र में साप्ताहिक हड़ताल के तहत धरना किया और आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने सहित कई मांगों उठाई इस दौरान यूनियन की जिला उपसचिव अनिता अन्ना ने कहा कि भाजपा सरकार आशाओं के श्रम का लगातार शोषण कर रही है. उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशाओं को न तो राज्य कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है और ना ही सरकार द्वारा लागू न्यूनतम वेतन मिलता है। जो कि बिल्कुल अनुचित और अन्यायपूर्ण है। लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि आशाओं को स्वास्थ्य विभाग व बाहरी विभाग के भी कई कमीशन आधारित काम सौंप दिए जाते हैं। उस पर भी जब एकमुश्त राशि बनती है तो कई जगह विभाग के अधिकारी कमीशन मांग लेते हैं उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन एक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ऐक्टू के नेतृत्व में 22 नवंबर को देहरादून कूच करेंगे और अपने हक अधिकार की मांग को बुलंद करेंगे। प्रदेश की हजारों आशा वर्कर्स इस आंदोलन में भाग लेंगी ब्लॉक महामंत्री शर्मिन सिद्दकी ने कहा कि हमारी मांग है कि 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए वायदे को पूरा सरकार पूरा करे, आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दे, न्यूतम वेतन लागू करे, सेवानिवृत्ति के बाद अनिवार्य पेंशन लागू करे, आशाओं के श्रम की राशि का भुगतान हर माह करे, ट्रेनिंग व पल्स पोलियो अभियान की राशि 500 रुपए प्रतिदिन करे, आशाओं के साथ विभागीय अधिकारियों का सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की गारंटी हो, हर अस्पताल में आशा घर का निर्माण करने व अस्पतालों में डॉक्टर व स्टाफ की कमी को दूर किया जाए, मनमाने तरीके से आशाओं की छटनी रोकने की है धरने में जिला उप सचिव अनीता अन्ना, ब्लॉक महामंत्री शर्मिन सिद्दकी, भावना बिष्ट, यशोदा देवी मोहनी, इंद्रावती, हेमंती नेगी, खुशनुमा , पूनम शर्मा, अनीता बोरा, ममता शर्मा, संगीता, प्रेमा देवी, फूलादेवी, मंजीत कौर, रहीमा, शबनम, कुलदीप कौर, मीना देवी,अंगूरी देवी, सफ़ीना, भागीरथी, रबीना, देवी, मोबिना, कंचन गुप्ता, पुष्पा देवी, मंजीत, निर्वेश कुमारी,मीना,विजेता देवी, सीता देवी, दुर्गा देवी, सबीना, रीना देवी, लीलावती, कमला देवी, सरोजनी, ज्योति, सच्ची, सरिता, मीना देवी, विमला कौर, विजयवती, निर्मला देवी, व अन्य आशाएं शामिल थी।राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण समिति की बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई सम्पन्नआज मजदूर सत्याग्रह का सातवां (7)दिन है ऐरा श्रमिक संगठन के महिला मजदूरों और बच्चों सहित सत्याग्रह पर कम्पनी गेट पर उपस्थित है कंपनी प्रबंधन 16 तारीख से हमें कंपनी गेट से हटाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं लेकिन वह किसी भी तरह सफल नहीं हो पा रहे हैं इस प्रयास में कंपनी प्रबंध के आज रुद्रपुर सिविल कोर्ट में प्रस्तुत हुए और सिविल कोर्ट द्वारा अगली डेट 15 अक्टूबर को दे दी गई16 सितंबर को अपेक्स बिल्डर लिमिटेड कम्पनी में हुई वार्ता को लेकर AlC महोदय जी द्वारा दिया गया आश्वासन की 28 सितम्बर को जिला प्रशासन में वार्ता होगी लेकिन आज तक कोई भी सूचना लिखित में नहीं दिया गया इसको लेकर आज ऐरा श्रमिक संगठन के मजदूर ALC महोदय रुद्रपुर से मिलने गये लिकिन ALC महोदय किच्छा होने की सूचना दी गई 17 सितंबर से लगातार ALC महोदय रुद्रपुर से मिलने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मिलना मुश्किल हो रहा हैयह कि जिला प्रशासन को यह भलीभांति विदित है की एन सी एल टी की दिल्ली शाखा के निर्देशन में अपेक्स बिल्डसिस लिमिटेड, सेक्टर -09,सिडकुल पंतनगर की नीलामी प्रक्रिया सम्पन्न हुई। जिसके तहत कम्पनी के स्वामित्व और प्रबंधन को समस्त श्रमिकों और कर्मचारियों सहित जसमृत डिजाइनर को हस्तगत किया गया।जिससे पूर्ण सहमति ब्यक्त करते हुए जसमृत डिजाइनर के स्वामी द्वारा एन सी एल के समक्ष लिखित हलफनामा / शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए उक्त नीलामी प्रक्रिया में वर्णित सभी शर्तों को स्वीकार करने की प्रतिबद्धता ब्यक्त करते हुए उक्त कारखाने के स्वामित्व और प्रबंधन को ग्रहण किया।किन्तु श्रमिकों की आज तक कार्यबहाली नहीं की गईं है। जिसके पश्चात् प्रार्थी यूनियन द्वारा एन सी एल टी की उच्च शाखा एन सी एल ए टी में रिट / याचिका दायर की। जिस पर एन सी एल ए टी द्वारा स्पष्ट आदेश दिया गया कि एन सी एल ए टी के तहत हुई नीलामी प्रक्रिया में वर्णित सभी शर्ते सभी पक्षों पर बाध्यकारी होंगे। इसके पश्चात् भी कम्पनी प्रबंधन द्वारा कारखाने के 102 स्थाई श्रमिकों की आज तिथि तक भी कार्यबहाली नहीं की गईं है। जो कि उक्त नीलामी प्रक्रिया में वर्णित शर्तों, उक्त के क्रम में एन सी एल टी की डबल बैंच यानि एन सी एल ए टी के उक्त आदेशों का और उक्त के क्रम में नये मालिक द्वारा एन सी एल टी के समक्ष प्रस्तुत अपने ही उक्त हलफनामे /शपथपत्र का घोर उल्लंघन है। घोर छल कपट है।जिससे उक्त 102 श्रमिकों और उनके परिवारों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।शिक्षक भविष्य निर्माता होता है – डॉ स्वामी चंद्रामसूरी शरदोत्सव का न्योता लेकर सीएम धामी से मिले गणेश जोशी और मीरा सकलानीलंबे अंतराल बाद लौट रहा मसूरी का ऐतिहासिक शरदोत्सव, मुख्यमंत्री नेहै आयोजन में पहुंचने का दिया भरोसा पहाड़ों की रानी मसूरी में लंबे समय बाद होने जा रहे ऐतिहासिक शरदोत्सव 2026 को लेकर शहर में उत्साह बढ़ने लगा है। शरदोत्सव को भव्य रूप देने की तैयारियों के बीच कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और नगर पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें शरदोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए आयोजन में पहुंचने का भरोसा दिया। शरदोत्सव को मसूरी की पुरानी सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। लंबे समय से बंद पड़े इस आयोजन की दोबारा शुरुआत से स्थानीय कलाकारों, युवाओं, व्यापारियों और नागरिकों में उत्साह है। आयोजन के माध्यम से मसूरी की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय कला और प्रतिभाओं को मंच देने की तैयारी की जा रही है।मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा मसूरी मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने मसूरी क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और विकास कार्यों से भी उन्हें अवगत कराया। उन्होंने सड़क, पेयजल, पर्यटन विकास, रोजगार और युवाओं से जुड़े विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। हालांकि मुलाकात का प्रमुख केंद्र शरदोत्सव रहा और मुख्यमंत्री को आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। शरदोत्सव के आयोजन को लेकर शहर में विभिन्न समितियों के गठन और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ स्थानीय कलाकारों और अन्य प्रतिभाओं को अवसर देने की तैयारी है। इससे मसूरी के पर्यटन सीजन में भी नई गतिविधियां जुड़ने की उम्मीद है। मुलाकात में सभासद कुशाल सिंह राणा, जसबीर कौर, प्रदेश संस्कृति प्रकोष्ठ संयोजक राजेंद्र रावत, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन समेत अन्य लोग मौजूद रहे।मसूरी में रेलवे की जमीन पर कब्जे को लेकर मसूरी झड़ीपानी में कार्रवाई, 31 मकानों पर नोटिस चस्पा संपदा अधिकारी के बेदखली आदेश के बाद उत्तर रेलवे की टीम पहुंची, भारी पुलिस बल रहा तैनात झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर उत्तर रेलवे ने कार्रवाई तेज कर दी है। संपदा अधिकारी की अदालत से बेदखली आदेश जारी होने के बाद सोमवार को उत्तर रेलवे के अधिकारियों की टीम भारी पुलिस बल के साथ झड़ीपानी पहुंची। टीम ने रेलवे की भूमि पर बने 31 मकानों पर नोटिस चस्पा किए। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी तरह के विरोध की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।उत्तर रेलवे की ओर से जारी संपदा अधिकारी के आदेश के अनुसार झड़ीपानी स्थित ओक ग्रोव स्कूल के समीप रेलवे की करीब 100 वर्ग मीटर भूमि पर जगमोहन उर्फ सांझ कैफे पुत्र दर्शन लाल द्वारा अनधिकृत कब्जा किए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी।रेलवे अधिकारियों के अनुसार संपदा अधिकारी की अदालत ने पूरे मामले में रेलवे की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और पक्ष को देखने के बाद कब्जे को अनधिकृत माना है। आदेश में प्रतिवादी को 15 दिन के भीतर रेलवे की भूमि से कब्जा हटाकर रेलवे को भूमि सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में रेलवे प्रशासन को नियमानुसार बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करने तथा कार्रवाई में आने वाला खर्च वसूल करने का अधिकार भी दिया गया है।रेलवे ने तीन पुराने विक्रय अभिलेखों का दिया हवालारेलवे की ओर से संपदा अधिकारी की अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि संबंधित भूमि रेलवे की है और इसके समर्थन में रेलवे के पास पुराने विक्रय अभिलेख मौजूद हैं। रेलवे ने अपने जवाब में 21 अप्रैल 1886, 28 दिसंबर 1895 तथा वर्ष 1920-21 के अभिलेखों का हवाला देते हुए भूमि पर रेलवे का अधिकार बताया है। रेलवे का कहना है कि इन दस्तावेजों से संबंधित प्रतियां भी वाद पत्रावली में प्रस्तुत की गई हैं।रेलवे अधिकारियों ने प्रतिवादी के उस दावे को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें भूमि को निजी संपत्ति बताया गया था। रेलवे के अनुसार प्रतिवादी की ओर से भूमि के स्वामित्व को प्रमाणित करने वाला ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे संबंधित 100 वर्ग मीटर भूमि पर उसका मालिकाना हक साबित हो सके।हाई कोर्ट के आदेश का भी दिया हवालामामले में प्रतिवादी की ओर से वर्ष 1940 के सीमांकन, राजस्व विभाग की रिपोर्ट और उत्तराखंड हाई कोर्ट में दाखिल रिट याचिकाओं का हवाला दिया गया था। प्रतिवादी ने दावा किया था कि राजस्व विभाग की सीमांकन कार्रवाई में संबंधित भूमि रेलवे की नहीं पाई गई। वहीं रेलवे ने संपदा अधिकारी की कार्यवाही में कहा कि हाई कोर्ट ने पूर्व में रेलवे की नोटिस संबंधी कार्यवाही को प्रक्रिया संबंधी आधार पर निरस्त किया था, लेकिन रेलवे को कानून के अनुसार कार्रवाई करने से नहीं रोका गया था। इसी आधार पर रेलवे ने संपदा अधिकारी के समक्ष नए सिरे से कार्रवाई की।पुलिस बल की मौजूदगी में चस्पा हुए नोटिससोमवार को उत्तर रेलवे के अधिकारियों और रेलवे पुलिस की टीम झड़ीपानी पहुंची। कार्रवाई को देखते हुए मसूरी पुलिस की ओर से भी भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। मसूरी कोतवाल नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाली।आषु षर्मा सिनियर सेक्षन इंजीनियर रेलवे देहरादून ने बताया कि नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई संपदा अधिकारी के आदेश के अनुपालन में की गई है। अधिकारियों के मुताबिक आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।इस कार्रवाई के बाद झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे और स्थानीय लोगों के बीच जमीन के स्वामित्व और सीमांकन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वही स्थानीय लोगों ने कहा वह कई दशकों से यहां पर रह रह है और उनके द्वारा भूमि को खरीद कर मकान बनाया है वह नगर पालिका परिषद में भी दाखिल खारिज हो रखा हे ऐसे में रेलवे के अधिकारी आये दिन रेलवे की संपत्ति बताकर उनके मकानों में नोटिस लगा रहे है जिससे उनका मानसिक उत्पीड़न भी हा रहा है उन्होंने कहा कि उनके द्वारा रेलवे बोर्ड से उनकी सम्पति के कागजात दिखाने को कहा गया वह रेलवे के अधिकारी कागज नहीं दिखा रहे है। उन्होंने कहा वह सक्षम न्यायालय में पूरे मामले को लेकर जायेगे। इस मौके पर मसूरी कोतवाल नरेन्द्र सिंह, एसएसआई सतेन्द्र भाटी सहित भारी पुलिस फोर्स मौजूद था।प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर करनपुर में जलाए हजारों दीप, हलवा प्रसाद का हुआ वितरण
राज्य

आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल बेशर्त लागू करो!

महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने की गैर–संवैधानिक राजनीति नहीं चलेगी!

आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को बेशर्त लागू करने व अन्य मांगो को लेकर आज अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ( ऐपवा) द्वारा एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी में विचार रखते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने कहा कि भाजपा सरकार देश में अघोषित आपातकाल को घोषित करने के लिए हर रास्ता अपना रही है। इस देश में फासीवादी तानाशाही को क्रूर रूप में लादने के लिए भाजपा सरकार हर तरह की गैर–संवैधानिक कोशिशों में लगी हुई है। परिसीमन विधेयक इसी कोशिश का हिस्सा है। जो पिछले संसद सत्र में भाजपा के पास बहुमत ना होने के कारण गिर गया। दरअसल भाजपा सरकार 2023 में लाए गए महिला आरक्षण बिल को लागू नहीं करना चाहती है। सरकार आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ना चाहती है और परिसीमन का आधार जनसंख्या को बनाकर परिसीमन करना चाहती है। इससे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कम होगा और कई राज्यों के साथ भेदभाव होगा। इसलिए हमारी मांग है कि 2023 में लाए गए महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू किया जाए तथा महिला आरक्षण बिल को परिसीमन एवं जनगणना से जोड़कर पेश करने की कोशिश न की जाए. बल्कि, इसे बेशर्त लागू किया जाए। इस मॉनसून सत्र से 33% महिला आरक्षण केंद्र एवं राज्य स्तर पर वर्तमान लोकसभा एवं राज्य सभा सीटों पर लागू किया जाए.

उन्होंने कहा कि परिसीमन का मुद्दा केवल दक्षिण भारत का नहीं बल्कि उत्तराखंड में भी असमानता को जन्म दे रहा है। इससे पहाड़ी इलाकों में सीटों का प्रतिनिधि खतरनाक स्तर तक गिर जाएगा। भाजपा सरकार महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़कर पूरे देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना चाहती है। असम और जम्मू कश्मीर के चुनाव इसके हालिया उदाहरण है।

ऐपवा की प्रदेश संयोजक शिवानी पांडे ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में लंबे संघर्ष के बाद सीबीआई जांच को स्वीकार किया गया। परन्तु अभी 6 माह बीत जाने पर भी सीबीआई जांच बिल्कुल भी आगे नहीं बढ़ सकी है। इसके विपरीत भाजपा के जो वी आई पी नेता कटघरे में थे उन्हें भाजपा में और बड़ा पद देकर उन्हें पुरस्कृत किया गया है। भाजपा के अंदर बलात्कारियों व महिला के यौन उत्पीड़न के आरोपियों को पुरस्कृत करने की लंबी पुरानी परंपरा है। ऐसे में भाजपा सरकार से महिला अपराधों में न्याय और आरक्षण की मांग के प्रति उम्मीद धुंधली नजर आती है।

बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की सदस्य अमनदीप कौर ने कहा कि बड़े ही दुख का विषय है इस देश की आधी आबादी के लिए बने तमाम कानूनों, आयोगों, कमेटियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ना के बराबर है। हाल ही में सेनेट्री पैड पर टैक्स लगाने के लिए बनी कमेटी में महिलाओ का प्रतिनिधित्व नहीं है। प्रतिनिधित्व होता तो उस कमेटी को महिलाएं समझा पाती कि सेनेटरी पैड जरूरी सामग्री है वह लग्जरी सामग्री नहीं है जिस पर टैक्स लगाया जाए।
यही हाल महिलाओं की शादी की उम्र पुनर्निर्धारण करने वाली कमेटी का भी था। इसलिए हर जगह महिलाओं को आरक्षण की अत्यंत आवश्यकता है।

आम आदमी पार्टी की नेता किरन पांडे ने कहा भाजपा सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था लेकिन भाजपा शासित राज्यों में महिला उत्पीड़न के मामलों में लगातार वृद्धि दिख रही है। कई मामलों में तो भाजपा के नेता ही आरोपी पाये जा रहे हैं।

उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने सरकारी विभागों में काम करने वाली महिला स्कीम वर्कर्स और फैक्ट्रियों में काम करने वाली महिलाओं के आर्थिक शोषण पर बात रखते हुए कहा कि सरकार अपने ही विभागों में काम करने वाली आशा, आंगनबाड़ी, भोजनमाता की मेहनत का शोषण कर रही है। विभाग के हर काम इन महिलाओं के ऊपर लाद दिये जाते हैं परन्तु उन्हें प्रदेश में लागू न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जाता है। आशा कार्यकर्तियों की हालत तो यह है कि वे दिन रात गर्भवती महिलाओं की देखभाल करते हुए अपनी सुरक्षा को खतरे में डालती हैं। दिन रात काम करके उन्होंने मातृ-शिशु दर में अभूतपूर्व कमी करने का साहसिक काम किया है। इसके बावजूद न तो उनकी मेहनत का कोई सम्मान है ना ही उन्हें कोई सम्मानजनक वेतन दिया जाता है। फैक्ट्रियों में काम करने वाली महिलाओं को पुरुषों से भी कम वेतन दिया जाता है। इस सब के बावजूद सरकार अपने आपको किस मुंह से महिला हितैषी बताती है।

गोष्ठी में प्रस्ताव लिया गया कि 20 जुलाई को सभी जगह से महिला आरक्षण बिल 2023 को लागू करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया जाए।

गोष्ठी में प्रीति मौर्य, नमिता सरकार, माधवी देवी, पवनदीप कौर, अनिता अन्ना, पुष्पा देवी, ज्योति चंद, श्रीशा, पायल मौर्य, ऐक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरादिनेश तिवारी, रंजन विश्वास , ललित मटियाली, ज्ञानी सुरेन सिंह, धीरज कुमार, मनीष कुमार सहित कई लोग मौजूद थे।

अमनदीप कौर
9997919105

Check Also
Close