Wednesday 18/ 03/ 2026 

Bharat Najariya
राज्य

सनातन दर्शन की नई व्याख्या: “सृष्टिदर्शन” ने जगाई वैचारिक चेतना

गुरुग्राम में गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी के प्रथम ग्रंथ का भव्य विमोचन, देशभर के साहित्यकार हुए साक्षी।

गुरुग्राम की पावन धरती पर आयोजित “सचेतना तृतीय वार्षिकोत्सव- सनातन साहित्य सम्मान एवं समागम” के ऐतिहासिक अवसर पर साहित्यिक सचेतना मंच के संस्थापक एवं मार्गदर्शक गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी द्वारा रचित प्रथम ग्रंथ “सृष्टिदर्शन” का अत्यंत भव्य एवं गरिमामय विमोचन संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से पधारे साहित्यकारों, चिंतकों, विद्वानों एवं सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित सैकड़ों लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

“सृष्टिदर्शन” एक साधारण पुस्तक नहीं, बल्कि सनातन सत्य, अद्वैत दर्शन और चेतना-विज्ञान का एक युगदर्शी दार्शनिक ग्रंथ है, जो प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मध्य एक सशक्त सेतु स्थापित करता है। यह कृति वेद, उपनिषद और गीता के आधार पर सृष्टि, आत्मा, चेतना और मानव जीवन के गूढ़तम रहस्यों को सरल एवं तार्किक शैली में उद्घाटित करती है।

इस ग्रंथ में विशेष रूप से “ॐ तत् सत्” के वैदिक रहस्य को केंद्र में रखते हुए परमात्मा द्वारा सृजित सृष्टि के चार आयाम- आत्मा, प्राण, प्रकृति और पदार्थ, तथा मानव जीवन के चार पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का गहन विश्लेषण किया गया है। साथ ही यह कृति यह भी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार सनातन सिद्धांत आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वित होकर मानव जीवन को संतुलित और जागरूक बना सकते हैं।

अपने उद्बोधन में गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी ने कहा कि यह ग्रंथ केवल ज्ञान का संकलन नहीं, बल्कि मानव चेतना के जागरण, विवेक के विकास और सत्य की अनुभूति की दिशा में एक वैचारिक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि सनातन दर्शन का सार व्यक्ति को स्वयं से जोड़ना और उसे समग्र अस्तित्व से एकत्व का अनुभव कराना है।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों और साहित्यकारों ने “सृष्टिदर्शन” को समकालीन समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक, प्रेरणादायक और मार्गदर्शक कृति बताते हुए इसकी मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने इसे आने वाले समय में वैचारिक जागरण का आधार स्तंभ बताया।

यह महत्वपूर्ण ग्रंथ अब वैश्विक पाठकों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Amazon पर उपलब्ध है, जिससे इसे देश-विदेश में सहज रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

ग्रन्थ लिंक (Amazon): https://amzn.in/d/01AY8lb1

पाठकों से विनम्र आग्रह है कि ग्रन्थ का अध्ययन करने के उपरांत अमेज़ॉन पर अपनी मूल्यवान समीक्षा (Review) अवश्य साझा करें, ताकि यह वैचारिक कृति अधिकाधिक पाठकों तक पहुँचे और सनातन साहित्य-दर्शन के इस महत्त्वपूर्ण प्रयास को आपकी प्रेरणा प्राप्त हो सके।

Check Also
Close