Tuesday 26/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

पूर्णिमा के अवसर पर रुद्रपुर में बाबा उमाकांत जी महाराज का सन्देश युद्ध, विनाश और जागरूकता का आह्वान

जयगुरुदेव नाम का जाप: मुसीबतों से रक्षा का सरल उपाय

रुद्रपुर, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) में पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सत्संग में बाबा उमाकांत जी महाराज ने वर्तमान समय को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब युद्ध रुकने वाला नहीं है। पहले बहुत समझाया गया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब समझाने का समय निकल चुका है—चाहे लोग सुनें या न सुनें, विनाश अवश्य होगा।
उन्होंने संकेत दिया कि शक्तियां सक्रिय हो चुकी हैं और विश्व परिस्थितियाँ ऐसे मोड़ पर पहुँच गई हैं जहाँ संघर्ष और बढ़ेगा। जैसे गाड़ी का गियर फँस जाता है, वैसे ही विश्व युद्ध की दिशा में फँस चुका है।
बाबा जी ने कहा कि जब संत मौन हो जाते हैं, तब काल अपना कार्य आरंभ कर देता है। आने वाले समय में प्रकृति के परिवर्तन और विनाश के संकेत स्पष्ट दिखाई देंगे।
उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि यदि वे लोगों को समझाने में सफल हो जाएँ, तो बड़ा परिवर्तन संभव है और अनेक लोगों की जान बच सकती है।
सुलह-समझौता ही समाधान है
बाबा जी ने कहा कि जो कार्य प्रेम और समझौते से हो सकता है, वह लड़ाई-झगड़े से कभी नहीं हो सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे त्रेता और द्वापर युग में भारी विनाश हुआ, वैसे ही कलयुग के अंत में भी व्यापक जनहानि होगी।
आज दुनिया में बमबारी, मिसाइल और परमाणु हथियारों की तैयारी चल रही है—ये सभी मानव द्वारा बनाए गए साधन ही मानव के विनाश का कारण बनेंगे।
उन्होंने विश्व नेताओं से अपील की कि हथियारों पर खर्च बंद कर देश के विकास में निवेश करें और बड़े देश छोटे देशों की मदद करें।
लेकिन उन्होंने कहा—
“विनाशकाले विपरीत बुद्धि” — जब विनाश का समय आता है, तो बुद्धि विपरीत हो जाती है।
हमारा धर्म: खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं
बाबा जी ने बताया कि रावण के पतन के पीछे तीन मुख्य कारण थे—
मांसाहार, नशा और गलत दृष्टि।
आज भी समाज उसी दिशा में बढ़ रहा है—
खानपान बिगड़ गया है, चरित्र कमजोर हो गया है और लोग भगवान को भूलते जा रहे हैं।
उन्होंने हिरण्यकश्यप का उदाहरण देते हुए कहा कि अहंकार अंत का कारण बनता है।
नाम की महिमा
बाबा जी ने कहा कि यदि लोग “जयगुरुदेव” नाम का जाप करेंगे और दूसरों को भी कराएंगे, तो बहुत हद तक मुसीबतों से रक्षा हो सकती है।
आने वाले समय की चेतावनी
उन्होंने आगे कहा कि यदि मांस, मछली, अंडा और शराब का सेवन बंद नहीं किया गया, तो भयानक बीमारियाँ फैलेंगी।
स्थिति ऐसी हो सकती है कि लोग शाम को सोएं और सुबह का सूरज न देख पाएं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पर्यावरण और हवा तक प्रभावित होगी, और कई क्षेत्रों में लोगों को पलायन करना पड़ सकता है।
यह समय जागने का है—
खुद को सुधारने का
नाम सिमरन करने का
और दूसरों को सही मार्ग दिखाने का
“खुद भी बचना है और दूसरों को भी बचाना है।”

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