Wednesday 18/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
मिलावटखोरों के विरूद्ध प्रदेशभर में चलेगा विशेष अभियान–डाॅ.धन सिंह रावतविधिक सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्राविधिक स्वयंसेवकों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजितएलपीजी आपूर्ति व्यवस्था पर सख्ती,जनपद में 60 प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षणआपदा से पहले तैयारी पुख्ता,जनपद में बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल सफलअवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 14 स्टोन क्रेशर सील, 10 करोड़ से अधिक के जुर्माने की तैयारी रुद्रपुर/लक्सर, 17 मार्च। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लक्सर व हरिद्वार क्षेत्र में 14 स्टोन क्रेशरों को सील कर दिया है। यह कार्रवाई भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, देहरादून के निर्देशन में गठित प्रवर्तन दल द्वारा की गई।जानकारी के अनुसार, निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म के निर्देश पर प्रवर्तन टीम ने तहसील लक्सर के विभिन्न गांवों—बाड़ीटीप, मेहतौली, मुजफ्फरपुर गुर्जर और जबरदस्तपुर (ईंट भट्ठा क्षेत्र) में स्थित स्टोन क्रेशरों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई क्रेशर बिना वैध अनुमति के संचालित पाए गए।इन सभी 14 स्टोन क्रेशरों को एमएमडीआर एक्ट, 1957 की धारा 23सी तथा उत्तराखंड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली, 2021 के तहत मौके पर ही सील कर दिया गया।प्रशासन ने बताया कि संबंधित स्टोन क्रेशरों पर प्रथम दृष्टया 10 करोड़ रुपये से अधिक का अर्थदंड निर्धारित किया जा रहा है, जिसकी वसूली की प्रक्रिया अलग से की जाएगी।इन स्टोन क्रेशरों पर हुई कार्रवाई:हाईवे कंस्ट्रक्शन एंड क्रेशर, मोहित स्टोन क्रेशर, किसान स्टोन क्रेशर, राहुल स्टोन क्रेशर, रईस स्टोन क्रेशर, तुलसी स्टोन क्रेशर, संगम एसोसिएट्स, हिमालय इंटरप्राइजेज, नूर स्टोन क्रेशर, गणपति स्टोन क्रेशर, दीपांशु स्टोन क्रेशर, मां गंगा स्टोन क्रेशर, अल्कनंदा स्टोन क्रेशर व एनएसए स्टोन क्रेशर शामिल हैं।कार्रवाई के दौरान मौजूद अधिकारी:प्रवर्तन दल में उप निदेशक, खान अधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी, मानचित्रकार, सर्वेक्षक और सहायक खनन प्रबंधक सहित भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।जखोली में शौर्य और श्रद्धा का प्रतीक बना शहीद नरेन्द्र सिंह नेगी स्मृति द्वार,पूरे क्षेत्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलिगढ़वाल विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक-शैक्षणिक प्रतिभाओं का महाकुंभ शुरू,अंतर-संकाय प्रतियोगिताओं का भव्य शुभारंभसोशल मीडिया पर विधायक विनोद कंडारी के खिलाफ दुष्प्रचार पर भाजपा का प्रहार,कीर्तिनगर थाने में दर्ज कराई शिकायतएसएसपी अजय गणपति के निर्देशन में नशा तस्करों पर कार्यवाही लगातार जारी।सितारगंज के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय थारू बघोरी में आज एक सराहनीय सामाजिक पहल देखने को मिली,

मसूरी में धूमधाम के साथ मनाई गई इंद्रमणि बडोनी की 100वी जयंती


पहाड़ों की रानी मसूरी में उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी जी की जयंती को धूमधाम के साथ मनाया गया इस मौके पर मसूरी माल रोड पर सांस्कृतिक यात्रा निकल गई और शहीद स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए सरकार से बड़े स्तर पर उत्तराखंड के गांधी इंद्रमणि बडोनी जी की जी की जयंती मनाई जाने की अपील की गई। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी नेता और पहाड़ के गांधी के नाम से प्रसिद्ध स्व. इंद्रमणि बडोनी की 100 बी जयंती मसूरी के बडोनी चौक पर बनाई गई. मसूरी इंद्रमणि विचार मंच के पदाधिकारियों ने उत्तराखंड के गांधी बडोनी के जीवन परिचय और राज्य आंदोलन में उनकी भूमिका पर के बारे में विस्तार से बताया. इस मौके पर इन्द्रमणि मणि बडोनी विचार मंच के महासचिव प्रदीप भंडारी ने कहा कि अब सरकार पहाड़ के गांधी और उनके विचारों को भूलने लगी है. उनकी जयंती पर सरकार द्वारा कोई भी बडा कार्यक्रम आयोजित नही किया गया जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होने कहा कि बडोनी जी 100 बवी जयंती पर सरकार द्वारा कोई विज्ञापन भी जारी नही किया गया।
इन्द्रमणि मणि बडोनी विचार मंच के अध्यक्ष पूरन जुयाल और राज्य आंदोलनकारी जयप्रकाष उत्तराखंडी ने कहा कि पहाड़ के गांधी की प्रतिमा उत्तराखंड विधानसभा, सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास और समस्त सरकारी कार्यालयों में स्थापित होनी चाहिए. वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के इस सच्चे सपूत ने 72 वर्ष की उम्र में 1994 में राज्य निर्माण की निर्णायक लड़ाई लड़ी और आज उनके की देन है कि उत्तरखण्ड राज्य का निर्माण हो सका. अपने अंतिम समय इलाज कराते हुए भी बडोनी जी हमेशा उत्तराखंड की बात करते थे. उन्होने कहा कि 18 अगस्त 1999 को उत्तराखंड का यह सपूत हमेशा के लिये सो गया था. उन्होंने बताया कि वन अधिनियम के विरोध में उन्होंने आन्दोलन का नेतृत्व किया और पेड़ों के कारण रुके पड़े विकास कार्यों को खुद पेड़ काट कर हरी झंडी दी थी. वहीं, 1988 में तवाघाट से देहरादून तक की उन्होंने 105 दिनों की पैदल जन संपर्क यात्रा भी थी थी। इस मौके पर ओपी उनियाल,प्रदीप भंडारी, जय प्रकाश उत्तराखंडी, मीरा सकलानी,गंभीर पंवार,महेश चंद्र,दर्शन रावत, पूरण जुयाल, आर पी बडोनी,खुर्शीद अहमद, उमेश नौटियाल, के. डी नौटियाल, श्रीपति आदि मौजूद थे।